ब्लॉग: क्या फ़ेसबुक पर फ़्रेंड रिक्वेस्ट भेजना भी उत्पीड़न है?

  • 1 नवंबर 2017
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क्या फ़ेसबुक पर फ़्रेंड रिक्वेस्ट भेजना किसी को प्रताड़ित करना माना जा सकता है? पाकिस्तान की एक फ़िल्म निर्माता ने इसी सवाल को उठाया है.

ये विवाद तब शुरू हुआ जब ऑस्कर पुरस्कार जीत चुकी पाकिस्तान की फ़िल्म निर्माता शरमीन ओबेद-चिनॉय की बहन अस्पताल गईं. इलाज के बाद उनकी बहन को अस्पताल के एक डॉक्टर से फ़्रेंड रिक्वेस्ट मिला.

इस बात को लेकर फ़िल्म निर्माता चिनॉय ने गुस्से से ट्वीट किया कि कैसे कोई डॉक्टर अपने मरीज़ के बारे में जानकारी फ़ेसबुक पर पोस्ट कर सकता है. उनके ट्वीट्स को लेकर पकिस्तान में फ़ेसबुक पर उत्पीड़न की परिभाषा को लेकर बहस छिड़ गई है.

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'स्त्रियों के प्रति रवैया'

ओबेद चिनॉय के फ़्रेंड रिक्वेस्ट को 'उत्पीड़न' बताने से कई लोग नाराज़ हो गए. उनका कहना था कि वो बेवजह ही ज़्यादा रिऐक्ट कर रही हैं. लेकिन कई लोगों ने उनका समर्थन किया और कहा कि उन्हें अपमानजनक टिप्पणियां मिलती हैं क्योंकि उनके आलोचक स्त्रियों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया रखते हैं.

ओबेद चिनॉय की आलोचना करने वालों में पत्रकार अली मोइन नवाज़िश भी शामिल हैं जिन्होंने अपने फ़ेसबुक पन्ने पर लिखा कि सोशल मीडिया पर कोई रिक्वेस्ट भेजना अगर उत्पीड़न के समान है तो ये 'हास्यास्पद' है.

उन्होंने लिखा, "इसके बाद क्या किसी से कलम मांगना भी उत्पीड़न होगा या किसी को तीन सेकंड से अधिक देर तक देखना भी उत्पीड़न है?"

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अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ऐसा करना "वाकई उत्पीड़न की शिकार महिलाओं से ध्यान हटाना है." उन्होंने ओबेद चिनॉय की आलोचना करते हुए लिखा कि वो 'पाकिस्तान का अपमान' कर रही हैं.

नवाज़िश ने बाद में दावा किया कि ओबेद-चिनॉय के ट्वीट के कारण डॉक्टर को नौकरी से निकाल दिया गया है. हालांकि कुछ ख़बरों के मुताबिक, उन्हें आग़ा ख़ान यूनिवर्सिटी अस्पताल से निलंबित किया गया है और इस मामले में अस्पताल जांच कर रहा है.

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चिनॉय की होती रही है 'निंदा'

ओबेद-चिनॉय को 'ऑनर किलिंग' और एसिड अटैक पीड़ितों पर बनी डॉक्यूमेंटरी के लिए पुरस्कार मिले हैं.

उन पर पहले भी पकिस्तान से 'गद्दारी' करने और दुनिया में पाकिस्तान की छवि ख़राब करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं क्योंकि उनकी फ़िल्मों में पाकिस्तानी समाज के कुछ हिस्सों में हिंसक और स्त्री से भेदभावपूर्ण संस्कृति को दिखाया गया है.

कुछ लोगों ने उन्हें एलिटिस्ट कहा और कहा कि वो 'एक ग़लत परिवार में ग़लत महिला' का उदाहरण हैं.

शरमीन ओबेद-चिनॉय ने इस बात पर सफाई देते हुए कहा कि उनका मतलब था कि 'उनके परिवार की महिलाएं मज़बूत' हैं और उनकी बात का मतलब किसी तरह की ताकत या विशषाधिकार से नहीं है.'

लेकिन शरमीन ओबेद-चिनॉय की इस सफाई के बाद भी उनकी आलोचना करने वाले रुके नहीं. कुछ लोगों ने अन्य पुरूषों के साथ उनकी तस्वीरें पोस्ट की और उन्हें 'हिपोक्रेट' कहा. कई लोगों ने फ़ेसबुक पन्ने बनाए और लोगों से ओबेद-चिनॉय को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने के लिए कहा.

कई महिलाओं और पुरूषों ने सवाल किया कि क्या किसी को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना उत्पीड़न करना हो सकता है.

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लेकिन सोशल मीडिया और अख़बारों के पन्नों पर कुछ लोगों ने ओबेद-चिनॉय का समर्थन किया. पाकिस्तान की लेखिका बीना शाह ने बीबीसी को बताया कि "ओबेद-चिनॉय के ख़िलाफ़ जिस तरह की आलोचना हो रही है और उनके ख़िलाफ़ बोला जा रहा है, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं."

वे कहती हैं, "आप कभी भी पितृसत्ता से लड़ने की कोशिश करेंगे तो आपको इसका ख़ामियाज़ा तो भुगतना पड़ेगा."

बाद में ओबेद-चिनॉय ने एक बयान जारी कर कहा कि "ये बात महिला सुरक्षा, अनैतिक व्यवहार और प्रताड़ना से कहीं आगे बढ़ गई."

उन्होंने अपने बयान में कहा कि डॉक्टर ने उनकी बहन की जांच की और इसके बाद ऑनलाइन जाकर तस्वीरों पर टिप्पणी की और उन्हें अपने फ़ेसबुक फ्रेंड की लिस्ट में जोड़ लिया.

शरमीन ओबेद-चिनॉय ने लिखा कि उन्हें "कई बार अनजान लोगों से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिलते हैं लेकिन ये घटना डॉक्टर और मरीज़ के रिश्ते में भरोसे को तोड़ने जैसा है."

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पाकिस्तान मेडिकल एंड डेंटल काउंसिल ने बीबीसी को अपने नीति-निर्देशों के बारे में बताया जिसमें सोशल मीडिया को लेकर कुछ ख़ास नहीं कहा गया है.

लेकिन इन नीति-निर्देशों में इतना ज़रूर कहा गया है, "किसी भी मरीज़, मरीज़ के पति-पत्नी या परिवार या रिश्तेदार के साथ इमोशनल या सेक्स संबंध बनाने के लिए अपने पद का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए."

जिस डॉक्टर की पोस्ट को लेकर ये विवाद हुआ है, उनका नाम अब तक गोपनीय रखा गया है. लेकिन ख़बरों की मानें को उन्हें कराची के एक अस्पताल से नौकरी का ऑफर मिला है.

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