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शनिवार, 01 मार्च, 2008 को 17:39 GMT तक के समाचार
 
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तेज़ खर्राटे बढ़ाते हैं हार्टअटैक का ख़तरा
 
ख्रर्राटे भरता एक व्यक्ति
तेज़ खर्राटे भरने की समस्या महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक पाई जाती है
अगर आप तेज़ खर्राटे भरते हैं तो अब जरा सावधान हो जाएँ. हंगरी में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि खर्राटों और दिल की बीमारियों में गहरा संबंध है.

हंगरी के वैज्ञानिकों ने 12 हज़ार से अधिक रोगियों का साक्षात्कार लेने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि सामान्य लोगों की तुलना में ज़ोरदार खर्राटे लेने वालों को दिल का दौरा पड़ने की संभावना अधिक होती है.

यह निष्कर्ष 'जर्नल स्लीप' में प्रकाशित हुए हैं.

इस अध्ययन के बाद पहले से मौजूद उन सिद्धांतों को मज़बूती मिली है, जिनमें कहा जाता रहा है कि खर्राटों और हृदय रोगों में संबंध होता है.

खर्राटों से ख़तरा

हम जानते हैं कि हर व्यक्ति अपने जीवन की किसी न किसी अवस्था में खर्राटे अवश्य लेता है.

यह समस्या सामान्यत: मोटे लोगों में अधिक पाई जाती है. अनुमान है कि 40 फ़ीसदी पुरुष और 24 फ़ीसदी महिलाएँ खर्राटे भरने की आदी होती हैं.

कई वर्षों से वैज्ञानिक मानते आए हैं कि खर्राटों और दिल की बीमारियों में गहरा संबंध होता है.

हंगरी में हुए इस नए अध्ययन के बाद अब इस धारणा को और बल मिला है.

नया अध्ययन

अपने अध्ययन में वैज्ञानिकों ने 12 हज़ार से अधिक लोगों से उनके घर पर साक्षात्कार किया और उनसे प्रश्नावलियाँ भरवाईं.

आम लोगों से तुलना करने पता चला कि तेज़ खर्राटे भरने वाले लोगों में हार्ट अटैक का ख़तरा 34 फ़ीसदी अधिक होता है. इन लोगों में दिल के दौरे का ख़तरा सामान्य लोगों की तुलना में 67 फ़ीसदी बढ़ जाता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि साँस लेने में आने वाले ठहराव और तेज़ खर्राटों का इस्तेमाल ऐसे लोगों की पहचान में किया जा सकता है, जिनमें इन रोगों की संभावना है.

शोध के आंकड़े बताते हैं कि जो लोग धीरे-धीरे खर्राटे लेते हैं, उनमें हृदय रोगों के ख़तरे में कोई वृद्दि नहीं होती.

पुरुषों के लिए ख़ुशखबरी यह है कि 70 साल की आयु के बाद उनमें खर्राटे लेने की प्रवृत्ति घट जाती है.

 
 
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