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शुक्रवार, 10 जून, 2005 को 13:19 GMT तक के समाचार
 
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दवा से हो सकता है दर्द ए दिल
 
दवा
दवाओं के दूसरे तरह के प्रभाव होने के बात पहले भी होती रही है
वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि दर्द दूर करने वाली कुछ ख़ास तरह की गोलियाँ दिल के दौरे का कारण बन सकती हैं.

प्रोफ़ेसर जूलिया हिप्पीस्ले कॉक्स और कैरोल कॉपलैंड का यह शोध ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

इस शोध के प्रकाशन के बाद गठिया जैसी तकलीफों से परेशान लाखों लोगों के सामने यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि वे दर्दनाशक गोलियाँ का इस्तेमाल करें या न करें.

इन्हें वैज्ञानिक शब्दावली में नॉन स्टेरॉयडियल एंटी इन्फ्लेमेट्रीज़ कहा जाता है, यानी बिना स्टेरॉयड वाली दर्दनाशक दवाएँ. इस श्रेणी की सबसे आम दवाएँ हैं आईबू-ब्रुफेन और नेपरोक्सेन.

पिछले वर्ष भी कुछ दर्द दूर करने वाली दवाओं को लेकर वैज्ञानिकों ने अपनी आशंकाएँ ज़ाहिर की थीं जिसके बाद 'विऑक्स' नाम की एक दवा की बिक्री बंद कर दी गई थी.

शोध करने वालों का कहना है कि उनके निष्कर्षों को पूरी तरह से सही साबित करने के लिए ज़रूरी है कि इन दवाओं का प्रयोगशाला में गहन परीक्षण कराया जाए.

शोध

वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन में रहने वाले उन लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया है जिन्हें पिछले चार वर्षों में पहली बार दिल का दौरा पड़ा था.

इसके बाद वैज्ञानिकों ने यह देखा कि इनमें से कितने लोग, किन-किन दर्दनाशक दवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे.

वैज्ञानिकों ने आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि नॉन स्टेरॉयडियल एंटी इन्फ्लेमेट्रीज़ का इस्तेमाल पहली बार दिल के दौरे के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है.

इन शोधकर्ताओं का कहना है कि आंकड़ों पर ग़ौर करने से इतना तो पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि ये दर्दनाशक दवाएँ कितनी सुरक्षित हैं इसे लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं.

इस शोध के परिणामों के निर्णायक होने का दावा तो शोधकर्ता भी नहीं कर रहे हैं, उनका भी यही कहना है कि दवाओं का 'क्लिनिकल टेस्ट' यानी प्रयोगशाला में गहन परीक्षण होना चाहिए.

प्रमुख शोधकर्ता प्रोफ़ेसर कॉक्स ने ख़ुद स्वीकार किया है कि उन्हें जो आँकड़े मिले थे वे पर्याप्त नहीं थे, साथ ही कई जानकारियाँ स्पष्ट नहीं थी जिनकी वजह से थोड़े-बहुत भ्रम की गुंजाइश हो सकती है.

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के प्रोफ़ेसर पीटर हेज़बर्ग कहते हैं कि सिर्फ़ इस शोध के आधार पर इलाज की प्रक्रिया में बदलाव करना दुरूस्त नहीं होगा.

ब्रिटेन में गठिया पर शोध करने वाले संगठन ने भी कहा है कि मरीज़ घबराएँ नहीं, जब तक ठोस परिणाम नहीं आ जाते तब तक वे हमेशा की तरह दर्द की दवा लेते रहें.

यह काफ़ी बड़ा सवाल बन गया है और ज़ाहिर है कि शोध के पूरे निष्कर्ष सामने आने में समय लग सकता है. ब्रिटेन में दवाओं के बारे में नीति तय करने वाली संस्था का कहना है कि अभी इन दवाओं की बिक्री रोकने या लोगों को इनके सेवन से मना करने की नौबत नहीं आई है.

लेकिन इस संस्था ने दो अहम बातें कही हैं, एक तो ये कि इन दवाओं का कम से कम सेवन किया जाए और दूसरे जिन लोगों को दिल की बीमारी के बारे में पता हो वे इनसे बचकर रहें.

शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने आँकड़ों के आधार पर लोगों को आगाह कर दिया है, अब आगे के शोध पर ही निर्भर करेगा कि ब्रुफेन जैसी दवाओं को हृदय रोगों की दृष्टि से कितना सुरक्षित माना जाएगा.

 
 
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