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बुधवार, 11 जुलाई, 2007 को 21:30 GMT तक के समाचार
 
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सौरमंडल के बाहर 'पानी वाला ग्रह'
 
कल्पना से बनाया गया एक चित्र
इस ग्रह पर तापमान बहुत अधिक है इसलिए वहाँ जीवन होने की संभावना नहीं है
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक दल का दावा है कि उन्हें हमारे सौरमंडल के बाहर एक ग्रह में पानी होने का पहला पुख़्ता सबूत मिला है.

इस दल का कहना है कि यह ग्रह हमारे सौरमंडल के वृहस्पति ग्रह से भी बड़ा है और पृथ्वी से 64 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है.

उनका कहना है कि इस ग्रह की सतह पर भाप या वाष्प होने के पुख़्ता सबूत मिले हैं.

ऐसे समय में जब वैज्ञानिकों को हमारे अपने सौरमंडल के दूसरे ग्रहों में और चंद्रमाओं में पानी के पुख़्ता सबूत ढूँढ़ने में वर्षों लग गए, 64 प्रकाश वर्ष दूर किसी ग्रह में पानी के पुख़्ता सबूत मिलने की बात से कई लोगों को आश्चर्य हो रहा है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह नया ग्रह न सिर्फ़ वृहस्पति से बड़ा है, बल्कि इसका तापमान दो हज़ार डिग्री से भी ज़्यादा है.

लेकिन जब सर्वश्रेष्ठ टेलीस्कोपों से भी भाप और पानी को देखना मुश्किल होता है तब इतनी दूर के ग्रह में उसकी खोज किस तरह हुई, इस सवाल पर वैज्ञानिक कहते हैं कि यह भाग्य की बात है.

चमक घटने से दिखा पानी

इस ग्रह को 'एचडी189733बी' नाम दिया गया है.

मंगल की सतह
वैज्ञानिकों को मंगल की सतह पर बर्फ़ के सबूत मिले हैं

वैज्ञानिकों का कहना है कि संयोगवश जब यह ग्रह अपने पड़ोस के ग्रह के पास से गुज़र रहा था तो उसकी परछाईं से इस ग्रह की चमक कम हुई और उसी समय यह देखना संभव हुआ कि ग्रह में क्या-कुछ है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि जब इस ग्रह से निकलने वाली प्रकाश किरणों और उसके परावर्तन और ग्रह के वातावरण का अध्ययन किया जा रहा था तभी पता चला कि जो कुछ दिखाई दे रहा है वह निश्चित तौर पर पानी की भाप है.

इस ग्रह की खोज के एक बड़ा हिस्से का काम प्रोफ़ेसर जोनाथन टेनिसन ने किया है, जो ब्रितानी कवि अल्फ़्रेड लॉर्ड टेनिसन के पड़पोते हैं.

जोनाथन टेनिसन कहते हैं, "बात सिर्फ़ यह नहीं है कि पानी मिला है, बल्कि पहली बार हमारे सौरमंडल के बाहर किसी ग्रह में पानी मिला है."

पानी और भाप पहचाने जाने की तकनीक के बारे में उन्होंने कहा कि इसी तकनीक के उपयोग से दूसरे ग्रहों में पानी की उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है.

वे कहते हैं कि मान लो किसी ग्रह से ऑक्सीजन में मिथेन गैस का पता चलता है तो इसका मतलब यह हुआ कि ये गैसें सब्ज़ियों के सड़ जाने से पैदा हो रही हैं.

और इसका मतलब यह है कि पृथ्वी से बाहर भी किसी ग्रह के जीवन के लक्षण मिल सकते हैं.

 
 
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