कौन सा मर्ज़ है ये मर्स

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दक्षिण कोरिया में सांस की एक नई बीमारी फैल रही है जो सार्स वायरस की तरह है. सार्स वायरस साल 2003 में विश्व भर में फैल गया था.

विश्व स्वास्थय संगठन का कहना है कि मिडल ईस्ट रेस्पिरेट्री सिन्ड्रोम या मर्स नाम का ये कोरोना वायरस लोगों के एक-दूसरे के पास आने से फैल रहा है.

दक्षिण कोरिया में मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम यानि मर्स नाम के वायरस के फैलने से वहां सात लोगों की मौत हो गई है. ये वायरस उस व्यापारी से दक्षिण कोरिया में फैला जो पिछले दिनों सउदी अरब से लौटा था.

मर्स साल 2012 में मध्य-पूर्वी देशों में फैला था, लेकिन ये पहली बार है कि इस क्षेत्र से बाहर बड़े पैमाने पर फैला है.

आइए जानते हैं कि ये नया वायरस क्या है और इसे लेकर हमें चिंतित होना चाहिए या नहीं.

क्या है ये वायरस?

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ये वायरस एक तरह का कोरोना वायरस है जो कि ज़ुकाम और सार्स (सीवियर एक्यूट रेस्पिरेट्री सिंन्ड्रोम) का मिश्रण है.

इस वायरस से पहली मौत सउदी अरब में हुई थी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक ये वायरस अब तक कम से कम 442 लोगों की जान ले चुका है.

इनमें से ज़्यादातर मामले किसी जानवर से पैदा हुए हैं, लेकिन ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें ये वायरस एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य तक पहुँचा है.

इस वायरस से जुड़े मामले मध्य-पूर्वी, यूरोपीय और एशियाई क्षेत्र में 25 देशों में पाए गए हैं. लेकिन सबसे ज़्यादा मामले सऊदी अरब में है.

इसका क्या असर होता है?

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कोरोना वायरस सांस से जुड़ा इंफ़ेक्शन बन कर जानवरों और मनुष्यों के स्वास्थय पर असर करता है.

इसकी शुरुआत बुखार, खांसी और सांस की तकलीफ़ से होती है. कभी-कभी इससे निमोनिया और किडनी फ़ेलियर भी हो सकता है.

अब तक इससे प्रभावित हुए ज़्यादातर लोगों में बूढ़े आदमी शामिल हैं.

ये फैलता कैसे है?

इसके पीछे कोई पुख़्ता कारण नहीं पाया गया है. ये संभव है कि जब इससे ग्रस्त व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो वायरस फैलने का डर रहता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक जून 2015 तक मर्स वायरस से पीड़ित होने वाले 36% मरीज़ों की मौत हो चुकी है.

ये कितना ख़तरनाक है?

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जानकारों का मानना है कि ये वायरस बहुत ज़्यादा संक्रामक नहीं है. अगर ये बहुत ज़्यादा संक्रामक होता तो इसके मामले ज़्यादा होते.

कोरोना वायरस बहुत नाज़ुक होते हैं और वो शरीर के बाहरी हिस्सों में एक दिन के लिए ही टिक सकते हैं.

साथ ही ये वायरस कपड़े धोने वाले साबुन या डिटर्जेंट से ही नष्ट हो जाता है.

डॉक्टर हालांकि अभी ये नहीं बता पाए हैं कि इसका सबसे पुख़्ता इलाज क्या है लेकिन जिन लोगों पर इस वायरस का गंभीर असर होता है, उन्हें इंटेन्सिव केयर देने की ज़रूरत पड़ती है.

इससे बचने का कोई वैक्सीन भी अभी तक नहीं बना है.

इससे बचने के लिए क्या किया जाए?

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हालांकि अभी ये नहीं पता चला है कि ये वायरस आखिर फैलता कैसे है, लकिन कुछ सामान्य एहतियात बरतने से इससे बचा जा सकता है.

किसी भी ऐसे व्यक्ति के करीब न आएं जिसे खांसी-ज़ुक़ाम हो. और अपने हाथ दिन में कई बार धोएं.

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