संक्रमणः 80 हज़ार की मौत का ख़तरा

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एक ब्रितानी सरकारी दस्तावेज़ के मुताबिक भविष्य में 'एंटीबॉयेटिक रेज़िस्टेंट बल्ड इंनफ़ेक्शन' के फैलने के कारण अस्सी हज़ार लोग मारे जा सकते हैं.

ब्रिटेन के नेशनल रिस्क रजिस्टर ऑफ़ सिविल इमरजेंसीज़ के मुताबिक ऐसा संक्रमण क़रीब दो लाख लोगों को प्रभावित कर सकता है और उनमें से हर पाँच में से दो लोगों की मौत हो सकती है.

यही नहीं अन्य प्रतिरोधी संक्रमणों से भी 'बड़ी तादाद' में लोगों की जान जा सकती है.

यदि ऐसा हुआ तो अधिकतर आधुनिक दवाएं असुरक्षित हो जाएंगी.

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Image caption पश्चिमी अफ़्रीका में फैले इबोला संक्रमण से हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं.

कैबिनेट ऑफ़िस के इस दस्तावेज़ के मुताबिक एंटिमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस में 'विषमताओं' के कारण अगले बीस सालों में ऐसे अन्य संक्रमणों की संख्या बढ़ सकती है.

दस्तावेज़ कहता है, "प्रभावी एंटीबॉयोटिक के बिना मामूली सर्जरी और सामान्य ऑपरेशन भी बड़े खतरों वाली चिकित्सीय प्रक्रियाएं बन जाएंगी. इससे बीमारियां लंबी होंगी और मौत भी जल्दी आएगी."

काला युग

इसके मुताबिक अंग प्रत्यारोपण, आंत्र सर्जरी और कुछ कैंसरों के इलाज़ असुरक्षित हो जाएंगे.

ब्रितानी सरकार अंतरराषट्रीय सहयोगियों के साथ इस वैश्विक समस्या से निपटने की कोशिशों में लगी है.

प्रधानमंत्री डेविड कैमरन कह चुके हैं, "यदि एंटिबॉयोटिक प्रतिरोध के इस ख़तरे से नहीं निपटा गया तो विश्व दवाओं के अंधकार काल में चला जाएगा."

इंग्लैंड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डेम सैली डेविस ने इस समस्या को एक "कभी भी फट सकने वाला बम" कहा है.

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