निठल्लापन आपको मारता है?

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शारीरिक तौर पर सक्रिय नहीं रहने वालों की ज़िंदगी छोटी होती है. 12 सालों तक तीन लाख लोगों पर किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है.

यूरोप में निष्क्रियता से मरने वालों की तादाद मोटापे से मरने वालों से क़रीब दोगुना ज़्यादा पाई गई है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैम्ब्रिज के शोधकर्ताओं ने बताया कि मोटापे से जहां तीन लाख 37 हज़ार मौतें हुईं, वहीं शारीरिक तौर पर मेहनत नहीं करने वाले छह लाख 76 हज़ार लोग मौत के शिकार बने.

कसरत है फ़ायदेमंद

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इन शोधकर्ताओं के अनुसार हर किसी को कम से कम 20 मिनट तक तेज़ी के साथ टहलना चाहिए.

विशेषज्ञों का कहना है कि कसरत करना हर भार वर्ग के लोगों के लिए फायदेमंद है.

मोटाई और निष्क्रियता एक दूसरे से जुड़ी हुई समस्या है. लेकिन पतले लोग अगर निष्क्रिय हों तो उनके स्वास्थ्य को जोखिम ज़्यादा होता है.

अमरीकन जर्नल ऑफ़ क्लिनिकल न्युट्रीशन में प्रकाशित इस शोध के अनुसार कसरत करने वाले मोटे लोग, कसरत नहीं करने वाले मोटे लोगों से ज़्यादा स्वस्थ्य होते हैं.

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