सोशल- 'घूंघट तो हरियाणा की भैंसों को भी नहीं पसंद'

  • 30 जून 2017
कृषि संवाद मैगजीन का पोस्टर इमेज कॉपीरइट Krishi Samvad Magazine Poster
Image caption कृषि संवाद मैगजीन का पोस्टर

ये हरियाणा सरकार की पत्रिका कृषि संवाद का पोस्टर है. इस पोस्टर में 'घूंघट की आन-बान' को हरियाणा की पहचान बताया गया है.

पत्रिका के पहले पन्ने पर हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर की तस्वीर है. कृषि संवाद हरियाणा सरकार की मासिक पत्रिका 'हरियाणा संवाद' का ही एक हिस्सा है.

ऐसे में हमने बीबीसी हिंदी के पाठकों से कहासुनी के ज़रिए सवाल किया,

देश को कई मेडल दिलवा चुकीं गीता फोगट और साक्षी मलिक हरियाणा की शान हैं या घूंघट?

इस सवाल पर हमें सैकड़ों पाठकों की प्रतिक्रियाएं मिलीं. हम आपको यहां चुनिंदा कमेंट्स पढ़वा रहे हैं.

पूजा ने फ़ेसुबक पर लिखा, ''हरियाणा में महिलाओं की हालत किसी से छिपी नहीं है. जानवरों जैसी ज़िंदगी है. गोबर उठवाओ और दीवार पर चिपकाओ. बस हरियाणा में महिलाओं की यही हालत है.''

ज्योति यादव हरियाणा से हैं. ज्योति ने हरियाणा की कई महिलाओं की तस्वीरें बिना घूंघट के फेसबुक पर शेयर करते हुए लिखा,

  • ''मैं अपनी संस्कृति से कुछ चीज़ें लेना चाहूंगी और कुछ छोड़ना.
  • कुछ चीज़ों पर फ़ख्र है कुछ पर शर्मिंदगी. लेकिन हर ट्रेडिशन अपने गले में लटका कर नहीं घूम सकती. आखिरकार सहूलियत भी किसी चिड़िया का नाम है.''

वो हरियाणा सरकार की इस पत्रिका पर तंज करते हुए एक भैंस की तस्वीर शेयर करती हैं और लिखती हैं- घूंघट तो भैंस को भी नहीं पसंद.

इमेज कॉपीरइट FACEBOOK

मनोज ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ''घूंघट शादी होने के बाद ससुर और जेठ के सामने निकाला जाता है. हरियाणा की लड़कियां पैदा होते ही घूंघट नहीं निकालतीं. हरियाणा की लड़कियां गीता फोगट, साक्षी मलिक और कल्पना चावला देश का नाम रोशन करती हैं.''

फरहा खान ने लिखा- ''गीता फोगट और साक्षी मलिक को जन्म देने वाली मांएं भी घूंघट वाली हैं. घूंघट उनके संस्कृति है और वो इससे प्यार करते हैं.''

इमेज कॉपीरइट KASHISH BADAR
Image caption सांकेतिक तस्वीर

'आधा घूंघट सुंदर लगता है.'

इंदिरा ठाकुर कहती हैं, ''भाई कुछ भी बोलो लेकिन आधे घूंघट में कुडी बड़ी सोणी लगती है. बाकी पहनने वाली की मर्ज़ी, जो पहनना चाहें पहनें.''

अंश ठाकुर कहते हैं, ''अगर बुर्का मुसलमानों के लिए शान है तो घूंघट हिंदुओं के लिए है. पर सब पर थोपना नहीं चाहिए.''

ट्विटर पर @kavijams1 ने लिखा- घूंघट भी आन है और फोगट भी शान है.

धीमान लिखते हैं, ''इज्ज़त दिल से की जाती है, ये काम घूंघट से नहीं होता है. वरना घूंघट निकालकर ससुर से झगड़ा करना तो कोई बात नहीं हुई.''

हिमांशु शेखर कहते हैं, ''घूंघट. चादर से मुंह ढक लो चेहरा नहीं दिखेगा और बेतुके फरमान सुनाने वाले भी हरियाणा की शान हैं.''

लड़कियों को मनपसंद कपड़े पहनने की छूट क्यों नहीं?

मोदी का नारा 'बेटी बचाओ'

'लड़के कभी चुन्नी खींच लेते हैं कभी कुछ और'

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे