दस लाख रुपए दिला सकता है एक पुराना नोट!

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नए, करारे नोट सबको लुभाते हैं. मगर, क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया में पुराने, चलन से बाहर हो चुके या अमान्य नोटों के भी बहुत से शौक़ीन हैं. जिन्हें पुराने, तारीख़ी नोटों को इकट्ठा करने का जुनून होता है.

ऐसे ही एक शख़्स हैं बैंगलोर के रिज़वान रज़ाक. बात 1967 की है. तब रिज़वान बारह बरस के थे. एक दिन उन्हें अपने दादा की लोहे की अलमारी में कुछ अजब तरह के नोट दिखे.

इन नोटों पर ''कैंसेल्ड'' की मुहर लगी थी. पुराने नोटों के इस ढेर में कुछ नोट ऐसे भी थे, जिन पर इंग्लैंड के राजा जॉर्ज षष्ठम की तस्वीर छपी थी.

इन पर भी ठप्पा लगा था, ''पाकिस्तान नोट पेमेंट'' और साथ में ''कैंसेल्ड'' यानी रद्द. बारह बरस के रिज़वान के ज़ेहन में इन नोटों के बारे में और जानकारी जुटाने की सूझी. वो समझ नहीं पा रहे थे कि आख़िर इन नोटों पर रद्द होने की मुहर क्यों लगी थी?

क़रीब आधी सदी पुरानी उस बात को याद करके रिज़वान बताते हैं कि आज़ादी के बाद कुछ सालों तक भारतीय रिज़र्व बैंक ने ही पाकिस्तान के लिए भी नोट छापे थे. क्योंकि बंटवारे के बाद पाकिस्तान के पास नोट छापने का इंतज़ाम नहीं था.

इसके बाद अपने एक चचेरे भाई के घर में भी रिज़वान को अंग्रेज़ों के ज़माने के कुछ नोट मिल गए. इसके बाद तो उन्हें, पुराने, चलन से बाहर हो चुके नोट जमा करने का चस्का लग गया.

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क़रीब दस साल के रिसर्च और मेहनत के बाद आज रिज़वान के पास ऐसे ऐतिहासिक नोटों का अच्छा ख़ासा ज़ख़ीरा जमा हो गया है.

वो पुराने नोटों की इंटरनेशनल सोसाइटी के भारत में अध्यक्ष हैं. उन्होंने भारत में नोटों की छपाई के इतिहास पर एक क़िताब का नया एडिशन भी छापा है.

रिज़वान के कलेक्शन में तीन अक्टूबर 1812 को छपे एक नोट से लेकर भारत में छपने वाले सबसे पहले नोट तक के एक से एक तारीख़ी नमूने हैं.

आज उनके पास सौ डॉलर क़ीमत वाले पुराने नोटों से लेकर पचास हज़ार डॉलर तक की क़ीमत वाले ऐतिहासिक नोट हैं.

वैसे पुराने नोट किसी एक देश की करेंसी के हों, ये ज़रूरी नहीं. ग्लोबलाइज़ेशन के इस दौर में एक देश से दूसरे देश में जाना आसान हो गया है.

ऐसे में पुराने नोट जमा करने वालों के पास कई देशों के पुराने नोट मिल जाते हैं. इन्हें हासिल करना भी आसान है.

तमाम वेबसाइट्स ऐसे ऐतिहासिक करेंसी नोट बेचती हैं. ऐसे नोट, जो सियासी, सुरक्षा, वित्तीय या तकनीकी वजह से छापे जाने बंद कर दिए गए. बाज़ार में उनका कोई मोल नहीं. मगर पुराने नोटों के शौक़ीनों की नज़र में उनका मोल कई गुना ज़्यादा होता है.

ऐसे नोटों की छपाई बंद करने की कई वजहें होती हैं. जैसे नक़ली नोटों की छपाई रोकना, या बड़ी संख्या वाले नोटों की छपाई बंद करना, ग़लत हिज्जे या दस्तख़त का छप जाना.

