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 विज्ञान
बुधवार, 05 फरवरी, 2003 को 20:10 GMT तक के समाचार
अंतरिक्ष- गुत्थी या चुनौती?
सालाना करोड़ों डॉलर ख़र्च करके यह कार्यक्रम चलाए जाते हैं
सालाना करोड़ों डॉलर ख़र्च करके यह कार्यक्रम चलाए जाते हैं



कोलंबिया हादसे ने हमें जैसे सपने से जगा दिया हो.

आपको याद होगा अभी हम थोड़े दिन पहले तक हम अंतरिक्ष में पर्यटन की बात सोचने लगे थे

कुछ अमीर शौक़ीन तो सितारों के पार हो भी आए थे.

लगने लगा था कि वो दिन दूर नहीं है जब मंगल पर भी क़दम रखने के लिए मानवता तैयार है.

लेकिन पिछले शनिवार, फ़रवरी के पहले दिन की सुबह अमरीका के आसमान में बिखर गए शटल कोलंबिया के पंख, और धरती पर छोड़ गए बहुत से अनुत्तरित प्रश्न.

12 फ़रवरी 1961 की तारीख़ याद है जब यूरी गगारिन अंतरिक्ष गए, फिर 20 जुलाई 1979 जब नील आर्मस्ट्रोंग चाँद के लिए रवाना हुए थे.

लेकिन उसी तरह 16 जनवरी की तारीख़ लोगों को याद नहीं थी जब कोलंबिया 7 मेधावी वैज्ञानिकों के साथ रवाना हुआ था.

लेकिन 15 दिन बाद यह मिशन STS-107 एक हादसे में बदल गया. और यह दिन अब सबको याद रहेगा.

क्यों?

अब जाँचकर्ता अब जानने का प्रयास कर रहे हैं कि क्यों अंतरिक्ष शटल पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय टुकड़े-टुकड़े हो गया.

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के मुखिया डॉ. कस्तूरी रंगन ने कल कहा कि 2003 तक अमरीकी अंतरिक्ष यान 113 बार अंतरिक्ष में हो आए थे.

कोलंबिया की यह यात्रा शटल यानों की यात्रा की कड़ी में 113वीं यात्रा थी.

शटल मिशन का सबसे महत्वपूर्ण अंश उसका दोबारा पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करना होता है जो 120 किलोमीटर की ऊँचाई पर शुरू होता है.


बुश ने कहा अंतरिक्ष कार्यक्रम रूकेगा नहीं
लैंडिंग के तीन मिनट पहले 29,000 किलोमीटर की रफ़्तार पर शटल बहुत गर्म हो जाता है.

और इसी क्रिटिकल, कठिन स्टेज को कोलंबिया झेल नहीं पाया.

क्या हुआ किसकी ग़लती थी, क्या दुर्घटना को रोका जा सकता था, बहुत से क़यास लगाए जा रहे हैं.

नासा के वैज्ञानिक लगे हैं कारण तलाशने में.

रूकेंगे नहीं

फिर भी यह वैज्ञानिक हतोत्साहित नहीं है. कम से कम आधिकारिक तौर पर तो ऐसा ही लगता हैं.


हम अपने बीच से सबसे अच्छों को चुनते हैं और उन्हें अनजाने अधेंरो में भेजते हैं

जॉर्ज बुश
नासा के प्रवक्ता ब्रूस बकिंघम का कहना है "हमारा बहुत कुछ दांव पर लगा है, हम बहुत कुछ कर चुके हैं, हमारे पास बहुत सा अनुभव है. हम अब अपनी रफ़्तार को रोक नहीं सकते."

जब अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश मरने वालों सातों अंतरिक्ष यात्रियों को याद करने ह्यूसटन में शोक सभा में पहुंचें तो उन्होंने कहा कि
कि अमरीका का अंतरिक्ष कार्यक्रम रूकेगा नहीं.

उन्होंने कहा "हम अपने बीच से सबसे अच्छों को चुनते हैं और उन्हें अनजाने अधेंरो में भेजते हैं फिर उनके सकुशल लौटने की प्रार्थना करते हैं."

भविष्य?

भारतीय वैज्ञानिक भी यही मानते हैं कि यह केवल एक हादसा था और इससे सफलता को कम नहीं आंकना चाहिए.


अमर हो गईं कल्पना चावला
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में उसके शुरूआती सालों से जुड़े रहे और कई साल अमरीका में काम कर चुके डॉ पीपी काले का कहना है कि अमरीकी शटल यान एक बहुत सफल यान रहा है.

डॉ काले का मानना है कि थोड़े बहुत परिवर्तन होगें, कुछ समय काम रूकेगा लेकिन एक साल के भीतर फिर से अभियान शुरू हो जाएँगे.

उधर कोलंबिया हादसे में मारी गईं भारतीय मूल की कल्पना चावला को याद करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत के मौसम उपग्रह को उनका नाम दे दिया.

वाजपेयी ने कहा "कल्पना की इच्छा मंगल तक जाने की थी. उनके बाद कोई न कोई साहसी नौजवान उसे ज़रूर पूरी करेगा."
 
 
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