ईमानदार हिंदुस्तानियों को भारी नुक़सान: मनमोहन

  • 9 दिसंबर 2016
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पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के फ़ैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की है और कहा है कि उन्होंने एक अरब से अधिक भारतीयों का विश्वास तोड़ा है.

अंग्रेज़ी दैनिक 'द हिंदू' में शुक्रवार को प्रकाशित मनमोहन सिंह के लेख की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है.

लेख में पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा है कि नोटबंदी से सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी और नई नौकरियों में कमी आएगी, जनता को आने वाले महीनों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा.

इस फैसले की वजह से ईमानदार हिंदुस्तानियों को 'भारी नुकसान' होगा, और बेईमान और काला धन जमा करने वाले 'हल्की-सी चोट के बाद' बच निकलेंगे.

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हालांकि उन्होंने कर चोरी रोकने और आतंकवादियों द्वारा नकली नोटों के इस्तेमाल को खत्म करने की प्रधानमंत्री मोदी की मंशा की तारीफ़ भी की और कहा कि इसके लिए खुले दिल से उन्हें समर्थन दिया जाना चाहिए.

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इससे पहले 24 नवंबर को मनमोहन सिंह ने संसद में बोलते हुए नोटबंदी के फैसले को 'संगठित लूट' बताया था.

पत्रकार सुहासिनी हैदर ने मनमोहन के लेख का जिक्र करते हुए ट्वीट किया, "ये ग़लतफ़हमी है कि सारी नक़दी काला धन है और सारा काला धन नक़दी के रूप में है."

लेखक चेतन भगत ने ट्वीट किया, "भारत में कोई भी अर्थशास्त्री के रूप में मनमोहन सिंह की योग्यता पर शक नहीं करेगा. नोटबंदी पर बहुत अच्छा लेख."

ट्विटर हैंडल @yprajesh से लिखा गया है, "मनमोहन कहते हैं जीडीपी में 2 प्रतिशत घटेगी, जबकि वित्त राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल कहते हैं कि जीडीपी 2 प्रतिशत बढ़ेगी. अब ये आप पर है कि किसकी बात मानें."

राजगोपाल सिंह ने ट्वीट किया, "क्या मनमोहन सिंह ये नहीं बताना चाहिए कि वो 2 प्रतिशत के आंकड़े पर कैसे पहुँचे."

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