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पुराने, बहुत कम मिलने वाले नोटों की बा़ज़ार में बहुत मांग है. जैसे अमरीका में एक ऐसे नोट की बहुत मांग है, जिसके एक तरफ़ दस डॉलर तो दूसरी तरफ़ बीस डॉलर ग़लती से छप गया था. ऐसे एक नोट की क़ीमत आज की तारीख़ में बीस हज़ार से लेकर पैंतीस हज़ार डॉलर तक है.

अब जैसे यूरोपीय यूनियन के तमाम देशों ने 2002 में अपनी अलग-अलग करेंसी ख़त्म करके यूरो को अपनाया था, तो उससे पहले के फ्रैंक, जर्मन मार्क जैसी करेंसी की भारी डिमांड है.

एक आइरिश अख़बार के मुताबिक़ आयरलैंड के मशहूर ''प्लोमैन' या ''लेडी लवेरी'' जैसे नोटों की क़ीमत आज पांच हज़ार यूरो या क़रीब पांच हज़ार डॉलर है.

कनाडा के टोरंटो में तो बाक़ायदा ऐसे पुराने नोटों और सिक्कों का मेला लगता है. इसके निदेशक जेर्ड स्टैप्लेटन कहते हैं कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की हालत भले ख़राब हो, मगर पुराने नोटों का ये बाज़ार ख़ूब फल-फूल रहा है.

रिज़वान रज़ाक कहते हैं कि भारत में ऐसे पुराने नोटों की भारी डिमांड है जो कभी यहा पुर्तगालियों ने, फ्रांसीसियों ने या अंग्रेज़ों ने छापे थे.

वो बताते हैं कि 1959 में भारत सरकार ने कुछ ऐसे नोट छापे थे जो सिर्फ़ हज के लिए सऊदी अरब जाने वालों के इस्तेमाल के लिए थे. इन नोटों का रंग भी एकदम अलग था. इस सीरीज़ के सौ रुपए के नोट के आज शौक़ीन लोग तीस हज़ार डॉलर या यही कोई बीस लाख रुपए तक देने को तैयार हैं.

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ब्रिटिश नीलामघर ''बोनहैम्स'' में नोटों के एक्सपर्ट जॉन मिलेनस्टैंड कहते हैं कि सबसे ज़्यादा डिमांड उन पुराने नोटों की है जो ट्रायल के तौर पर छापे गए. जिन्हें बाद में नहीं चलाया गया. वो कहते हैं कि चालीस साल से ज़्यादा पुराने हर नोट की आज डिमांड है.

कई दफ़े बहुत साधारण क़िस्म के नोटों के लोग बड़े शैदाई हो जाते हैं. जैसे पहले विश्व युद्ध के दौरान छापे गए एक पाउंड के कुछ नोट. इन नोटों को उस वक़्त तुर्की में तैनात ब्रिटिश सैनिक इस्तेमाल करते थे. एक पाउंड का ये नोट आज आपको आठ हज़ार पाउंड या क़रीब दस लाख रुपए दिला सकता है.

अजब-ग़ज़ब क़िस्म के नोटों को भी शौक़ीन लोग ख़ूब पसंद करते हैं. जैसे सेशेल्स में छपा पचास रुपए का एक नोट. इसमें ताड़ के एक पेड़ की तस्वीर पर 'सेक्स' लिखा था. इसी वजह से इसकी भारी मांग है.

ऐसे ही कनाडा का दो डॉलर का एक नोट. इस पर ग़लत अधिकारी के दस्तख़त छप गए थे.आज इन्हें शौक़ीन बढ़-चढ़कर ख़रीदते हैं. जबकि ये नोट चलन में ही नहीं आए.

कनाडा का 1954 में छपा एक नोट, 'डेविल्स हेड' के नाम से मशहूर है. इसमें ब्रिटिश महारानी एलिज़ाबेथ के बाल कुछ ऐसे छपे थे कि उसमें से मुस्कुराते हुए शैतान के झांकने का एहसास होता था. नोट तो चलन से बाह हैं. मगर उस वक़्त जो छपे थे, उनमें से एक को नीलामी में क़रीब पचास लाख रुपए में ख़रीदा गया.

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पुराने नोटों के एक्सपर्ट जेर्ड स्टेपलेटन कहते हैं कि आज के नए कड़क नोटों में से कुछ को आप अलग रख देते हैं. तो ये एक तरह से इन्वेस्टमेंट है. आगे जाकर इन नोटों की अच्छी क़ीमत मिलनी तय है.

ब्रिटिश एक्सपर्ट मिलेनस्टैंड कहते हैं कि पुराने बर्तानवी नोटों में उन नोटों की भारी डिमांड है जिसे ब्रिटेन के सूबों के बैंकों ने छापा था. क़रीब दो सौ साल पुराने इन नोटों को आप कोशिश करके सस्ते में हासिल कर सकते हैं.

ब्रिटिश उपनिवेशों के नोटों के शौक़ीनों के लिए भारत जैसे देशों के प्रेसीडेंसी बैंकों के छापे नोटों की भारी मांग है. मसलन, मद्रास प्रेसीडेंसी या बॉम्बे प्रेसीडेंसी के बैंकों के छापे नोट. या महारानी विक्टोरिया, किंग जॉर्ज पंचम या षष्ठम की तस्वीरों वाले नोट.

रिज़वान रज़ाक कहते हैं कि ये नोट बहुत जल्द ही विलुप्त होने वाले हैं. इसलिए जिसे शौक़ है वो अगर इन नोटों को देखे तो कोई भी क़ीमत देकर ख़रीद ले.

वैसे ''बाल्डविन'', ''लिन नाइट करेंसी ऑक्शन्स'', ''नोबल न्यूमिसमैटिक्स'' और 'टोडीवाला ऑक्शन्स' जैसी कई वेबसाइट हैं जो कि बिरले नोट बेचती हैं. इसी तरह, ई-बे, अमेज़न जैसे ऑनलाइन रिटेलर भी पुराने नोट बेचते हैं. पुराने नोटों के कई डीलर भी हैं दुनिया में.

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मगर, रिज़वान कहते हैं कि सबसे अच्छा तरीक़ा, अपने दोस्तों, जानने वालों और उनके भी जानने वालों के बीच शोर मचाना है. इस बात का कि आप तरह तरह के पुराने नोट तलाश रहे हैं. घरों के पुराने संदूकों, अलमारियों, अटारियों में ऐसे बहुत से पुराने नोट मिलते रहते हैं. जिनकी आम लोग क़ीमत नहीं समझते.

मगर शौक़ीनों के लिए ये बेशक़ीमती होते हैं.

पुराने नोटों को सहेजकर रखना ज़रूरी है. अक्सर ये ख़स्ताहाल ही मिलते हैं. कटे-फटे गली हुई हालत में. ऐसे नोटों को सहेजकर रखने के लिए ख़ास प्लास्टिक की फाइल्स आती हैं. लिंडनर या लाइटहाउस नाम की कंपनियां ये करेंसी होल्डर बेचती हैं. तीन से चार हज़ार रुपए में ये करेंसी होल्डर मिल जाते हैं.

पुराने नोटों को दाग़-धब्बों, तेल और कटने-फटने से बचाने की ज़रूरत होती है. बार-बार छूना भी उन्हें नुक़सान पहुंचाता है.

जानकार कहते हैं कि पुराने नोटों से कभी भी खिलवाड़ नहीं करना चाहिए. जैसे फटे हिस्से को नोचकर फेंकना, या मुड़े नोट को प्रेस से सीधा करना. इससे उनकी क्वालिटी पर असर पड़ता है.

जानकार कहते हैं कि वैसे तो पुराने नोट जमा करना एक शगल है. मगर इसके शौक़ीन, अच्छी क़ीमत के लिए भी पुराने नोट जमा करते हैं. ताकि वक़्त आने पर अपने निवेश का फ़ायदा उठाया जा सके.

जेर्ड स्टेपलेटन कहते हैं कि पिछले बीस-पच्चीस सालों में ऐसे निवेश का दस गुना तक फ़ायदा होता देखा जा रहा है.

रिज़वान भी जेर्ड की बात से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं. हालांकि वो कहते हैं कि अपने पुराने नोटों के ज़खीरे की वो कभी बोली नहीं लगाएंगे.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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