बदनाम फ़िल्म, लेकिन हाउसफ़ुल क्यों?

  • 12 मार्च 2016
टॉमी विसाऊ इमेज कॉपीरइट Olivia Howitt

हमें अक्सर, अच्छी फ़िल्में याद रह जाती हैं. उनकी कहानी, किरदार, डायलॉग, गाने, सीन, ज़ेहन में रच-बस जाते हैं. ऐसी अच्छी फ़िल्में देखने का बार-बार मन करता है.

मगर, क्या आपने कभी किसी बकवास फ़िल्म के प्रति दीवानगी देखी-सुनी है? ऐसी फ़िल्में जिन्हें देखा नहीं झेला जाता है. दर्शक जिसे देखते वक़्त गालियां देते हों, स्क्रीन पर अंडे और टमाटर फेंकते हों. जिनको लोग बुरा सपना समझकर भूल जाना चाहते हैं. ऐसी फ़िल्मों के प्रति क्रेज़ की बात करना आपको पागलपन ही लगेगा.

मगर, एक ऐसी हॉलीवुड फ़िल्म है, जो सुपरफ्लॉप हुई. महाबकवास कही गईं. फिर भी बनने के तेरह साल बाद लोग उसके दीवाने हैं. इस फ़िल्म का नाम है 'द रूम'. फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक, लेखक और हीरो टॉमी विसाऊ को इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता. वो कहते हैं कि कम से कम लोग अपने मन की बात खुलकर तो कह पा रहे हैं. फ़िल्म नहीं पसंद आ रही तो उसको खुलकर कोस तो रहे हैं.

अभी हाल में 'द रूम' लंदन के मशहूर प्रिंस चार्ल्स सिनेमाघर में लगी थी. इसके शो लगातार हाउसफ़ुल जा रहे थे. लोग पैसे खर्च कर करके आ रहे थे सिनेमाघर, फ़िल्म का मज़ाक़ बनाने, गालियां देने.

शो शुरू होने से पहले ख़ुद टॉमी, सिनेमाघर में लोगों से मिल रहे थे. फ़ोटो खिंचा रहे थे. ऑटोग्राफ़ दे रहे थे, अपने और फ़िल्म के नाम की टी-शर्ट बेच रहे थे. दिखने में टॉमी किसी हेवी मेटल रॉक बैंड के सदस्य जैसे लगते हैं. दर्शक भी उनसे उसी तरह बर्ताव कर रहे थे, ख़ुशी से पागल हुए जा रहे थे, टॉमी से मिलकर.

इमेज कॉपीरइट Olivia Howitt

लंदन में ही नहीं, टॉमी जहां भी जाते हैं, उनका ऐसा ही स्वागत होता है. उनकी बदनाम फ़िल्म 'द रूम' 2003 में रिलीज़ हुई थी. फ़िल्म ने इतने पैसे भी नहीं कमाए कि उसे ढंग से फ़िल्म का दर्जा मिल सके. मगर, आज इसके प्रति ज़बरदस्त दीवानगी है.

इसकी शुरुआत अभिनेताओं पॉल रड और क्रिस्टेन बेल ने की. जब ख़बरें आईं कि उन्होंने 'द रूम' की स्पेशल स्क्रीनिंग की, अपने दोस्तों के लिए. इसके बाद तो इस बकवास फ़िल्म को 'मिडनाइट मूवी' के तौर पर अमेरिका और यूरोपीय देशों में ख़ूब शोहरत मिली.

लोगों ने माना कि ये फ़िल्म सिर्फ़ ख़राब नहीं, बल्कि भयंकर रूप से भद्दी है.

लेकिन, लोग कहते हैं न कि बदनाम हुए तो क्या, नाम तो हुआ. वही हश्र 'द रूम' का भी हो रहा है. आज इसके दीवानों की तादाद बढ़ती जा रही है.

अमेरिकी अभिनेता-निर्माता-निर्देशक, जेम्स फ्रैंको, इस फ़िल्म के बनाने पर ही द डिज़ैस्टर आर्टिस्ट के नाम से फ़िल्म बना रहे हैं. इसमें ब्रायन क्रैंस्टन, शैरॉन स्टोन औऱ जैकी वीवर जैसे मशहूर हॉलीवुड अभिनेता शामिल हैं. मतलब ये कि आज हॉलीवुड के कुछ शानदार कलाकार, भद्दे अभिनय की एक्टिंग करने जा रहे हैं.

यूं तो पूरी दुनिया में हर साल एक से एक बकवास फ़िल्में बनती हैं. मगर आख़िर क्या ख़ास है 'द रूम' में कि लोग इसको इतना पसंद कर रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट Olivia Howitt

लोग इसकी तीन वजहें बताते हैं. पहले तो इसे देखना ही अपने आप में बेहद तक़लीफ़देह है. नाक़ाबिलियत, और ग़लत फ़ैसले का कॉकटेल है ये फ़िल्म.

सिर्फ़ एक अपार्टमेंट के एक कमरे अंदर बनी है ये फ़िल्म. जिसमें तीन मुख्य किरदार हैं. लिज़ा नाम की एक लड़की, जिसको हर बात से शिकायत है. वो जॉनी नाम के एक बैंकर से प्यार करती है, जिसको अपने शरीर के दिखावे का बड़ा शौक़ है. अब शिकायती लिज़ा को जॉनी से दिक़्क़त है तो वो उसके दोस्त मार्क को रिझाने में वक़्त लगाती है.

कुल 99 मिनट की इस फ़िल्म में बोझिल सीन ठूंस-ठूंस कर भरे गए हैं. पूरी फ़िल्म में लिज़ा अपने दोस्तों और अपनी मां से यही शिकायत करती रहती है कि वो अपने ब्वॉयफ्रैंड जॉनी से शादी नहीं करना चाहती.

फ़िल्म का बाक़ी बचा हिस्सा वाहियात क़िस्म के सेक्स सीन के हवाले है. इस दौरान कई और किरदारों की कहानियां कब शुरू होती हैं, कब ख़त्म होती हैं, पता ही नहीं चलता.

फ़िल्म के डायलॉग इतने घटिया हैं कि इन्हें किसी कंप्यूटर से किसी और ज़ुबान से तर्जुमा करके भी इकट्ठा किया जा सकता था.

कलाकारों का बेमतलब मुंह बनाना, एक दूसरे का मज़ाक़ बनाना, सब-कुछ एकदम वाहियात है. मगर सबसे बोझिल किरदार ख़ुद टॉमी विसाऊ का है. वो कहीं से भी बैंकर नहीं लगता. देखने में ड्रैकुला जैसा लगता जॉनी, फ़िल्म के इतिहास का सबसे घटिया बैंकर कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा.

आप कहेंगे कि ऐसी बोझिल, बकवास फ़िल्म तो सौ दो सौ रुपए में बन जाए. मगर आपका अंदाज़ा ग़लत है. टॉमी ने इसको बनाने में साठ लाख डॉलर या क़रीब 40 करोड़ रुपए ख़र्च कर डाले. जिसके न सीन में वेराइटी है, न सेट में.

फ़िल्म को देखकर यूं लगेगा कि ये किसी दोस्त के अपार्टमेंट में एक हफ़्ते में शूट कर ली गई होगी. मगर, असल में इसको बनाने में छ महीने लगे. इस दौरान, परफ़ेक्शन के लिए, जी हां, परफ़ेक्शन के लिए टॉमी ने कई बार कलाकार बदले.

फ़िल्म की कहानी, पांच सौ पन्नों के एक उपन्यास से ली गई है. टॉमी ने फ़िल्म के साथ साथ इसे डिजिटल वीडियो पर भी शूट किया था. इसके प्रचार में भी करोड़ों रुपए ख़र्च किए गए थे.

इमेज कॉपीरइट Olivia Howitt

मगर, इसको बनाने का क़िस्सा इतना दिलचस्प है कि टॉमी के साथी सेस्टेरो ने इस पर क़िताब लिख डाली. इसी क़िताब के आधार पर अब जेम्स फ्रैंको 'द डिज़ैस्ट आर्टिस्ट' नाम से फ़िल्म बना रहे हैं.

'द रूम' की कामयाबी की तीसरी वजह ख़ुद टॉमी विसाऊ हैं. उन्होंने अपनी असल ज़िंदगी को रहस्य के पर्दे में लपेट के रखा है. अपनी उम्र चालीस के आस-पास बताते हैं, जबकि साफ़ लगता है कि उनकी उम्र ज़्यादा है.

वो कहां पैदा हुए इस बारे में भी सस्पेंस है. वो ख़ुद को कभी यूरोप का तो कभी अमेरिकी बताते हैं. फिर वो अपने मां-बाप को कभी अमरीकी, तो कभी जर्मन या पोलिश बताते हैं.

फ़िल्म बनाने से पहले वो फ़ैशन की दुनिया में काम करते थे, ये उनका दावा है. दुनिया के सबसे अच्छे नाटक कहे जाने वाले 'ए स्ट्रीट कार नेम्ड डिज़ायर', का ज़िक्र भी वो बातों-बातों में कर देते हैं. कुल मिलाकर, फ़िल्म देखने के बाद टॉमी से मिलिए तो एक नंबर के सनकी नज़र आते हैं.

इमेज कॉपीरइट Wisseau Films

टॉमी को अपनी इस बकवास फ़िल्म में कुछ भी ग़लत नहीं लगता. हालांकि वो ये भी कहते हैं कि उन्होंने 'द रूम' को कभी सबसे बकवास फ़िल्म का दर्जा नहीं दिया. जो भी लोग कहते हैं वो उसको खुले दिल से मान लेते हैं.

अपनी महाबकवास फ़िल्म की शानदार कामयाबी से टॉमी को काफ़ी हौसला मिला है. अब वो नई फ़िल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं. तो आप भी तैयार हो जाइए, 'द रूम' जैसी एक और बकवास फ़िल्म झेलने के लिए.

वैसे टॉमी की एक बात तो क़ाबिलेतारीफ़ है. जिस तरह से उन्होंने एक नाकाम फ़िल्म को भी शोहरत की सीढ़ी बना लिया, वो सीखने लायक है.

वो कहते हैं कि इस बात से ज़्यादा ख़ुशी होती अगर 'द रूम' को लोग अच्छी फ़िल्म तौर पर याद रखते. मग़र क़िस्मत को शायद यही मंज़ूर था कि उन्हें बदनामी में ही नाम कमाना था.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार