BBC World Service LogoHOMEPAGE | NEWS | SPORT | WORLD SERVICE DOWNLOAD FONT | Problem viewing?
BBCHindi.com

पहला पन्ना
भारत और पड़ोस
खेल और खिलाड़ी
कारोबार
विज्ञान
आपकी राय
विस्तार से पढ़िए
हमारे कार्यक्रम
प्रसारण समय
समाचार 
समीक्षाएं 
आजकल 
हमारे बारे में
हमारा पता
वेबगाइड
मदद चाहिए?
Sourh Asia News
BBC Urdu
BBC Bengali
BBC Nepali
BBC Tamil
 
BBC News
 
BBC Weather
 
 आप यहां हैं: 
 विज्ञान
शुक्रवार, 27 दिसंबर, 2002 को 02:33 GMT तक के समाचार
यूरोप का मंगल अभियान
चाँद पर वापसी अमरीका नहीं, बल्कि शायद यूरोप से हो
चाँद पर वापसी अमरीका नहीं, बल्कि शायद यूरोप से हो

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी अगले कुछ दशकों में चाँद ही नहीं बल्कि मंगल ग्रह और उससे आगे भी मनुष्यों को भेजने पर विचार कर रही है.

यूरोपीय संघ के सदस्य देश एक ऐसी योजना पर चर्चा कर रहे हैं जिसमें मंगल पर पहले एक रोबोट भेजने की योजना है. इस योजना की सफलता के बाद वहाँ मानव को पहुँचाया जा सकेगा.


मैं समझता हूँ यूरोप के पास 2025 तक मंगल पर मानव अभियान भेजने की विशेषज्ञता होगी

डेविड हॉल
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी को भरोसा है कि 2025 तक मंगल पर मनुष्यों को पहुँचाने लायक प्रौद्योगिकी उपलब्ध होगी.

एजेंसी का प्रस्ताव मंगल पर दो मानवरहित मिशन भेजने का है, जिनके तहत वहाँ की मिट्टी के नमूने लाए जाएँगे और मानव अभियान के लिए उपयुक्त स्थल की तलाश की जाएगी.

मंगल पर मनुष्यों को उतारा जाए या नहीं, इस बात पर अंतिम निर्णय 2015 तक हो सकेगा.

एजेंसी के औरोरा मानव अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम के तहत ये योजना बनाई जा रही है.

इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम में अगले 30 वर्षों के भीतर चाँद, मंगल, क्षुद्र ग्रहों और उनसे आगे भी मानव अभियान भेजने का प्रस्ताव है.

ब्रिटिश नेशनल स्पेस सेंटर के निदेशक डेविड हॉल यूरोपीय परियोजना में ब्रितानी प्रतिनिधि के तौर पर जुड़े हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "मैं समझता हूँ यूरोप के पास 2025 तक मंगल पर मानव अभियान भेजने की विशेषज्ञता होगी."

मंगल पर मानव को उतारने के अभियान में भारी निवेश की दरकार होगी और इसके लिए ज़रूरी होगी पूरी दुनिया की भागीदारी.

यूरोप ने इसलिए अमरीका, रूस, जापान और चीन से सहयोग करने की योजना बनाई है.

ब्रिटेन की दुविधा

हालाँकि हॉल ने कहा कि ब्रिटेन कम से कम इस समय तो अंतरिक्ष में मानव अभियानों को लेकर उत्साहित नहीं है.

ग़ौरतलब है कि ब्रिटेन सरकार अंतरिक्ष में मानव अभियानों को समर्थन नहीं करती, न ही अपने नागरिकों को इसके लिए उत्साहित करती है.

ब्रिटेन में पैदा हुए पीयर्स सेलर्स ने पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र की यात्रा की, लेकिन अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्हें अमरीकी बनना पड़ा.

हॉल के अनुसार ब्रिटेन का रवैया हमेशा से यही रहा है कि अंतरिक्ष अन्वेषण विज्ञान या वाणिज्य के लिए करना है तो करो, सांस्कृतिक या राजनीतिक कारणों से नहीं.
 
 
अन्य ख़बरें
07 जुलाई, 2002
रूस भेजेगा मंगल पर मानव
28 मई, 2002
मंगल पर बाढ़ की संभावना
26 मई, 2002
मंगल पर बर्फ़ मिली
06 अप्रैल, 2002
मंगल पर जीवन की संभावना
इंटरनेट लिंक्स
ब्रिटिश नेशनल स्पेस सेंटर
बीगल2
यूरोपीयन स्पेस एजेंसी
बीबीसी अन्य वेब साइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है
कुछ और पढ़िए
एड्स पर वेटिकन विवाद में
चीन अंतरिक्ष में यात्री भेजेगा
इच्छाशक्ति की जीत
हँसी-खुशी का उल्टा असर
बोतल बंद पानी कितना सुरक्षित
चर्बी वाले भोजन से ख़तरा?
बिगफ़ुट है या नहीं?







BBC copyright   ^^ हिंदी

पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल और खिलाड़ी
कारोबार | विज्ञान | आपकी राय | विस्तार से पढ़िए
 
 
  कार्यक्रम सूची | प्रसारण समय | हमारे बारे में | हमारा पता | वेबगाइड | मदद चाहिए?
 
 
  © BBC Hindi, Bush House, Strand, London WC2B 4PH, UK