सोशल: नहीं मानी दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट के आदेश को किया धुंआ-धुंआ

  • 20 अक्तूबर 2017
दिवाली, प्रदूषण, पटाखे, सुप्रीम कोर्ट, त्योहार, बैन इमेज कॉपीरइट Getty Images

इस शहर को ये हुआ क्या है? कहीं राख है, कहीं धुआं-धुआं.

ये फ़िल्म शुरू होने से पहले दिखाए जाने वाले विज्ञापन की टैगलाइन नहीं बल्कि आज का हाल है.

दिवाली के बाद होने वाले प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी थी.

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उम्मीद थी कि इस रोक के बाद लोग पटाखे नहीं फो़ड़ेंगे और दिवाली की सुबह धुंध और प्रदूषण भरी नहीं होगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ, लोगों ने जमकर पटाखे फोड़े और सुबह वायु प्रदूषण ख़तरनाक स्तर पर पहुंच गया.

दिवाली के बाद शुक्रवार की सुबह आसमान में प्रदूषण भरी धुंध साफ देखी जा सकती है. आंकड़ों की भी बात करें तो बीते साल दिवाली से प्रदूषण कम तो हुआ है लेकिन इसमें बड़ी गिरावट नहीं है.

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अब लोग सोशल मीडिया पर इस बारे में बात कर रहे हैं. ट्विटर पर #delhipollution ट्रेंड कर रहा है और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

क्या भारत में पटाखे मुग़ल लेकर आए थे?

तुषार ने ट्वीट किया,''कल रात माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को बाज़ारों में बिकते हुए और धुआं होते हुए देखा.''

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अमोल सरोज ने लिखा,''सीने में जलन आंखों में तूफ़ान सा क्यों है? मेरे शहर में हर शख़्स बावलीबूच सा क्यों है?''

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सनी ने ट्वीट किया,''पटाखों पर बैन भी बिलकुल वैसा साबित हुआ, जैसे पंचकूला में धारा 144 हुई थी.''

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मोहित पसरीचा ने फ़ेसबुक पर लिखा,''जब से आया है, खांसे जा रहा है- मां कौशल्या.''

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विक्रांत चौहान ने कहा, ''सुना है दिल्ली में पटाखे बंद थे, कौन सी दिल्ली में बंद थे?''

दो बच्चे, दो अलग दिवाली!

वरुण शर्मा ने लिखा,'' ये #delhipollution की रिपोर्ट तो रोज़ आनी चाहिए. दीवाली पर ही क्यों? क्या आज प्रदूषण नही होगा. हमे प्रदूषण पर काम करना चाहिए न कि राजनीति.''

हमने इसी बारे में कहासुनी के जरिए भी लोगों से उनकी राय मानी थी.

जिसके जवाब में उमाशंकर फ़ेसबुक पर लिखते हैं,''संविधान कोर्ट के फैसले का सम्मान करना सबका धर्म है लेकिन अपने जोश में लोग कानून का उल्लंघन कर रहे हैं. किसी भी देश की कोर्ट कानून से बड़ा कोई नही है क्योंकि देश संविधान कानून से चलता है मानसिक गुलामी से नहीं?''

शोम कहते हैं,''सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दूरदर्शी नहीं था. बजाय पटाखों पर एकतरफा बैन लगाने के कोर्ट इसे एक सलाह के रूप में जारी कर सकता था. कम ताकत के पटाखों को फोड़ने की सलाह भी दे सकता था. इस तरह के एकतरफ़ा बैन से दिवाली प्रेमी विपरीत प्रतिक्रिया देने पर उतर आए.''

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कुमकुम गुप्ता ने ट्विटर पर बताया,''सबसे बढ़िया बात कि बिना बंद के लोगो ने न के बराबर पटाखे जलाए. कुछ लोगों ने ही बम फोड़े. गज़ब! कानपुर, मान गए. जबकि हमारे यहां ग्रीनरी है, हवा साफ़ है.

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कंवल ने कुछ तस्वीरें शेयर की और कहा,''हर तरफ बारूदी धुएँ और ज़हरीली धूल की दुर्गंध.''

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सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश आने पर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश भी की गई थी. कइयों ने इस बात पर नाराज़गी जताई थी कि कोर्ट का फ़ैसला सालों से चली आ रही परम्परा के ख़िलाफ़ है.

सुप्रीम कोर्ट के आस-पास इसके विरोध में पोस्टर भी लगाए गए थे.

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