कौन है जानवरों की दुनिया में सुपरपावर ?

  • 27 मई 2016
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आपने सुना होगा कि अमरीका आज दुनिया की इकलौती सुपरपावर है. किसी दौर में सोवियत संघ भी सुपरपावर कहा जाता था. चीन आज उभरती महाशक्ति है. भारत के बारे में भी कहा जाता है कि उसमें महाशक्ति बनने की क्षमता है.

मगर, क्या आपने कभी सोचा है कि जानवरों के बीच कौन है जिसे सुपरपावर कहा जा सकता है? अगर आप ये अंदाज़ा लगा रहे हैं कि शेर, बाघ या चीता, जंगल की दुनिया के सुपरपावर हैं तो आपका अंदाज़ा बिल्कुल ग़लत है.

जानवरों की दुनिया के सुपरपावर हैं, सांप. जो सबसे ख़तरनाक, शातिर शिकारी होते हैं.

अमरीका के कैलिफ़ोर्निया के जंगलों में मिलने वाला वेस्टर्न डायमंडबैक रैटलस्नेक, दुनिया का सबसे सब्र वाला शिकारी है. ये अकेले, छुपकर रहते हैं. बड़े इत्मीनान से अपने शिकार का इंतज़ार करते हैं. कई बार ये इंतज़ार दो बरस लंबा तक हो सकता है.

यानी ये सांप दो साल तक बिना कुछ खाए रह लेते हैं. लेकिन जैसे ही मौक़ा आता है, ये सांप बहुत भयानक तरीक़े से अपने शिकार पर हमला करते हैं.

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इनका शिकार पकड़ने में कामयाब होना क़रीब-क़रीब तय होता है. इनका सबसे ख़तरनाक हथियार इनकी ताक़त नहीं, रफ़्तार होती है.

इस साल मार्च में छपे एक रिसर्च के मुताबिक़, अपने शिकार पर सांप का हमला महज़ 44 से 70 मिलीसेकेंड में ख़त्म हो जाता है. वो कितना कम वक़्त लेते हैं, इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि हमें अपनी आंखें झपकाने में भी 200 मिलीसेकेंड लगते हैं. इतने में कोई सांप चार बार अपने शिकार पर हमला कर चुकेगा.

ये रफ़्तार हमारी कल्पना से भी परे है. हम जिस तेज़ी से अपना कोई भी अंग हिला-डुला सकते हैं, उससे कई गुना तेज़ रफ़्तार से सांप शिकार पर हमला बोलते हैं. अगर हम सांप जैसी फ़ुर्ती दिखाएं तो हम गश खाकर गिर पड़ेंगे. हमारा दिमाग़ उतनी रफ़्तार का झटका ही नहीं बर्दाश्त कर सकता.

अमरीका की लूसियाना यूनिवर्सिटी के डेविड पेनिंग ने सांपों के बारे में काफ़ी रिसर्च की है. वो कहते हैं कि सांपों के हमले में शिकार का बचना क़रीब-क़रीब नामुमकिन है. पेनिंग ने महीनों तक, अमरीकी रैटलस्नेक के शिकार करने के तरीक़े पर नज़र रखी है. इसके अलावा भी पेनिंग ने कई ज़हरीले और बिना विषहीन सांपों के बारे में रिसर्च की है. वो कहते हैं कि सांप जितनी देर में शिकार पर हमला करता है, उतनी देर में तो शिकार को भनक तक नहीं लगती कि उस पर हमला हुआ है.

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दुनिया में सांपों की क़रीब साढ़े तीन हज़ार नस्लें पायी जाती हैं. इनमें छोटे से वाइपर्स से लेकर बड़े-बड़े अजगर तक शामिल हैं. मगर इनके बारे में ज़्यादा पड़ताल नहीं की गई है. लेकिन, जिन पर भी रिसर्च किया गया है, उन सभी में ग़ज़ब की रफ़्तार देखी गई है.

सांपों की सबसे बड़ी ख़ूबी ये है कि उनके शरीर में ढेरों मांसपेशियां होती हैं. एक इंसान के बदन में औसतन 700 से 800 मांसपेशियां होती हैं. वहीं छोटे से छोटे सांप के भी दस से पंद्रह हज़ार मांसपेशियां होती हैं.

