खुलेगा राज़- तेरा दिमाग मेरे से तेज़ कैसे

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वैज्ञानिक एक ऐसे मानव जीन की पहचान करने में सफल हुए हैं जो दिमाग की नई जानकारी को समझने से जुड़े हैं.

यह जीन ऑटिज़्म और व्यक्तित्व से भी संबंधित है.

शोध के निष्कर्षों से पता चलता है कि इससे मानसिक ह्रास को समझने में भी मदद मिल सकती है. इस शोध में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय भी शामिल रहा है.

महत्वपूर्ण प्रगति

मॉलीक्युलर साइकेट्री, में छपे इस विस्तृत शोध में 12 अलग-अलग देशों के आंकड़ों को शामिल किया गया था. इनमें स्कॉटलैंड, क्रोएशिया, ऑस्ट्रेलिया, फ़िनलैंड और हॉलैंड के प्रतिभागी शामिल थे.

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ये प्रतिभागी कम से कम 45 साल के थे और उन्हें डिमेंशिया नहीं था. उन्होंने संज्ञानात्मक क्रिया (cognitive function) परीक्षा दी, जिससे पता चल सके कि जानकारी को समझने की प्रक्रिया उनमें कितनी तेज है.

जिन लोगों की सूचना को समझने की गति धीमी थी उनमें एक जीन से मिलते-जुलते प्रकार मिले जिसे सेल एढेशन मॉलीक्यूल टू (सीएडीएम2) कहा जाता है.

सूचना को तेजी से समझने की क्षमता इससे जुड़ी है कि अन्य महत्वपूर्ण क्षमताएं कैसे काम करती हैं जैसे कि तर्क और याददाश्त.

सीएडीएम2 जीन दिमाग की कोशिकाओं में संवाद की प्रक्रिया से जुड़ा होता है. इस जीन की हरकतें दिमाग के उस हिस्से में सबसे ज़्यादा नज़र आती हैं जो सोचने की तेज़ी से जुड़ा होता है.

जीन के दो अन्य प्रकार, जो याददाश्त और सामान्य संज्ञानात्मक क्रिया से जुड़े होते हैं, वह भी इसी विस्तृत समूह के प्रतिभागियों के बुजुर्गों में मिले.

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प्रोफ़ेसर ईयान डीयरी एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में सेंटर फॉप कॉग्निटिव एजिंग एंड कॉग्निटिव एपिडेमियोलॉजी के निदेशक और शोध के सह-लेखक हैं.

वह कहते हैं, "कुछ लोगों के दिमाग के काम करने की गति दूसरों के मुकाबले अच्छी क्यों होती है, इसके संकेत मिलना छोटी लेकिन महत्वपूर्ण प्रगति है. इससे बेहतर ढंग से सोच पाने के जैविक आधार को समझा जा सकेगा."

प्रभावशाली निष्कर्ष

हालांकि वह ज़ोर देकर कहते हैं कि यह संबंध बहुत मामूली है और इसका पता सिर्फ़ इसलिए चल सका क्योंकि शोध में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे.

वह यह भी कहते हैं कि अगर शोध का आकार बढ़ा दिया जाए तो ऐसी और जानकारियां मिलेंगी.

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यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में इंस्टीट्यूट ऑफ़ कॉग्निटिव न्यूरोसाइंस के डॉक्टर जॉनेथन रोएज़र कहते हैं कि शोध के निष्कर्ष प्रभावशाली हैं.

"कुल मिलाकर आंकडों की दृष्टि से वह उल्लेखनीय हैं क्योंकि उन्होंने शोध के सभी नमूनों में उसी दिशा में वही प्रभाव पाया है. चाहे प्रतिभागी कहीं के भी हों."

"हमने सोचा था कि यह संज्ञानात्मक क्षमताओं का आनुवांशिक आधार होता है और इस शोध ने जीन के एक प्रकार का पता लगा लिया है."

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