और खारे क्यों होते जा रहे हैं महासागर?

  • 6 जुलाई 2015
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कार्बन डाई ऑक्साइड के अनियंत्रित उत्सर्जन के कारण समुद्री जीवजंतुओं को भारी ख़तरा पैदा हो गया है.

साइंस जर्नल में लिखे एक लेख में विशेषज्ञों ने कहा है कि महासागर गर्म हो रहे हैं, उनका ऑक्सीजन तेजी से कम हो रहा है और कार्बन डाई ऑक्साइड की अधिकता के कारण पानी और खारा हो रहा है.

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर के देशों के बीच, तापमान में अधिकतम 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ोत्तरी पर हुआ समझौता भी नाकाफ़ी है.

इस लेख को दुनिया के शीर्ष 22 वैज्ञानिकों की मदद से तैयार किया गया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि जीवास्म ईंधन के जलने के कारण पैदा होने वाले कार्बन डाई ऑक्साइड ने समंदरों की रासायनिक प्रक्रिया में बदलाव की रफ़्तार को बढ़ा दिया है.

बदलाव की यह रफ़्तार 25 करोड़ साल पहले घटित ‘ग्रेट डाईंग’ नाम की प्राकृतिक परिघटना के बाद से सबसे तेज़ है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि 1750 के बाद से जितना हमने कार्बन डाई ऑक्साइड पैदा किया है, उसका 30 प्रतिशत समंदर ने सोख लिया है.

उत्सर्जन

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इसके अलावा 1970 के बाद से औद्योगिक समाज द्वारा पैदा की गई अतिरिक्त गर्मी का भी वो 90 प्रतिशत सोखकर जलवायु के ख़तरे को बढ़ा दिया है. अधिक गर्मी समुद्री पानी में ऑक्सीजन को घटाती है.

इस अध्ययन की अगुवाई करने वाले ज्यां पियरे गैट्टूसो का कहना है कि आज हम जितना कार्बन उत्सर्जन करते हैं, इससे धरती का तंत्र आने वाली कई पीढ़ियों के लिए पूरी तरह बदल सकता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र के पानी का खारापन बढ़ने के कारण प्रजनन, लार्वा बनने की प्रक्रिया और पोषण के अलावा कैल्शियम कार्बोनेट के कवच वाले समुद्री जीवों की विकास दर बाधित होगी.

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में तत्काल पर्याप्त मात्रा में कटौती नहीं की गई तो समुद्री जीवों को अपूर्णीय क्षति पहुंचेगी.

उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन का असर पर्यटन पर भी पड़ेगा.

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