मशीन ने हराया 'गो' चैंपियन को

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गूगल के आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस प्रोग्राम 'अल्फ़ा गो' ने बोर्ड गेम 'गो' के मास्टर खिलाड़ी ली से-डोल को पांच मैचों की सिरीज़ में 3-0 से मात दे दी है.

कई पेशेवर टूर्नामेंट जीत चुके दक्षिण कोरिया के ली को 'गो' का चैंपियन माना जाता है.

ली से-डोल की हार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है.

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ली के पूर्व कोच रहे क्वॉन काप-योंग ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "अल्फ़ा गो ने शुरू से अंत तक एक सा खेल दिखाया, लेकिन ली एक मानव हैं और उन्होंने कुछ कमज़ोरियां दिखाईं."

1997 में कंप्यूटर ने शतरंज के विश्व चैंपियन को हराया था लेकिन गो को शतंरज से भी मुश्किल खेल माना जाता है.

पहले मैच में अल्फ़ा गो ने बहुत कम मार्जिन से जीत हासिल की थी. दूसरा मैच हारने के बाद ली ने कहा था कि उनके पास शब्द नहीं बचे हैं.

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मुक़ाबले की यू ट्यूब स्ट्रीम के लिए कमेंट्री करने वाले विशेषज्ञों ने कहा कि ली ने बेहतरीन खेल दिखाया लेकिन फिर भी अल्फ़ा गो ने बड़े स्टाइल से मात दे दी.

अल्फ़ा गो बनाने वाली एक ब्रितानी कंपनी 'डीप माइंड' को गूगल ने साल 2014 में खरीदा था.

डीप माइंड के मुख्य कार्यकारी डेमिस हासबिस ने कहा, "वह ख़ुद के साथ खेलता है. लाखों बार खेलने के बाद वह अपनी ग़लतियों से सीखता रहता है."

मशीन और इंसान की इस होड़ की शुरुआत 1959 में हुई थी जब आर्थर सैमुअल ने खेल के लिए एक प्रोग्राम बनाया था जो सफल हुआ था.

फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए चुनौती बढ़ाते हुए इसके आलोचकों ने कंप्यूटर के लिए शतरंज में जीत का लक्ष्य रखा.

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वर्ष 1997 में जब आईबीएम के सुपर कंप्यूटर 'डीप ब्लू' ने शतरंज के ग्रांड मास्टर कास्पारोव को हराया था तो दुनिया ने दांतों तले उंगली दबा ली थी.

फिर डीप ब्लू से भी आठ गुना मेमरी वाले कंप्यूटरों के सामने 'गो' की चुनौती रखी गई क्योंकि आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस के लिए गो एक बहुत बड़ी पहेली साबित हो सकती थी लेकिन अब मशीन ने इस पर फ़तह हासिल कर ली है.

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क्या है खेल 'गो'?
  • 'गो' क़रीब 2500 साल पुराना चीनी खेल है जिसमें 19-19 खानों वाला ग्रिड होता है जिसमें दो खिलाड़ी सफ़ेद और काले पत्थरों से खेलते हैं.
  • एक खिलाड़ी अपने रंग के पत्थर से विरोधी खिलाड़ी के पत्थर को चारों तरफ़ से घेरने की कोशिश करता है.
  • डीप माइंड की टीम का कहना है कि ब्रह्मांड में जितने अणु हैं उससे ज़्यादा पोज़ीशन 'गो' में हैं.
  • शतरंज के मुक़ाबले गो के नियम आसान हैं और हर खिलाड़ी के पास क़रीब 200 चालों की संभावना होती है, जबकि शतरंज में 20 संभावित चालें होती हैं.
  • ये तय करना मुश्किल होता है कि कौन जीत रहा है लेकिन टॉप खिलाड़ी अपनी सूझ-बूझ का सहारा लेते हैं.
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तो सवाल यह है कि क्या इस जीत से मशीन, मानव पर पूरी तरह हावी हो जाएगी.

शायद नहीं, क्योंकि आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस आपके लिए चाय तो नहीं बना सकता, पर हां इंसानों को अपनी नौकरियों की फ़िक्र ज़रूर हो सकती है.

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