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सोमवार, 13 जनवरी, 2003 को 09:36 GMT तक के समाचार
मुक़ाबला भारत और चीन का
रूस और अमरीका के बाद नंबर तीन बने रहने का चीनी इरादा
रूस और अमरीका के बाद नंबर तीन बने रहने का चीनी इरादा

भारत और चीन की अंतरिक्ष अन्वेषण संबंधी ताज़ा घोषणाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है.

भारत ने अगले कुछ वर्षों में अपना चंद्र अभियान शुरू करने का इरादा ज़ाहिर किया है, तो चीन ने न सिर्फ

भारत को रूस से सहयोग की उम्मीद है
धरती के इकलौते उपग्रह को टटोलने की बल्कि इसी साल बाद में अंतरिक्ष में मानव अभियान भेजने की घोषणा की है.

अब तक सिर्फ रूस और अमरीका के पास ही अंतरिक्ष में मनुष्यों को भेजने की क्षमता है.

चीन ने तो चाँद तक मानव को पहुँचाने की भी आकांक्षा जताई है. यह काम अब तक केवल अमरीका कर पाया है.

हालाँकि 10 वर्षों के भीतर चाँद पर क़दम रखने की चीन की योजना काफ़ी कुछ इस बात पर निर्भर करेगी कि इस साल अंतरिक्ष में मनुष्य को भेजने का उसका कार्यक्रम कितना सफल रहता है.

रूस की भूमिका

चंद्र अभियान शुरू करने की योजना बनाने वाले भारत की आधी जनता ग़रीबी रेखा के नीचे जीवन गुजार रही है और अब भी वहाँ से कभी-कभार भूख से होने वाली मौतों की ख़बरें आ जाती हैं.

लेकिन चंद्र अभियान की बात कर भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक बार फिर बताया है कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पीछे छूटना उसे मंज़ूर नहीं.

भारत ने पहले ही परमाणु हथियार बना रखे हैं और उसके पास इन हथियारों को हज़ारों किलोमीटर दूर गिराने के साधन भी हैं.

जो भी हो चंद्र अभियानों को अंजाम देना किसी देश के लिए साधारण-सी बात नहीं हो सकती.

उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के काम से कहीं ज़्यादा जटिल काम है चाँद तक किसी यान को भेजना और चाँद की सतह पर किसी उपग्रह को उतारना.

रही बात चाँद पर आदमी को उतारने की, तो संभवत: यह अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में सर्वाधिक जटिल काम है.

भारत के अपने रॉकेट निश्चय ही विश्वसनीय हैं. लेकिन चंद्र अभियानों के लिए उसे कहीं ताक़तवर रॉकेटों की ज़रूरत होगी.

शायद इसी लिए भारत रूसी वैज्ञानिकों के साथ संयुक्त चंद्र मिशन की

चीन को रूस से तकनीकी सहायता मिली है
संभावनाओं पर विचार कर रहा है.

अनौपचारिक बातचीत में यह विचार सामने आ रहा है कि रॉकेट की व्यवस्था रूस जबकि उपग्रह और निरीक्षण संबंधी अन्य उपकरणों की व्यवस्था भारत करेगा.

आगे है चीन

चीन ने तो अंतरिक्ष में अपने पहले मानव अभियान के लिए एक अंतरिक्षयात्री का चयन भी कर लिया है.

अपुष्ट ख़बरों के अनुसार इस व्यक्ति का नाम है चेन लोंग और वह अंतरिक्ष यात्रा संबंधी प्रशिक्षण के लिए चुने गए 14 पायलटों में से एक है.

चीन अपने नागरिक को अंतरिक्ष में भेजने का काम अक्तूबर यानि कम्युनिस्ट क्रांति की वर्षगांठ से पहले अंजाम देना चाहता है.

एशिया की दो बड़ी ताक़तों भारत और चीन के अंतरिक्ष मुक़ाबले के बारे में अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र की एकमात्र महाशक्ति अमरीका की क्या सोच होगी, इसका तो अनुमान मात्र ही लगाया जा सकता है.

अमरीका ने न सिर्फ चाँद तक मानव जाति को पहुँचाया, बल्कि वर्षों पहले वह अपना चंद्र अभियान छोड़ भी चुका है.
 
 
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