परिंदों का शिकार, फ़िंगरप्रिंट हथियार

  • 15 जनवरी 2015
पक्षियों के पंखों पर फिंगरप्रिंट

वाइल्ड लाइफ़ क्राइम यानी जंगली जीवों के साथ अपराध के ख़िलाफ़ लड़ाई में एक बड़ी 'फ़ॉरेंसिक' कामयाबी मिली है.

स्कॉटलैंड के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी.

स्कॉटलैंड के डंडी में वैज्ञानिकों की एक टीम को पक्षियों का अवैध शिकार करने वालों के फिंगरप्रिंट हासिल करने में सफल हुई है.

वैज्ञानिकों ने ये फ़िंगरप्रिंट उन पक्षियों के पंखों से हासिल किए जिनका शिकार ग़ैरकानूनी तरीक़े से ज़हर देकर या गोली मारकर या फिर जाल में फंसाकर किया गया था.

शिकारियों के क़ब्ज़े से किसी तरह बच निकलने वाले इन पक्षियों की देह पर मिले उंगलियों के निशानों से संदिग्धों का पता लगाने में पुलिस को मदद मिली.

पंखों पर निशान

इमेज कॉपीरइट SCIENCE PHOTO LIBRARY

डंडी की अब्रटे यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि वह कैसे फ़िगरप्रिंट हासिल करती है.

परिंदे जिन्हें उड़ने नहीं दिया गया

वैज्ञानिकों ने पंखों पर पहले भड़कीले रंग और रोशनी देने वाले 'फ़्लोरेसेंट' पाउडर को छिड़का और फिर इसे लेज़र की रोशनी में रखा गया.

टीम के अहम वैज्ञानिक डेनिस जेनटल्स ने बताया, "हम फ़्लोरेसेंट पाउडर का इस्तेमाल इसलिए करते हैं क्योंकि लेज़र की रोशनी डालने पर किसी भी तरह के उंगलियों के निशान साफ़ दिख जाते हैं."

डेनिस बताते हैं, "इस फ़िंगरप्रिंट से अपराधी की पहचान संभव हो जाती है."

ग़ैरकानूनी शिकार

इमेज कॉपीरइट

टीम ने शोध के लिए छह प्रजाति के पक्षियों को चुना. ये पक्षी थे केस्ट्रेल्स, स्पैरोहॉक्स, बज्जार्ड, रेड काइट्स, गोल्डन ईगल और व्हाईट टेल्ड ईगल.

पशु-पक्षियों की अजीबोग़रीब सेक्स लाइफ

शोध साइंस एंड जस्टिस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

पक्षियों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था 'द रॉयल सोसायटी फ़ॉर द प्रोटेक्शन ऑफ़ बर्ड' यानी आरएसपीबी ने 2013 में पक्षियों के ख़िलाफ़ अपराधों की पुष्टि की थी.

2013 में आरएसपीबी ने लंदन में पक्षियों को गोली मारकर, जाल में फंसाकर और ज़हर देकर शिकार के 120 मामलों की जानकारी दी थी.

इमेज कॉपीरइट

यूरोप और दुनिया के दूसरे देशों में भी पक्षियों का ग़ैरक़ानूनी कारोबार किया जाता रहा है.

अंडों से फिंगरप्रिंट

शोध वैज्ञानिकों को इस तरह के फ़िंगरप्रिंट पंखों के अलावा पक्षियों के अंडों से भी मिले.

चम्मच वाली चिड़िया देखी है?

इमेज कॉपीरइट RSPB
Image caption पक्षियों को पकड़ने के लिए ज़हर का भी इस्तेमाल किया जाता रहा है.

पक्षियों के अंडे से फ़िगरप्रिंट हासिल करने के लिए इस पर काला चुंबकीय पाउडर का इस्तेमाल किया गया, ताकि पुलिस पक्षियों का ग़ैरकानूनी व्यापार करने वाले अपराधियों को खोज सके.

आरएसपीबी स्कॉटलैंड के आएन थॉमस का कहना है, "हालांकि सरकारी लेबोरेटरी में मृत पक्षियों की मौत के कारणों का पता लगाया जाता रहा है, लेकिन भीतरी इलाक़ों में अपराधी की पहचान करने में मुश्किलें आती रहीं."

नीलाम होगा दुनिया का सबसे बड़ा अंडा

थॉमस का कहना है कि ये अध्ययन फ़ॉरेंसिक तकनीकों के विकास की ओर एक और क़दम है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार