फ़ेसबुक लाइट वर्जन ने फ़ेसबुक को पछाड़ा

पिछले साल फ़ेसबुक ने फ़ेसबुक लाइट लॉन्च किया था. इसका मकसद था उन स्मार्टफोन तक फ़ेसबुक को पहुंचाना जो 2जी का इस्तेमाल करते हैं.

ऐसा करने का फ़ायदा उसे कुछ ही महीनों में दिखा है. 150 देशों में 50 भाषा बोलने वाले 10 करोड़ लोग अब फ़ेसबुक लाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं.

फ़ेसबुक के आम ऐप में जो फीचर होते हैं उसके मुकाबले लाइट में चुने हुए फीचर ही मिलेंगे. ये ऐप कई सस्ते स्मार्टफोन पर बहुत बढ़िया काम करता है.

लेकिन इससे फ़ायदा ये हुआ है कि कई लोग अब वीडियो फीड भी फ़ेसबुक लाइट पर देख सकते हैं जिसके कारण फ़ेसबुक लाइट अब फ़ेसबुक के रेगुलर ऐप के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहा है.

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फ़ेसबुक लाइट पर आप जो भी तसवीरें देखते हैं उन्हें ज़ूम इन या ज़ूम आउट भी कर सकते हैं.

फ़ेसबुक ने इस बाज़ार की अहमियत को अब समझ लिया है और इसीलिए वीडियो को और आसानी से लोड होने और प्ले होने के तरीके को ढूंढ रहा है.

वो चाहता है कि अगर आप वीडियो पर टैप करें तो वो बैकग्राउंड में लोड होता रहे और आप फ़ेसबुक पर दूसरे पोस्ट की तलाश में लगे रहें.

जब वीडियो लोड हो जाएगा उसके बाद आपकी स्क्रीन पर नोटिफ़िकेशन आ जाएगा और आप वो वीडियो देख सकेंगे.

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भारत में फ़ेसबुक के करीब 15 करोड़ इस्तेमाल करने वाले हैं.

चूंकि बड़े शहरों से अब और नए लोग ज़्यादा संख्या में नहीं मिलेंगे, इसलिए फ़ेसबुक अब ऐसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है जो पहली बार इंटरनेट से जुड़ रहे हैं.

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