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मंगलवार, 12 अगस्त, 2008 को 11:09 GMT तक के समाचार
 
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इंसानों की वजह से लुप्त हुई कई दुर्लभ प्रजातियाँ
 
लुप्त हो चुके बड़े जानवर
तस्मानिया में मानव के कदम 43,000 साल पहले पड़े थे
धरती से लुप्त हो जाने वाली जानवरों की कई प्रजातियों के बारे में वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि ये प्रजातियाँ जलवायु के परिवर्तन से नहीं बल्कि इंसानों की वजह से लुप्त हुई हैं.

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के इस दल ने साइंस जरनल में लिखा है कि तसमानिया में पुरातन या पूर्व ऐतिहासिक काल के जानवर मौसम के बदलाव की वजह से नहीं बल्कि इंसानों के शिकार करने की वजह से मारे गए हैं.

वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी तरह से ब्रितानिया में भी जानवरों के लुप्त होने का कारण शिकार ही है.

वैज्ञानिकों का ये शोध अमरीका की साइंस जरनल 'प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द नेशनल एकेडमी' में छापा गया है.

हिमयुग के बाद बड़ी तादाद में जानवरों के ग़ायब हो जाने को लेकर वैज्ञानिकों में पिछले कुछ सालों से लगातार बहस चल रही है.

बहस का मुद्दा ऑस्ट्रेलिया में कभी पाए जाने वाले बड़े-बड़े कंगारू और 'मैरासूपियल' शेर रहे हैं.

ये कंगारू क़रीब तीन मीटर ऊंचे और काफ़ी बड़े के होते थे. जबकि 'मैरासूपियल' शेर वो थे जिनकी मादाएँ अपने बच्चों को दूध पिलाती थीं.

तसमानिया में इंसान के कदम 43 हज़ार साल पहले पड़े थे. जब ये द्वीप ऑस्ट्रेलिया से जुड़ा हुआ था.

 बहुत दुख हुआ ये जानकर कि हमारे पूर्वज ही इन प्रजातियों के लुप्त होने का कारण हैं. इससे भी ज़्यादा दुख की बात ये है कि जानवरों का शिकार आज भी जारी है
 
प्रोफ़ेसर क्रिस टर्नी, वैज्ञानिक

वैज्ञानिकों का इससे पहले मानना था कि तस्मानिया में मानव के कदम रखने के पहले ही ये जानवर ग़ायब हो गए थे.

लेकिन जीवाश्म पर रेडियो कार्बन और ल्यूमिनिसेंस डेटिंग तकनीक से शोध करके ब्रितानिया और ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने इन बड़े-बड़े जीवों के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर ली है.

क्या मानव ज़िम्मेदार है?

वैज्ञानिकों ने बताया है कि तस्मानिया में मानव के कदम रखने के 2000 साल बाद तक ये बड़े-बड़े कंगारू, शेर और दूसरे जानवर पाए जाते थे.

जीवाश्म
वैज्ञानिकों ने जीवाश्म पर रेडियो कार्बन तरीके से शोध किया है

वैज्ञानिकों का दावा है कि इस समय तक मौसम में कोई नाटकीय बदलाव नहीं हुआ था. इसी के बाद इन शोधकर्ताओं का दावा है कि ये जानवर शिकार के कारण ही लुप्त हुए हैं.

एक्सेटर विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर क्रिस टर्नी जो इस शोध टीम के मुख्य सदस्य हैं कहते हैं कि जीवों की उत्पत्ति पर चार्ल्स डारविन के 150 वर्ष पुराने शोध के बाद इस बात पर बहुत बहस चल रही थी कि इन प्रजातियों के लुप्त होने का कारण क्या है?

"बहुत दुख हुआ ये जानकर कि हमारे पूर्वज ही इन प्रजातियों के लुप्त होने का कारण हैं. इससे भी ज़्यादा दुख की बात ये है कि जानवरों का शिकार आज भी जारी है."

इससे पहले के शोध के आधार पर ये माना जाता रहा है कि ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले ये बड़े-बड़े जानवर यहाँ पर इंसानों के कदम पड़ने से पहले करीब 46 हज़ार साल पहले ही लुप्त हो गए थे.

 
 
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