सोशल मीडिया- 'प्रधानमंत्री पर भरोसा किया, उन्होंने मन बदल लिया'

योगेंद्र यादव का ट्वीट

नोटबंदी को लेकर नए बदलते नियमों में पाँच हज़ार रुपए से अधिक बैंक में जमा करने पर स्पष्टीकरण देने के नियम से हुई परेशानी का ज़िक्र कई लोगों ने सोशल मीडिया पर किया है.

स्वराज अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने बैंक को दिए अपने स्पष्टीकरण की तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की है जिसे सात हज़ार से अधिक बार रीट्वीट किया जा चुका है.

योगेंद्र यादव ने इसमें लिखा है, "मैंने 8 नवंबर से अपने खाते में कोई कैश जमा नहीं किया है. मेरे पास इसके लिए कोई विशेष स्पष्टीकरण देने का कोई कारण नहीं है. मैं आमतौर पर कतारें ख़त्म होने का इंतेज़ार करता हूँ. मुझे प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री और रिज़र्व बैंक ने भरोसा दिया था कि बैंक जाने की कोई जल्दबाज़ी नहीं है और मेरे पास पैसे जमा करने के लिए तीस दिसंबर तक का समय है. मैंने उन पर भरोसा किया"

बैंक में दिए गए ऐसे ही एक अन्य स्पष्टीकरण की तस्वीर भी शेयर की जा रही है जिसमें लिखा गया है, "क्योंकि मोदी जी ने हमसे कहा था कि हम तीस दिसंबर तक नोट जमा करा सकते हैं और आज 20 दिसंबर 2016 है, मैंने उन पर विश्वास किया."

राजेश वैद ने योगेंद्र यादव को जवाब देते हुए लिखा, "सरकार लोगों पर ईमानदारी से टैक्स देने का भरोसा भी करती है लेकिन कितने लोग इस भरोसे को तोड़ देते हैं."

सुशांत सरीन ने योगेंद्र के ट्वीट पर जवाब देते हुए लिखा, "जब मेरी पत्नी हमारे बच्चों को बचत और गिफ़्ट में मिले पैसे जमा करने गईं तो उन्होंने भी ऐसा ही स्पष्टीकरण दिया."

आकिफ़ ने बताया, "आईसीआईसीआई बैंक हाथ से लिखा स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं कर रही है. क्या आप डिजीटल प्रगति देख सकते हैं."

इस पर आईसीआईसीआई बैंक के अधिकारिक अकाउंट से जवाब दिया गया, "हमने आपकी परेशानी पर ध्यान दिया है और अपनी ब्रांच को जानकारी दी है. वो आपकी मदद करने की कोशिश करेंगे."

आदित्य पंत ने लिखा, "बैंक न तो प्रधानमंत्री जनधन योजना अकाउंट खोल रहे हैं और न ही पाँच सौ और हज़ार रुपए के नोट जमा कर रहे हैं."

सोशल मीडिया पर रामकुमार राम का फ़ेसबुक स्टेट्स भी वायरल हो रहा जिसमें उन्होंने लिखा है कि जब उन्होंने स्पष्टीकरण में लिखा कि, "मैंने प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री के शब्दों पर भरोसा किया लेकिन उन्होंने अपना मन बदल लिया" तो बैंक मैनेजर ने उनसे कुछ और स्पष्टीकरण देने के लिए कहा. वो नहीं माने और अंत में उनका स्पष्टीकरण स्वीकार कर लिया गया.

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