लोगों को रेटिंग देने वाले ऐप पर हंगामा

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एक ऐसा ऐप बनाया गया है, जो किसी व्यक्ति की रैंकिंग कर सकता है. लेकिन बाज़ार में पेश किए जाने के पहले ही यह विवादों में घिर चुका है.

जिस तरह लोग रेस्तरां, होटल और दूसरी चीज़ों को रेटिंग देते हैं, उसी तरह लोग उन लोगों को रेटिंग दे पाएंगे जिन्हें वो इस ऐप के ज़रिए जानते हैं.

इस ऐप का नाम 'पीपल' रखा गया है. लेकिन सोशल मीडिया पर कई लोग इसे 'भयावह' बता रहे हैं.

'पीपल' बनाने वालों का कहना है कि वे किसी के बारे में नकारात्मक बात कहने से पहले लोग उसे देख सकेंगे.

हालांकि लोग अपने बारे में नकारात्मक कमेंट को डिलीट नहीं कर पाएंगे और न ही एक बार रजिस्टर करने के बाद वहां से हट पाएंगे.

विरोध

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ईस्ट एंगलिया यूनिवर्सिटी में निजता के पैरोकार पॉल बर्नल को भी 'पीपल' ऐप से आपत्ति है.

वे कहते हैं, "कुल मिला यह बहुत ही डरावना है. ये पीछा करने का औज़ार है."

वे आगे कहते हैं, "आप कैसे मालूम करेंगे कि कोई किसी शख़्स को जानता है? यदि आप फ़ेसबुक पर हैं तो आप अपने फ़ेसबुक फ़्रेंड्स में से कितनों को सचमुच में जानते हैं?"

'नई चीज का विरोध'

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कॉलयर-ब्रिस्टो क़ानून कंपनी के पार्टनर स्टीवन हेफ़र के मुताबिक़ इसमें क़ानूनी पेंच भी हैं.

वे कहते हैं कि यह ऐप मौजूदा सोशल मीडिया से अलग है. यह आपको दूसरे के बारे में नकारात्मक बातें कहने का मौक़ा देता है.

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वे आगे कहते हैं, "हो सकता है कि इस ऐप के साथ सुरक्षा का कोई उपाय हो. लेकिन आप लोगों को दूसरों की अवमानना करने से नहीं रोक सकते."

'पीपल' की सह संस्थापक जूलिया कोर्डरे कहती है, "हर नई चीज़ का विरोध होना स्वाभाविक है."

वे कहती हैं कि लोगों को यह ध्यान रखना होगा कि वे दिशा निर्देशों और ऐप की शर्तों का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं. ऐसा करने पर संबंधित आदमी पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.

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