सोशल- गोरखपुर: 'मरते हैं बच्चे तो मर जाने दो, गाय थोड़ी है'

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Image caption गोरखपुर में बच्चों की मौत के बाद रविवार को दिल्ली में हुआ विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है.

कई बच्चों की मौत के बाद यूपी सरकार मामले की जांच के आदेश दे चुकी है. लेकिन प्रशासन के ख़िलाफ मृतक बच्चों के रिश्तेदारों का गुस्सा कायम है.

बीते दिनों मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने के कारण एक दिन में 30 से भी ज़्यादा बच्चों के मौत हो गई थी. मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है.

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इससे पहले शनिवार और रविवार को यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे पर अपनी दलीलें रखीं.

इन दलीलों में गोरखपुर में अगस्त महीने में होने वाली मौतों के बीते तीन साल के आंकड़े रखे जाना और सभी मौतों की वजह ऑक्सीजन की कमी को नहीं बताना शामिल था.

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सरकार की इन दलीलों पर हमने कहासुनी के ज़रिए लोगों से सवाल किया. इस सवाल पर हमें सैकड़ों प्रतिक्रियाएं मिलीं. पढ़िए, यूपी सरकार की दलीलों पर क्या है आम लोगों की राय:

इंस्टाग्राम पर प्रियमश्री पांडे ने लिखा, "सब कुछ हो जाएगा. पर उनकी ज़िंदगी नहीं लौटेगी. कुछ भी जांच करवा लें, लेकिन क्या यूपी सरकार उस मां के आंसू लौटा पाएगी जिसने अपना बच्चा खोया है. उनकी खुशी लौटा पाएगी. नहीं न?"

उमाशंकर जटवार लिखते हैं, "बच्चों की मौत के ज़िम्मेदार हम और आप भी हैं. अस्पताल की हालत कैसी है, इससे हमें क्या लेना देना. बस हम तो देशभक्ति के नारे लगाकर ही खुश हैं."

आएशा सोनी ने लिखा, "जनता ख़िलाफ है तो होने दो, चुनाव थोड़ी है. मरते हैं बच्चे तो मर जाने दो, गाय थोड़ी है."

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डीपीके कुमार लिखते हैं, "दोषी अधिकारियों और नेताओं पर जल्दी कार्रवाई हो. क्योंकि जनता जूते सिर्फ अगस्त में नहीं, 12 महीने मारती है."

मनीष लिखते हैं, "बच्चों की मौत बिना ऑक्सजीन से हो रही है और केंद्र-राज्य सरकार मेक इन इंडिया की बातें कर रही है. ये किस तरह का मेक इन इंडिया बना रहे हैं आप."

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अबुल कलाम ने लिखा, "अगर ये हादसा दिल्ली में हुआ होता, तो अब तक आरएसएस और बीजेपी ने कोहराम मचा दिया होता."

विनोद कुमार लिखते हैं, "अगर सरकार को पता है कि अगस्त महीने में बच्चों की मौत होती है तो डॉक्टरों की एक टीम तैयार करके पूरे राज्य में अलर्ट क्यों नहीं जारी किया?"

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