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गुरुवार, 29 सितंबर, 2005 को 13:16 GMT तक के समाचार
 
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चाभी वाला लैपटॉप सिर्फ़ 100 डॉलर में
 
बिजली की ज़रूरत नहीं है इसे चलाने के लिए
अमरीका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी (एमआईटी) ने 100 डॉलर क़ीमत वाले लैपटॉप को बाज़ार में उतारने की घोषणा की है.

एमआईटी के मीडिया लैब ने इसका डिज़ाइन तैयार कर लिया है और एमआईटी का कहना है कि सिर्फ़ कीमत ही नहीं, यह कई मामलों में आम लैपटॉप से अलग है.

मीडिया लैब का कहना है कि यह फ़ोल्ड हो सकता है, मज़बूत है और जहाँ बिजली न हो वहाँ हाथ से चाभी भरकर चलाया जा सकता है.

इस लैपटॉप का मक़सद मुनाफ़ा कमाना नहीं है बल्कि यह 'वन लैपटॉप पर चाइल्ड' योजना के तहत बनाया जा रहा है, मीडिया लैब का कहना है कि एक वर्ष के अंदर डेढ़ करोड़ लैपटॉप तैयार किए जाएँगे.

इस योजना के प्रमुख प्रोफ़ेसर निकोलस नेग्रोपोंटे ने बताया कि यह लैपटॉप ब्राज़ील, चीन, मिस्र, थाइलैंड और दक्षिण अफ्रीका के बच्चों को सबसे पहले मिलेगा.

मैसाच्युसेट्स प्रांत के गवर्नर ने घोषणा की है कि वे सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए पांच लाख लैपटॉप ख़रीदेंगे.

कंबोडिया की यात्रा के दौरान कुछ छोटे बच्चों को लैपटॉप का इस्तेमाल करते हुए देखकर प्रोफ़ेसर नेग्रोपोंटे को इसकी प्रेरणा मिली, वे कहते हैं कि वर्ष 2007 तक हर वर्ष एक से डेढ़ करोड़ लैपटॉप बनाए जाएँगे.

मज़बूती

लैपटॉप का कवर रबर का है जो काफ़ी लचीला और मज़बूत होगा, इसमें लिनक्स का ऑपरेटिंग सिस्टम होगा और यह हार्ड ड्राइव के बदले फ्लैश मेमरी के ज़रिए काम करेगा जिसमें टूट-फूट की संभावना कम होगी.

 दुनिया के हर बच्चे के पास एक लैपटॉप होना चाहिए ताकि वह शिक्षा और संचार की अपनी ज़रूरत पूरी कर सके. हम जानते हैं कि कई देशों में बिजली की समस्या है इसलिए चाभी का इंतज़ाम किया गया
 
प्रोफ़ेसर निकोलस नेग्रोपोंटे

इस लैटपॉट में चार यूएसबी पोर्ट होंगे और यह वायरलेस इंटरनेट टेक्नॉलॉजी पर काम करेगा, इसे मोबाइल फ़ोन के ज़रिए भी चलाया जा सकेगा.

इस योजना को कोई बड़ी कंपनियों का समर्थन हासिल है जिनमें गूगल भी शामिल है.

प्रोफ़ेसर नेग्रोपोंटे कहते हैं कि "दुनिया के हर बच्चे के पास एक लैपटॉप होना चाहिए ताकि वह शिक्षा और संचार की अपनी ज़रूरत पूरी कर सके. हम जानते हैं कि कई देशों में बिजली की समस्या है इसलिए चाभी का इंतज़ाम किया गया."

प्रोफ़ेसर नेग्रोपोंटे कहते हैं कि वे इस बात से वाकिफ़ हैं कि 100 डॉलर भी बहुत सारे लोगों के लिए बड़ी रक़म है, भविष्य में इसकी क़ीमत और कम करने के प्रयास किए जाएँगे.

 
 
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