अगले साल भी बढ़ेगा पारा, कम मॉनसून?

सूखा, जलवायु परिवर्तन

ब्रिटेन के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि दुनिया का तापमान 2016 में 2015 से भी अधिक हो सकता है.

इस साल को अस्थाई रूप से अब तक का सबसे गर्म साल क़रार दिया जा चुका है जिसके लिए ग्लोबल वॉर्मिंग और मजबूत अल नीनो का प्रभाव दोनों ज़िम्मेदार हैं.

मौसम विभाग का मानना है कि 2016 में तापमान औद्योगिक-पूर्व काल (1850-1900 के संदर्भ काल के अनुसार) से 1.1 सेल्सियस अधिक हो सकता है.

पिछले हफ़्ते पेरिस में दुनिया के देश इस पर सहमत हुए हैं कि इस वृद्धि को 1.5 सेल्सियस पर सीमित रखने की कोशिशें की जाएं.

एक कंप्यूटर मॉडल और एक सांख्यिकीय पद्धति का इस्तेमाल करने वाले नए पूर्वानुमान में कहा गया है कि अगले 12 महीनों में विश्व का तापमान 1961-1990 के औसत से 0.84 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है.

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जब औद्योगिक-पूर्व काल से तुलना की जाती है तो पूर्वानुमान के अनुसार अगले साल का तापमान 1850-1899 के औसत से 1.1 डिग्री सेल्सियस ऊपर रह सकता है. यह 1.5 डिग्री सेल्सियस की निर्धारित सीमा के नज़दीक पहुंच रहा है.

पिछले साल 2015 के लिए पूर्वानुमान 0.64 डिग्री सेल्सियस के केंद्रीय अनुमान से ऊपर था. इस साल जनवरी से अक्टूबर तक निरीक्षण किए गए आंकड़े बताते हैं कि इस साल वैश्विक मध्यमान तापमान 1961-1990 से 0.72 ऊपर चल रहा है.

मौसम विभाग के प्रोफ़ेसर एडम स्कैफ़े कहते हैं, "अगले साल का पूर्वानुमान अन्य मजबूत देशों के आधार पर किया गया है."

"साल 2014 में यह 0.6 रहा है जो नाममात्र का रिकॉर्ड था, अब तक 2015 में यह 0.7 है और यह भी नाममात्र का रिकॉर्ड है. अगले साल हम 0.8 की बात कर रहे हैं- आप देख सकते हैं तीन साल में यह तीव्र वृद्धि है और 2016 तक हमें लगातार तीन साल तक रिकॉर्ड वृद्धि मिलेगी."

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मजबूत अल नीनो जो इस साल शुरू हुआ है वह अगले साल के आधे समय तक जारी रहेगा.

इसकी वजह से भारत में मॉनसून कमज़ोर रहा है और इसने अटलांटिक के हरिकेन मौसम को भी कमज़ोर कर दिया है और उत्तरी यूरोप में पिछले कुछ हफ़्तों में सर्दी के तूफ़ानों के जल्दी आने की भी वजह रहा है.

ब्रितानी मौसम विभाग में पूर्वानुमान लगाने वाले कहते हैं यह अगले साल 0.2 डिग्री सेल्सियस मूल्य तक के लिए ज़िम्मेदार है. जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर यह एक नया रिकॉर्ड बना सकता है.

प्रोफ़ेसर स्कैफे कहते हैं, "एक सीमा तक अनिश्चितता है, 2016 की सीमा का निचला स्तर 2015 के वर्तमान मूल्य के नज़दीक है, इसलिए यह असंभव नहीं कि परिणाम 2015 जैसे ही आएं लेकिन बहुत संभव है कि यह अधिक हों."

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मौसम विभाग अधिकारियों का कहना है कि हो सकता है कि तापमान में वृद्धि का पूर्वानुमान अनंतकाल के लिए न हो और आने वाले सालों में एक डिग्री नीचे गिर जाए.

लेकिन उनका कहना है कि तापमान बढ़ने के संकेत छोटे-छोटे प्राकृतिक उतार चढ़ाव से अप्रत्याशित ढंग से जुड़ कर "अभूतपूर्व घटनाओं" को जन्म दे सकते हैं.

प्रोफ़ेसर स्कैफ़े कहते हैं., "ऐसा तह होता है जब प्राकृतिक परिवर्तनशीलता जलवायु परिवर्तन के ऊपर सवार होती है और हमें ऐसी चीज़ देखने को मिलती है जो हमने पहले कभी न देखी हो."

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