हमें अभी ये नहीं मालूम कि सांप फुर्ती से हमला करने के लिए इन मांसपेशियों का किस तरह से फ़ायदा उठाते हैं. कुछ लोग मानते हैं कि सांपों की सभी मांसपेशियां एक दूसरे से जुड़ी होती हैं. इसीलिए जब वो हमला करता है तो वो एकसाथ एक रबर बैंड की तरह तनकर फुर्ती से हमला करने की ताक़त देती हैं.

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सांपों की फुर्ती को लेकर एक बात जो समझ से परे है वो ये कि जिस रफ़्तार से वो शिकार पर झपटते हैं, उसका असर ख़ुद उन पर भी पड़ता है. आख़िर वो कैसे इस झटके को बर्दाश्त करते हैं? क्योंकि उनकी जो रफ़्तार होती है, उस रफ़्तार में दौड़ने पर किसी दूसरे जानवर की जान जानी तय है.

अमरीकी वैज्ञानिक डेविड पेनिंग कहते हैं कि सांप 30G तक की ताक़त से अपने शिकार पर झपटते हैं. मतलब ये कि जितनी ताक़त से धरती हमें अपनी तरफ़ खींचती है उससे तीस गुनी ताक़त से सांप अपने शिकार पर झपटते हैं.

उनके मुक़ाबले 8G की रफ़्तार में ही लड़ाकू विमानों के पायलटों के पैर सुन्न होने लग जाते हैं, जब वो हवा में तेज़ी से गोते लगाते हैं. अगर यही रफ़्तार 10G तक पहुंच गई तो उनके बेहोश होने का डर रहता है. वहीं सांप उससे भी तीन गुनी ताक़त से हमला करते हैं.

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वैसे कुछ गिरगिट और सैलेमैंडर, अपनी जीभ से और भी तेज़ी से झपट्टा मारकर शिकार पकड़ते हैं. लेकिन, उनमें और सांपों में फ़र्क़ ये होता है कि गिरगिटों और सैलेमैंडर के दिमाग़ नहीं सिर्फ़ जीभ स्पीड में होते हैं. वहीं सांप जब हमला करता है तो उसका दिमाग़ भी पूरे बदन के साथ ही रफ़्तार में होता है.

दिमाग़ बहुत नाज़ुक अंग है. आम तौर पर किसी और जीव का दिमाग़ इतनी तेज़ रफ़्तार या झटका नहीं बर्दाश्त कर सकता. जब फाइटर पायलट तेज़ रफ़्तार से हवा में उड़ते हैं तो उनके बदन में ख़ून की दौड़ान उनके पैरों की तरफ़ हो जाती है अगर ये ख़ून लौटकर दिमाग़ को सप्लाई नहीं होता, तो उनके बेहोश होने का डर रहता है. दिमाग़ को चोट पहुंच सकती है.

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लेकिन सांप, फुर्ती से हमला करते वक़्त, अपने दिमाग़ को लगने वाले झटके भी झेल जाते हैं. वैज्ञानिक कहते हैं कि ऐसा उनकी खोपड़ी की बनावट की वजह से होता है. उनकी खोपड़ी में कई जोड़ होते हैं. जो रफ़्तार से हमले के वक़्त झटके बर्दाश्त कर लेती है और उनके दिमाग़ को नुक़सान नहीं होने देती.

अब वैज्ञानिक ये समझने में लगे हैं कि कैसे सांप की हड्डियां और उसका नर्वस सिस्टम, इतनी तेज़ रफ़्तार के झटके झेलते हैं. उसे समझकर इंसानों को भी ऐसे झटकों की सूरत में बचाने के उपाय तलाशने की कोशिश की जा रही है.

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कुछ लोग तो इस जानकारी की मदद से ऐसी गाड़ियां बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो बहुत तेज़ रफ़्तार में होने वाले हादसों के झटके सह सकें और इंसानों को नुक़सान होने से बचा सकें.

डेविड पेनिंग कहते हैं कि अभी वो ये समझ रहे हैं कि शिकार से टकराने पर सांप को जो झटका लगता है वो उससे कैसे निपटता है. कई बार ये भी होता है कि फुर्ती से हमला करने वाले सांप को पीछे भी हटना पड़ता है. इन हालात से वो कैसे निपटता है? ये समझने की कोशिश भी की जा रही है. ताकि इसे इंसान के फ़ायदे के लिए इस्तेमाल किया जा सके.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.)

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