जब रोबोट प्रतिबंधित ड्रग ख़रीदकर 'गिरफ़्तार' हुआ

  • 18 दिसंबर 2015

पिछले साल अक्तूबर में रैंडम डार्कनेट शॉपर नाम के एक रोबोट ने ऑनलाइन ख़रीदारी शुरू की.

लेकिन जब इसने प्रतिबंधित ड्रग एक्सटेसी ख़रीदी, तो पुलिस हरकत में आ गई. लेकिन रोबोट की ख़रीदारी के लिए ज़िम्मेदार किसे ठहराया जाए?

दरअसल हर बुधवार को 100 डॉलर के बिटकॉइन से रैंडम डार्कनेट शॉपर रोबोट अगोरा मार्केट से एक एलगोरिदम के अनुसार चीज़ें ख़रीदा करता था.

इन्हें फिर स्विट्ज़रलैंड में एक आर्ट्स ग्रुप मेडीएनग्रुप्पे बीटनीक के स्टूडियो में पहुंचा दिया जाता था.

रोबोट निर्माता डोमागोज समोलजो और कारमेन वीसकॉफ़ इन सामानों को खोलते और सावधानी से लोगों के देखने के लिए रख देते थे.

क्या है बिटकॉइन और डार्क वेब?

रोबोट ने कुल 12 चीज़ें ख़रीदी थीं, जिनमें एयर जॉर्डन के जूते, हंगेरियन पासपोर्ट की प्रति और नशीली ड्रग एक्सटेसी की 10 गोलियां थीं.

यह सिलसिला आराम से इस साल जनवरी तक चलता रहा जब स्विस पुलिस ने रोबोट को गिरफ़्तार कर लिया.

पुलिस ने कंप्यूटर और रोबोट का ख़रीदा सामान भी ज़ब्त कर लिया है.

गिरफ़्तारी तब हुई जब डोमागोज समोलजो और कारमेन वीसकॉफ़ ने रोबोट की ख़रीदी चीज़ों की प्रदर्शनी लगाई.

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हालांकि अप्रैल में रोबोट को ज़ब्त किए गए समान के साथ (सिवाय प्रतिबंधित ड्रग्स के) रिहा कर दिया गया था.

रोबोट बनाने वालों को भी किसी अपराध का दोषी नहीं पाया गया. मगर इस गिरफ्तारी ने इंसान और कंप्यूटर के अपराध को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं.

यह पहली बार नहीं था कि कोई रोबोट ऐसे ऑनलाइन ख़रीदारी कर रहा था पर इससे पहले ज़्यादातर रोबोट अमेज़न या ईबे जैसी मशहूर साइटों से ही ख़रीदारी करते थे.

मेडीएनग्रुप्पे बीटनीक ग्रुप से किसी ने ब्लॉग पर लिखा, "ऐसा लगता है कि गिरफ़्तारी और सामान ज़ब्ती का मक़सद थर्ड पार्टी यानी इससे अलग किसी तीसरे इंसान को दिखाई गई ड्रग्स के संभावित नुक़सान से बचाना था."

वीसकॉफ़ कहती हैं कि उन्होंने दो कारणों से डार्कनेट शॉपर के साथ अलग प्रयोग किया.

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उन्होंने कहा, "हम इंटरनेट को अपनी कलात्मकता के लिए अहम मानते हैं. हम इंटरनेट की मदद से अपना काम करते हैं. "

लेकिन इनकी दिलचस्पी यह जानने में भी थी कि सरकार कैसे इंटरनेट का इस्तेमाल लोगों पर नज़र रखने के लिए करती है.

इसके बाद समोलजो और वीसकॉफ़ ने वेब की दुनिया के स्याह पहलुओं (डार्क नेट) की पड़ताल का फ़ैसला लिया.

वीसकॉफ़ कहती हैं, "हमें यह जानने में दिलचस्पी थी कि कैसे लोग इंटरनेट पर अनजाने लोगों पर यक़ीन कर लेते हैं. हमने ऑनलाइन मार्केट के क्षेत्र में प्रयोग करने का फ़ैसला किया क्योंकि मार्केट के लिए विश्वसनीयता ज़रूरी है. आप यों ही किसी को सामान भेजकर पैसा पाने की उम्मीद नहीं कर सकते."

इसी मक़सद से डार्कनेट शॉपर को बनाया गया था.

मौलिक रूप से रोबोट इंसान की रचना है. वो इंसान के दिए आदेशों का पालन करते हैं. इसलिए उनके किए कामों के लिए रोबोट बनाने वाला ज़िम्मेदार है.

स्मार्ट रोबोट के मामले में यह थोड़ा जटिल है क्योंकि वो ऐसा कर सकते हैं जिसके बारे में उनको बनाने वाले ने भी न सोचा हो.

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Image caption रोबोट के अपराध के लिए उसे बनाने वाला, उसका मालिक या वो ख़ुद जिम्मेवार है?

लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा के कंप्यूटेशनल लीगल थ्योरी के प्रोफ़ेसर बरखार्द शाफ़र के मुताबिक़ ऐसे में बनाने वाले को ही आमतौर पर ज़िम्मेदर माना जाएगा.

उनका कहना है, "अगर आप अपने आसपास के माहौल में कोई ख़तरनाक चीज़ रखते हैं तो उसके लिए आप ही ज़िम्मेवार होंगे."

कुत्ता रखने वाले लोगों को पता होता है कि वे कुत्ते की सभी हरकतों पर नियंत्रण नहीं रख सकते. फिर भी अगर किसी के पास कोई ख़तरनाक कुत्ता है तो यह उसकी ज़िम्मेदारी होती है कि वो दूसरों को उससे बचाए.

कुत्ते तो अब तक ईजाद किए गए किसी भी कंप्यूटर सिस्टम से ज़्यादा इंटेलिजेंट होते हैं.

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वीसकॉफ़ का कहना है कि रैंडम डार्कनेट शॉपर कंप्यूटर की मदद से चलने वाला एक आम रोबोट है लेकिन लोग उसे जीवित प्राणी के रूप में देखते हैं.

बीटनीक के रोबोट बनाने वाले इस दल के पास ऐसी और परियोजनाएं हैं जो रोबोट और इंसान की ज़िंदगी के बीच इन पेचीदा सवालों का जवाब देने की कोशिश करेंगी.

वे शॉपर को स्विट्ज़रलैंड के बाहर भी चलाकर देखना चाहते हैं कि परिणाम और प्रतिक्रिया पर क्या फ़र्क पड़ता है.

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वीसकॉफ़ का कहना है कि अलग-अलग न्यायिक क्षेत्र और कॉपीराइट से जुड़े सवालों का जवाब अलग-अलग देशों में अलग-अलग क़ानून के अंदर खोजना मुश्किल है.

उनका कहना है कि उनकी दिलचस्पी रोबोट या सॉफ़्टवेयर की जवाबदेही में है लेकिन इससे अज्ञात लोगों की निगरानी का भी सवाल जुड़ा है.

वह कहती हैं, "हम भविष्य में डिजिटल दुनिया को कैसा देखना चाहते हैं? हम उसके साथ क्या करना चाहते हैं? हम यह भी सोचते हैं कि आख़िर क्या संभव होना चाहिए?"

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.

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