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 विज्ञान
मंगलवार, 22 अप्रैल, 2003 को 15:41 GMT तक के समाचार
मलेरिया के ख़िलाफ़ सफलता
मलेरिया के प्रभावी उपचार की उम्मीदें बँधी
मलेरिया के प्रभावी उपचार की उम्मीदें बँधी

स्कॉटलैंड के एक विश्विद्यालय में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्हें विकासशील देशों में लाखों लोगों की जान लेने वाली बीमारी मलेरिया का स्थायी इलाज ढूँढने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है.

एडिनबरा विश्वविद्यालय में सेल एंड मोलेकुलर बॉयोलॉजी विभाग के वैज्ञानिकों ने कहा है कि उन्होंने एक प्रोटीन के उस ख़ास हिस्से को अलग कर लिया है जो कि मलेरिया पर नई दवाओ का पूरा असर नहीं होने देती.


इस प्रोटीन का अध्ययन काफी समय से किया जा रहा था, लेकिन पहली बार इसकी बनावट का पता चल पाया है. यह एक बड़ी सफलता है

प्रोफ़ेसर मैल्कम वाकिनशॉ
नए शोध का विवरण नेचर स्ट्रक्चरल बॉयोलॉजी नामक पत्रिका में छापा गया है.

माना जा रहा है कि नई खोज से मलेरिया के लिए नई प्रभावी दवाएँ विकसित करने में मदद मिलेंगी.

ग़ौरतलब है कि मलेरिया हर साल 10 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत का कारण बनता है. यह टीबी के बाद मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला दूसरा सबसे कारण है.

मलेरिया की चार प्रमुख किस्में हैं, और हर स्थिति में इनका प्रसार मच्छरों के ज़रिए होता है.

इस बीमारी से किडनी और मस्तिष्क पर असर पड़ता है.

मलेरिया का प्रसार दुनिया के 90 देशों में है. और दुनिया में हर दसवाँ इन्सान इससे प्रभावित है, हालाँकि उपोष्णकटिबंधीय इलाक़े में इसका ज़्यादा फैलाव है.

आश्चर्यजनक रूप से मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या 30 साल पहले के मुक़ाबले ज़्यादा है.

और इसका एक प्रमुख कारण है बीमारी का दवाओं के ख़िलाफ़ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेना.

बड़ी सफलता

स्कॉटलैंड में एडिनबरा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बैंकॉक के बायोटेक इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर उस प्रोटीन पर ध्यान केंद्रित किया जो कि मलेरिया को दवाओं को नकारा करने की ताक़त देता है.

वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्रोटीन का नाम डीएचएफ़आर है जो कि मलेरिया परजीवी ख़ुद को जीवित रखने के लिए पैदा करती है.

वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन के उस ख़ास हिस्से को अलग कर लिया है जो कि परजीवी को मलेरियारोधी दवाओं में प्रयुक्त पाइरिमेथामाइन नामक रसायन को बेअसर करने लायक बनाता है.

एडिनबरा विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर मैल्कम वाकिनशॉ ने कहा, "अब हम इस प्रोटीन स्ट्रक्चर को मलेरिया परजीवी की प्रतिरोधी क्षमता को काबू करने में सक्षम दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल करेंगे."

उन्होंने कहा, "इस प्रोटीन का अध्ययन काफी समय से किया जा रहा था, लेकिन पहली बार इसकी बनावट का पता चल पाया है. यह एक बड़ी सफलता है."
 
 
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