फ़्रीडम 251 फ़ोन से जुड़े 4 बड़े सवाल

  • 9 जुलाई 2016
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फ़्रीडम 251 दुनिया का सबसे सस्ता स्मार्ट फ़ोन बताया जा रहा है जिसकी क़ीमत महज 251 रुपए है.

कंपनी रिंगिंग बेल्स का कहना है कि फ़ोन की डिलीवरी आठ जुलाई से शुरू हो गई है.

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहित गोयल कहते हैं कि पहले सेट की डिलीवरी लकी ड्रॉ के आधार पर होगी. अभी दो लाख हैंडसेट भेजे जाने हैं.

कंपनी की वेबसाइट पर सात करोड़ लोगों ने पंजीकरण कराया था, इस लिहाज से ये बहुत मामूली संख्या प्रतीत होती है.

हालांकि फ़ोन के लॉन्च को लेकर कई विवाद हुए थे. आइए जानते हैं इससे जुड़े 4 प्रमुख विवाद.

1- कितना सस्ता

टेलीकॉम उद्योग के अधिकांश विशेषज्ञों का कहना है कि हूबहू ऐसा फ़ोन बनाने में क़रीब 3,000 रुपए की लागत आएगी.

लेकिन रिंगिंग बेल्स के मोहित गोयल कहते हैं, "फ़्रीडम 251 के निर्माण की क़ीमत 1,250 से 1,400 रुपए के बीच है और हम इसे 251 रुपए में बेच रहे हैं."

कंपनी का दावा है कि उसकी योजना रचनात्मक ई कॉमर्स, प्री लोडेड ऐप्स और विज्ञापन के ज़रिए लागत निकालने की है.

मोहित गोयल के अनुसार एक स्मार्टफ़ोन पर फिर भी 150 रुपए का घाटा होगा और वो इस उम्मीद में हैं कि सरकार सब्सिडी देने का क़दम उठाएगी.

इसीलिए सरकार से 50,000 करोड़ रुपए की उम्मीद के साथ उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की इच्छा जताई है.

अधिकांश लोग सवाल कर रहे हैं कि एक प्राइवेट कंपनी की मदद के लिए सरकार क्यों रकम देगी.

मोहित गोयल कहते हैं, "ये ज़रूरी नहीं कि हमें वित्तीय मदद मिले. और भी तरीक़े हैं जिनसे सरकार हमारी मदद कर सकती है. हम भारत से भागेंगे नहीं. हमने अपने ग्राहकों से कोई पैसे नहीं लिए और हम देश में फ़्रीडम 251 के 7.5 करोड़ हैंडसेट देने का वादा पूरा करेंगे."

2- कहीं घोटाला तो नहीं?

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कंपनी ने इस फ़ोन की घोषणा बीते फ़रवरी में की थी. लेकिन जो हैंडसेट पत्रकारों को दिए गए वो चीन में बने थे.

इसके लिखे ब्रैंड नेम ऐडकॉम को सामने सफ़ेद पेंट से और पीछे एक स्टिकर से ढ़ंक दिया गया था.

यह जानकार लोगों में गुस्सा भड़का और लोगों ने कंपनी के मुख्यालय पर प्रदर्शन भी किया.

इसके अलावा पुलिस, कर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने कंपनी से पूछताछ की थी.

कांग्रेसी सांसद प्रमोद तिवारी ने इसे 'शताब्दी का सबसे बड़ा घोटाला' तक कहा था.

वहीं बीजेपी सांसद किरीट सोमैया ने तत्कालीन सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद को चिट्ठी लिखकर कंपनी की अनियमितताओं के बारे में सवाल भी खड़े किए थे.

यहां तक कि कंपनी की जांच कराए जाने को लेकर उन्होंने दूरसंचार मंत्रालय, सेबी और आरबीआई से भी संपर्क किया था.

उन्होंने इसे फ़र्जी कंपनी घोटाला कहा था, हालांकि कंपनी ने फर्जीवाड़े से इनकार किया था.

3-क्या यह मेड इन इंडिया है?

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इस फ़ोन के अधिकांश पुर्जे चीन से आयातित हैं और इन्हें भारत में असेम्बल किया जाना है. तो यह कैसे 'मेक इन इंडिया' प्रोडक्ट हुआ?

लेकिन गोयल का कहना है कि यह एक मेड इन इंडिया हैंडसेट है. उनके अनुसार, भारत की कंपनियां फ़ोन के 60 प्रतिशत कलपुर्जे बना सकती हैं और रिंगिंग बेल्स की योजना एक मैन्युफ़ैक्चरिंग प्लांट लगाने की है.

जब फ़रवरी में इसकी लॉंचिंग हुई, उस समय कही अपनी बात से डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्री पॉलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) के सेक्रेटरी अमिताभ कांत ने अब किनारा कर लिया है. तब उन्होंने कहा था, "यह कोई सरकारी प्रोजेक्ट नहीं है. मेक इन इंडिया टीम का इससे कोई लेना देना नहीं."

4-फ़ैक्ट्री अभी बननी है, तो फ़ोन कहां बन रहे हैं?

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रिंगिंग बेल्स के मोहित गोयल का कहना है कि उनकी कंपनी ताइवान से कलपुर्जे आयात कर रही है और इन्हें हरिद्वार में असेम्बल किया जा रहा है.

उनका कहना है कि कंपनी धनराशि जुटा ले तो फिर सभी कलपुर्जे भारत में ही बनाना चाहेगी.

भारत दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ता बाज़ार है. इसलिए इसमें कोई ताज्जुब नहीं कि मोबाइल निर्माता भारत की ओर आकर्षित होते हैं.

पिछले साल भारत में 100 से अधिक मोबाइल हैंडसेट की लॉंचिंग हुई, जिनमें अधिकांश स्मार्टफ़ोन हैं और सस्ते इतने कि सबसे कम क़ीमत 3,500 रुपये तक है.

लगभग हर हफ़्ते एक नए लॉंच के साथ भारतीय ग्राहकों के सामने स्मार्टफोन के इतने विकल्प हैं कि चुनना मुश्किल है.

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