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शुक्रवार, 15 सितंबर, 2006 को 23:24 GMT तक के समाचार
 
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मलेरिया से लड़ने के लिए फिर से डीडीटी
 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपने तीस साल पुराने निर्णय को पलटते हुए मलेरिया से निपटने के लिए डीडीटी के फिर से इस्तेमाल की घोषणा की है.

मच्छर

इस रसायन का छिड़काव घरों के भीतर मच्छरों को मारने के लिए किया जाता है.

पर्यावरण को होने वाले नुक़सान और मानव स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए डीडीटी के उपयोग पर पूरी दुनिया में प्रतिबंध लगा दिया गया था. इसका उपयोग सिर्फ़ बीमारियों से लड़ने के लिए किया जा सकता था.

लेकिन अब डब्ल्यूएचओ का कहना है कि डीडीटी से स्वास्थ्य को कोई ख़तरा नहीं है और मलेरिया से निपटने के लिए इसका उपयोग मच्छरदानी और दूसरी दवाओं की तरह ही किया जाना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि मलेरिया से हर साल कोई दस लाख लोग मारे जाते हैं.

रोक

वैज्ञानिक शोधों से पता चलता है कि घर के भीतर डीडीटी के छिड़काव से जितनी तेज़ी से मच्छर मरते हैं उतनी तेज़ी से किसी और दवा से नहीं मरते.

डीडीटी
माना गया था कि डीडीटी वन्यजीवों के लिए घातक है

डीडीटी पहली आधुनिक कीटनाशक दवा थी.

इसका उपयोग 1940 के दशक से मच्छर मारने और मच्छरजनित रोगों से लड़ने के लिए किया जाता रहा है.

लेकिन पर्यावरण आंदोलन में तेज़ी आने के बाद इसका उपयोग घटता गया.

1962 में राचेल कार्सन ने अपनी किताब 'साइलेंट स्पिंग' में लिखा कि इस कीटनाशक के कारण अमरीका में जंगली जीवों की संख्या घटी है और इससे भोजन चक्र पर प्रभाव पड़ा है.

इसके बाद अमरीका और अन्य देशों में डीडीटी का उपयोग खेती बाड़ी में भी करने पर रोक लगा दी गई.

हालांकि अफ़्रीका के कुछ देशों में इसका उपयोग जारी रहा.

राय बदली

मलेरिया से निपटने के लिए काम करने वाली कई एजेंसियों ने तो नियम बना रखा था कि वे उस कार्यक्रम को आर्थिक सहायता नहीं देंगे जिसमें डीडीटी का उपयोग किया जाता हो. लेकिन अब राय बदल गई है.

मच्छर

अब वैज्ञानिकों का कहना है कि डीडीटी मानव शरीर के लिए नुक़सानदेह नहीं है और इससे कैंसर होने का कोई ख़तरा नहीं है, जैसा कि पहले कहा गया था.

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यदि डीडीटी का सही ढंग से उपयोग किया जाए तो इससे कोई ख़तरा नहीं होता.

डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने घोषणा की है कि अब मच्छर मारने के लिए घरों के भीतर डीडीटी के छिड़काव को अब बढ़ावा दिया जाएगा.

उनका कहना है कि इस बात के वैज्ञानिक सबूत हैं कि मलेरिया के मामले घटाने के लिए डीडीटी से ज़्यादा प्रभावशाली कोई दवा नहीं है.

 
 
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