ऑनलाइन ख़तरे का नया नाम है मैलएडवर्ट

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मोबाइल के ज़रिए इंटरनेट की सुरक्षा को लेकर लगभग हर रोज़ नए सवाल खड़े होते रहते हैं. जो लोग आपके बारे में जानकारी हासिल करना चाहते हैं वो रोज़ रोज़ नए तरीके ढूंढते रहते हैं.

अब एक नया बवाल खड़ा हो गया है और उसका नाम है मैलएडवरटाइजिंग यानी एडवरटाइजिंग और मैलवेयर को मिलाकर जो कंटेंट तैयार किया जाता है.

जब भी आप अपने मोबाइल या टेबलेट पर किसी विज्ञापन पर क्लिक करते हैं तो उसके साथ जो मैलवेयर डाउनलोड होता है उसको मैलएडवर्टाइज़िंग कहते हैं.

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कुछ एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि अगर आप विज्ञापन ब्लॉक करने के लिए कोई सॉफ्टवेयर का भी इस्तेमाल करेंगे तो भी आप मैलएडवरटाइज़िंग को रोक नहीं सकते हैं.

किसी भी वेबसाइट पर जो भी विज्ञापन आप देखते हैं कभी कभी तो उस वेबसाइट वालों को ही ऐसे मैलवेयर के बारे में पता नहीं होता है. द वर्ज मैगज़ीन की इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल में ऐसे मामलों में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है.

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इसके बारे में जानना इसीलिए ज़रूरी है क्योंकि कहीं गलती से आप अपने मोबाइल फ़ोन पर किसी विज्ञापन पर क्लिक न कर दें.

स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाला हर इंसान मैलएडवरटाइज़िंग का शिकार हो सकता है. चूंकि भारत में स्मार्टफोन तेज़ी से बढ़ रहा है, इसलिए ये मुद्दा लोगों की जानकारी के लिए अहम है.

हैरत की बात है कि जो विज्ञापन के नेटवर्क आपको ऑनलाइन विज्ञापन दिखाते हैं, उन्हें भी ऐसी मैलएडवरटाइज़िंग पर नज़र रखने में मुश्किल हो रही है.

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