वायरलेस चार्जिंग की मुसीबत

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अक्सर लोग यही सोचते होंगे कि बिना तार के फ़ोन चार्ज करना ज़्यादा सुविधाजनक होता होगा, लेकिन ऐसा है नहीं.

जब आप फ़ोन चार्ज करने जाएं तो आपके फ़ोन का चार्जिंग कॉइल और चार्जर के कॉइल का मिला हुआ होना ज़रूरी है, अगर थोड़ा सा हिल गया तो चार्जिंग रुक जाती है.

गूगल का नेक्सस-6 फ़ोन इस्तेमाल करने वाले ये बात जानते होंगे क्योंकि उस फ़ोन की ये ख़ास परेशानी है.

कुछ वायरलेस चार्जर को देख कर लगता है कि जो टेक्नोलॉजी लोगों की मुश्किल आसान करने के लिए बनाई गई थी अब वो परेशानी की वजह बन गई है.

'कीमत'

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एंड्रॉएडसेंट्रल डॉट कॉम की अगर मानें तो क्रैडल वाले वायरलेस चार्जर सबसे आराम वाले होते हैं.

आप ऐसे चार्जर ही ख़रीदें जिनमें एक से ज़्यादा कॉइल हों. ऐसे चार्जर के डिज़ाइन के समय ये ध्यान रखा जाता है कि किसी एक कॉइल से कॉन्टैक्ट बना रहे जिससे कि फ़ोन हमेशा चार्ज होता रहेगा.

जैसे-जैसे बड़े स्क्रीन पर वीडियो देखने की इच्छा के कारण फ़ोन और टैबलेट आकार में बड़े हो रहे हैं वायरलेस चार्जिंग आसान नहीं रही है.

इसीलिए जब आप वायरलेस चार्जर खरीद रहे हों, ये ज़रूर चेक कर लीजिए कि आपके फ़ोन को वह ठीक से चार्ज कर सकता है या नहीं.

वायरलेस चार्जिंग सस्ती नहीं होती है. मिसाल के तौर पर, सैमसंग का वायरलेस चार्जर करीब 3000 रुपए का मिलता है.

अगर ऑफिस और घर के लिए दो वायरलेस चार्जर खरीदना हो तो ज़रा बजट पर एक बार नज़र ज़रूर रखिएगा.

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