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शनिवार, 27 अक्तूबर, 2007 को 18:08 GMT तक के समाचार

'भांग दर्द बढ़ा भी सकती है'

अमरीका में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि यदि कोई दर्द भगाने के लिए भांग पीता है तो हो सकता है कि उसका दर्द घटने की जगह बढ़ जाए. अमरीका के कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ऐसा पाया है.

भांग का इस्तेमाल लंबे समय से लोग दर्द निवारक के रूप में करते रहे हैं. कई देशों में इसे दवा के रूप में भी उपलब्ध कराया जाता है.

'एनस्थेज़ियोलॉजी' पत्रिका में छपे एक अध्ययन के अनुसार दर्द भगाने में भांग की ली जाने वाली मात्रा महत्वपूर्ण है.

भांग का असर

कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार 15 लोगों को दी गई भांग की संतुलित मात्रा का उनके दर्द पर बेहतरीन प्रभाव पड़ा. लेकिन इसकी अधिक मात्रा से उनका दर्द बढ़ गया.

शोधकर्ताओं ने 15 स्वस्थ स्वयंसेवकों को एक टीका लगाकर उनमें दर्द पैदा किया. इन लोगों की त्वचा के नीचे लाल मिर्च में पाया जाने वाला एक रसायन छोड़ा गया.

शोधकर्ताओं ने बाद में उन्हें भांग युक्त घूम्रपान करने को कहा. भांग की ख़ुराक की ताकत उसमें पाए जाने वाले टेट्राहाइड्रो कैनेबिनोल से निर्धारित होती है, जो भांग का एक प्रमुख तत्व है.

भांग पीने के पांच मिनट के बाद, पीने वालों के दर्द में कोई कमी नहीं हुई.

लेकिन 45 मिनट बाद संतुलित मात्रा में भांग पीने वालों ने कहा कि उनका दर्द पहले से कम हुआ है. वहीं अधिक भांग पीने वालों ने कहा कि उनका दर्द पहले से बढ़ गया है.

विशेषज्ञों की राय

इस अध्ययन के प्रमुख डाक्टर मार्क वॉलेस ने कहा कि इस अध्ययन के निष्कर्ष भांग के औषधीय और नशीले दोनों गुणों की ओर इशारा करते हैं.

वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भांग का जैसा प्रभाव स्वस्थ लोगों पर पड़ा, उसका वैसा ही प्रभाव कैंसर पीड़ित लोगों पर नहीं पड़ता.

'मल्टिपल सीरोसिस (एमएस) सोसाइटी' की डॉक्टर लौरा बेल कहती हैं, "एमएस से ग्रस्त बहुत से लोगों में भांग के सेवन से दर्द घटने के प्रमाण मिले हैं. लेकिन फ़िलहाल भांग के दर्द पर पड़े प्रभाव पर अध्ययन अभी बहुत कम हैं, जिनके आधार पर किसी नतीज़े पर पहुँचना मुश्किल है."

उन्होंने कहा, "हम यह जानने को उत्सुक हैं कि जब बड़े पैमाने पर ऐसा अध्ययन होता है तो क्या नतीज़े निकलते हैं?"