फ़ेसबुक मामले में ट्राई के फ़ैसले को समझिए

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टेलीकॉम सेक्टर के नियामक ट्राई के फ्री-बेसिक्स पर रोक लगाने के बाद फ़ेसबुक ने निराशा जताई है.

फ़ेसबुक ने कहा है कि ट्राई के इस फ़ैसले के बावजूद वो भारत में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को ऑनलाइन लाने की कोशिश करेगा.

इस रिपोर्ट (रिपोर्ट पढ़ें) के अनुसार भारत में फ़ेसबुक के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर कहा कि कंपनी ऐसा प्लेटफ़ॉर्म लाना चाहती है जो फ्री हो.

फ़ेसबुक के लिए ट्राई का फ़ैसला ज़बरदस्त झटका है क्योंकि भारत उसके लिए अमरीका के बाद सबसे बड़ा बाज़ार है.

देश में फ़ेसबुक के क़रीब 15 करोड़ सब्सक्राइबर हैं और मोबाइल कंपनियों के साथ मिलकर उसकी कोशिश थी कि इस बाज़ार पर अपनी पकड़ और मज़बूत करे.

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फ़ेसबुक ने भारत के बाज़ार पर ध्यान इसलिए दिया है क्योंकि चीन में सोशल मीडिया कंपनियों पर रोक-टोक बहुत ज़्यादा है.

भारत के अंग्रेज़ी बोलने वाले लोगों के बाज़ार में अपनी पैठ बनाने के बाद फ़ेसबुक को उम्मीद थी कि वो हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के बाज़ार पर भी उसी तरह क़ब्ज़ा कर पाएगा. ऐसे ही वर्चस्व के लिए फ्री-बेसिक्स को तैयार किया गया था.

चीन के बाद अब भारत स्मार्टफ़ोन का दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है इसलिए फ़ेसबुक ज़्यादा से ज़्यादा नए ग्राहकों को अपने साथ जोड़ना चाहता है.

पिछले साल भारत में 10 करोड़ से ज़्यादा स्मार्टफ़ोनों की बिक्री हुई और अक्तूबर और दिसंबर के बीच जितने भी स्मार्टफ़ोन बिके थे, उनमें से आधे 4G स्मार्टफ़ोन थे. रिलायंस जिओ के लॉन्च के बाद ग्राहकों की पसंद और भी तेज़ी से 4G की तरफ़ झुक सकती है. ऐसे बाज़ार में फ़ेसबुक सबसे बड़ी ऑनलाइन कंपनी बनने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता था.

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फ़ेसबुक के प्रमुख मार्क ज़करबर्ग ने अंग्रेज़ी अखबार ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ में एक लेख (पढ़ें लेख) लिखा था जिसमें ये दावा किया गया था कि भारत में मोबाइल का इस्तेमाल काफ़ी होता है लेकिन मोबाइल इंटरनेट अब भी कम लोग इस्तेमाल करते हैं. इस लेख में ज़करबर्ग ने फ्री-बेसिक्स को अस्पतालों और स्कूलों जितना अहम बताया था.

ज़करबर्ग ने ये भी कहा था कि 35 मोबाइल कंपनियों ने फ्री-बेसिक्स लॉन्च किया है जिसकी मदद से क़रीब डेढ़ करोड़ लोग मोबाइल इंटरनेट से जुड़ गए हैं.

ज़करबर्ग ने यहां तक भी कह दिया था कि ऐसी कोई वजह नहीं है जिससे लोगों को फ्री-बेसिक्स की सर्विस नहीं दी जाए.

लेकिन ट्राई ने फ़ेसबुक और ज़करबर्ग के अभियान के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाया. पिछले महीने फ़ेसबुक ने फ्री-बेसिक्स के समर्थन में ट्राई को ईमेल भिजवाने का अभियान चलाया था, जिस पर ट्राई ने फ़ेसबुक को फटकार लगाई थी.

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अपने फ़ैसले में ट्राई ने सिर्फ़ फ्री-बेसिक्स पर रोक नहीं लगाई है, बल्कि जितनी भी 'ज़ीरो रेटेड' सर्विस हैं उन पर रोक लगाई गई है. 'ज़ीरो रेटेड' सर्विस उनको कहते हैं जिसमें लोग डेटा के लिए पैसे दिए बिना चुनिंदा वेबसाइट को एक्सेस कर सकते हैं. अब नए नियमों के अनुसार किसी भी ऐसी सर्विस चलाने की इजाज़त नहीं है.

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रिलायंस कम्युनिकेशन ने फ़ेसबुक के साथ ऐसी ही सर्विस लॉन्च की थी लेकिन ट्राई ने इस सर्विस पर रोक लगा दी थी. एयरटेल ने भी अपनी ज़ीरो रेटिंग वाली सर्विस लॉन्च करने की सोची थी लेकिन कई ऑनलाइन कंपनियों और टेलीकॉम पॉलिसी से जुड़े लोगों के कड़े तेवर के बाद सर्विस को लॉन्च नहीं किया था.

दुनिया की कोई भी कंपनी जो टेलीकॉम कंपनियों के साथ हाथ मिलाकर फ्री-बेसिक्स के जैसा कुछ करने की सोच रही थी उनके लिए अब दरवाज़ा बंद हो गया है. फ़ेसबुक का दावा है कि फ्री-बेसिक्स 35 देशों में चल रहा है लेकिन हाल ही में कुछ देशों ने इसे नकार भी दिया है.

कुछ लोगों का कहना है कि टेलीकॉम कंपनियां ट्राई के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकती हैं लेकिन कुछ भी हो, डिजिटल इंडिया पर अब दुनिया भर की नज़र है.

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