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सोमवार, 25 दिसंबर, 2006 को 12:29 GMT तक के समाचार
 
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शराब की लत छुड़ा सकता है रसायन
 
शराब
शराब के आदी लोगों की लत अब छूट सकती है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि शराब के आदी के लोगों की चाहत को हमेशा के लिए ख़त्म किया जा सकता है.

मेलबोर्न के हावर्ड फ़्लोरे संस्थान की एक टीम ने दिमाग के ऑरेक्सिन सिस्टम की गतिविधियों को रोकने का समाधान ढूँढ लिया है.

टीम के सदस्यों का कहना है कि उनकी इस खोज से ऐसी दवाएँ बनाई जा सकती हैं जो ऑरेक्सिन अवरोधक की तरह काम करें.

शोध टीम के प्रमुख डॉ एंड्र्यू लॉरेंस ने बताया," शराब पीने से ऑरेक्सिन कोशिकाएँ पूरे शरीर को भारी उत्साह से भर देती हैं. इसलिए यदि कोई ऐसी दवा बनाई जा सके जो आदमी के ऑरेक्सिन सिस्टम को बंद कर दे तो हम लोगों की शराब के प्रति लालसा को ख़त्म सकते हैं."

ऑरेक्सिन कोशिकाएँ दिमाग़ के जिस हिस्से में होती हैं उसे हाइपोथेलेमस कहते हैं.

 इस प्राथमिक स्तर के शोध के परिणाम बहुत दिलचस्प हैं लेकिन अभी और अधिक शोध की ज़रूरत है क्योंकि इस दवा का असर मानव दिमाग़ पर पड़ता है
 
बॉब पैटन, स्वास्थ्य मनोवैज्ञानिक

ऑरेक्सिन बनाने वाली कोशिकाएँ हमारी खाद्य प्रक्रिया को भी प्रभावित करती हैं इसलिए खाने में होने वाली गड़बड़ियों को नियमित करने में भी ये दवाएँ बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.

पिछले कई वर्षों में ब्रिटेन में अल्कोहल से होने वाली मौतों में काफ़ी बढ़ोत्तरी हुई है. 2001 में 4144 की तुलना में 2005 में शराब की वज़ह से 8385 मौतें हुईं.

पिछले एक दशक में अल्कोहल से होने वाली लिवर की बीमारियों में तो दोगुने की बढ़ोत्तरी हुई है और 2004-05 में ये मरीज़ों की संख्या बढ़कर 35400 हो गई.

प्रयोग

शराब पीने और मादक दवाएँ खाने पर एक रसायन की वजह से व्यक्ति बहुत उत्साहित हो जाता है.

वैज्ञानिकों ने एक ऐसा यौगिक बनाया जो ऑरेक्सिन कोशिकाओं के उत्साहित होने वाले प्रभाव को बंद कर देता है.

एक प्रयोग में कुछ चूहों के शरीर में अल्कोहल डाला गया और साथ ही उनको अल्कोहल सरलता से उपलब्ध करा दिया गया.

शरीर में ऑरेक्सिन अवरोधक जाने के बाद चूहों ने शराब मौजूद होने के बावज़ूद शराब पीना बंद कर दिया.

ब्रिटेन के नेशनल एडिक्शन सेंटर में स्वास्थ्य मनोवैज्ञानिक बॉब पैटन ने कहा," इस प्राथमिक स्तर के शोध के परिणाम बहुत दिलचस्प हैं लेकिन अभी और अधिक शोध की ज़रूरत है क्योंकि इस दवा का असर मानव दिमाग़ पर पड़ता है."

अब वैज्ञानिक इस विषय पर काम कर रहे हैं कि ऑरेक्सिन सिस्टम सक्रिय कैसे होता है.

 
 
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