महामारी जिस पर दवा भी होगी बेअसर

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भारत में जहां डेंगू हर साल आने वाली महामारी का रूप ले चुकी है वहीं दक्षिण पूर्व एशिया में पैदा हुए ड्रग रेज़िस्टेंट मलेरिया परजीवी के प्रसार से एक नई चुनौती खड़ी हो गई है.

एक अध्ययन में पाया गया है कि दक्षिण एशिया में पाया जाने वाला दवा प्रतिरोधक मलेरिया परजीवी अफ्रीका के मच्छरों को भी संक्रमित कर सकता है.

यह अध्ययन हालांकि प्रयोगशाला में किया गया है लेकिन इस जानलेवा परजीवी का प्रसार प्रयोगशाला के बाहर भी संभव है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं और लाखों लोगों की जिंदगी ख़तरे में पड़ सकती है.

यह शोध नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

अमरीका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एलर्जी एंड इंफेक्सियस डिजीज (एनआईएआईडी) ने यह शोध किया है.

एनआईएआईडी के डॉक्टर रिक फेयरहर्स्ट ने बताया, "हम मानते हैं कि यह शोध दक्षिण पूर्व एशिया में मलेरिया उन्मूलन की कोशिशों में मददगार होगा."

दवा प्रतिरोधक मलेरिया परजीवी पहली बार 2008 में कंबोडिया में देखा गया था लेकिन उसके बाद से पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में इसका तेज़ी से प्रसार हुआ.

मलेरिया से लड़ने वाली सबसे कारगर दवा आर्टीमिसिनिन भी इस परजीवी के सामने बेकार है.

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डॉक्टर रिक का कहना है कि इस परजीवी को रोकना वाकई में बहुत मुश्किल होने वाला है.

लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. 1950 के दशक से लेकर हर बार एक नई दवा ने समय-समय पर मलेरिया के विकसित होते नए परजीवियों को रोका है.

और हर बार यह नया परजीवी पहली बार थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर विकसित हुआ है और फिर वहां से पूरी दुनिया में फैला है.

हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ दुनिया भर में पिछले 15 सालों में मलेरिया से मरने वालों की संख्या में 60 फ़ीसदी की गिरावट आई है और 62 लाख लोगों को मलेरिया से होने वाली मौत से बचाया गया है.

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