वीडियो कॉलिंग अब और आसान

  • 23 नवंबर 2015
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अगर आप अपने दोस्तों और परिवार से साथ वीडियो कॉलिंग के ज़रिए कनेक्ट करते हैं तो आपके लिए ऐसा करना अब पहले से आसान हो गया है.

आप माइक्रोसॉफ़्ट के स्काइप के ज़रिए कनेक्ट करना चाहते हैं या गूगल के हैंगआउट के ज़रिए, यह आपके ऊपर है.

अब तक हैंगआउट से वीडियो कॉल करने के आपके गूगल पर लॉग-इन करना ज़रूरी होता था. आप दूसरों को अपने दोस्तों की लिस्ट में शामिल तो कर सकते थे लेकिन सिर्फ़ उनके फ़ोन पर ही कॉल कर सकते थे, टैबलेट, डेस्कटॉप या लैपटॉप पर नहीं.

गूगल के हैंगआउट से अगर आप वीडियो कॉल करते हैं तो उसके लिए आपको गूगल अकाउंट की ज़रुरत नहीं होगी. अब आपको अपने दोस्तों को सिर्फ़ एक लिंक भेजना पड़ेगा जिसके बाद आपके दोस्त आपके ऑडियो या वीडियो कॉल का हिस्सा बन सकते हैं.

स्काइप ने पिछले महीने ऐसे ही बदलाव अपने सिस्टम में किए थे जिससे किसी को भी ऐसे कॉल में शामिल किया जा सकता है.

स्काइप पर अब किसी भी दोस्त को बिना स्काइप अकाउंट के एक लिंक भेज कर कनेक्ट किया जा सकता है.

सिक्योरिटी के लिहाज़ से कुछ भी नहीं बदला है क्योंकि अगर आप ग्रुप चैट कर रहे हैं तो जो भी उस चैट का एडमिन है वो किसी को भी शामिल कर सकता है या उसकी आवाज़ को म्यूट भी कर सकता है. और अगर ज़रुरत हो तो वो किसी को भी चैट से बाहर भी कर सकता है.

टेलीकॉम कंपनियों के लिए ये बुरी खबर है कि वीडियो कॉलिंग और आसान हो रहा है. भारत में टेलीकॉम कंपनियों का दावा है कि जो लोग डेटा सर्विस का इस्तेमाल फ़ोन कॉल या वीडियो कॉल के लिए करते हैं उन्हें उसके लिए और पैसे देने चाहिए.

ग्राहकों की तरफ़ से इसका ज़बरदस्त विरोध हो रहा है. उनका कहना है कि एक बार वो डेटा सर्विस के लिए पैसे दे देते हैं उसके बाद उसका वो जो भी करें उससे टेलीकॉम कंपनियों को कोई मतलब नहीं होना चाहिए.

फ़ेसबुक मैसेंजर, काकाओ टॉक, लाइन, टैंगो, ICQ, वाइबर, वीचैट जैसे दर्जनों और ऐप पर भी आप वीडियो कॉलिंग कर सकते हैं. टेलीकॉम कंपनियों का दावा है कि इनके कारण उन्हें नुक़सान हो रहा है.

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