अमिताभ ने क्यों कहा 'मैं शांति से रहना चाहता हूं'

  • 5 नवंबर 2017
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बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन 75 साल की उम्र में भी लगातार काम कर रहे हैं. वे फ़िल्मी पर्दे के अलावा छोटे पर्दे पर भी लगातार जगह बनाए हुए हैं साथ ही वे कई उत्पादों के विज्ञापनों में भी नज़र आते हैं.

लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ कि अमिताभ को कहना पड़ा कि वे अब शांति से रहना चाहते हैं, उन्हें सुर्खियों में आने की कोई लालसा नहीं है.

दरअसल रविवार को बिग बी ने अपने ब्लॉग बच्चन बोल में कई सवालों के जवाब लिखे, उन्होंने मीडिया पर भी कुछ सवाल उठाए और कहा कि उन्हें कई दफ़ा बेवजह परेशान किया गया.

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बीएमसी नोटिस का दिया जवाब

अमिताभ बच्चन को कुछ दिन पहले बीएमसी की तरफ़ से ग़ैरक़ानूनी निर्माण संबंधी एक नोटिस जारी किया गया था. अमिताभ ने लिखा कि मीडिया मुझे तुरंत जवाब देने के लिए कहता है. मैं ऐसा करता भी हूं, लेकिन कई बार मुझसे देरी हो जाती है.

बीएमसी के नोटिस के संबंध में अमिताभ ने अपने वकील अमित नाइक का बयान लिखा है, जो इस प्रकार है-

''मेरे क्लाइंट ने 29 अक्टूबर 2012 को ओबरॉय रिएलिटी लिमिटेट से ओबरॉय सेवेन में एक प्रॉपर्टी ख़रीदी थी जिसकी रजिस्ट्री 2 नवंबर 2012 को की गई. यह पहले से बनी-बनाई प्रॉपर्टी थी जिसमें मेरे क्लाइंट की तरफ़ से न तो एक ईंट जोड़ी गई न ही कोई हटाई गई. इसलिए उन पर किसी तरह के ग़ैरक़ानूनी निर्माण करवाने का सवाल ही नहीं उठता.''

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'बोफोर्स मामले में हमें बदनाम किया गया'

अमिताभ ने अपने ब्लॉग के ज़रिए इतिहास के पन्नों को भी पलटा. उन्होंने बोफ़ोर्स कांड को याद करते हुए लिखा कि उनके परिवार को कई सालों तक सवालों के कटघरे में खड़ा किया गया.

अमिताभ ने लिखा, ''हमें कई सालों तक परेशान किया गया, गद्दार साबित किया गया, और जब यह सब असहनीय हो गया तो हम जल्दी न्याय पाने के लिए यूनाइटेड किंगडम (यूके) की अदालत में गए, हमने यूके के एक अख़बार के ख़िलाफ़ केस किया और हम वो केस जीते भी.''

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वे लिखते हैं, ''हमें बदनाम करने वाले कभी कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए, वे अपने आरोप साबित करने कभी नहीं आए, कोर्ट तो सभी के लिए खुला होता है...लेकिन कोई अपने आरोप साबित करने नहीं आया.''

''लगभग 25 साल बाद देश के एक प्रमुख वकील ने सभी को बताया कि इस कांड में हमारे परिवार का नाम जानबूझ कर जोड़ा गया था. जब यह बात सामने आई तो मीडिया ने मुझसे पूछा कि क्या मैं इसका बदला लूंगा.''

अमिताभ आगे लिखते हैं, ''मैं क्या बदला लूंगा? क्या इससे हमारे वो दुख भरे साल खत्म हो जाएंगे जिनसे हम गुज़रे. क्या इससे हमें कुछ सुकून मिलेगा? नहीं इससे कुछ नहीं होगा.''

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पनामा पेपर्स में भी हमारा नाम उछला

दुनिया भर में तहलका मचाने वाले पनामा पेपर्स लीक मामले में भी बच्चन परिवार का नाम शामिल हुआ. अमिताभ बच्चन ने इसका ज़िक्र भी अपने ब्लॉग में किया है.

उन्होंने लिखा, ''कुछ महीनों पहले मैंने पनामा पेपर्स लीक में दोबारा अपना नाम देखा, यह रिपोर्ट इंडियन एक्सप्रेस ने जारी की थी. इस अख़बार ने मेरी प्रतिक्रिया जाननी चाही, वे तमाम सवालों पर मेरी टिप्पणी चाहते थे. हमारी तरफ़ से उसी समय उन्हें दो जवाब दिए गए, उन्हें प्रकाशित भी किया गया.''

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''एक्सप्रेस में इस ख़बर के बाद से अभी तक हमारे नाम पर 6 समन जारी हो चुके हैं. हमने निष्ठापूर्ण और विधिवत तरीके से सभी का जवाब दिया. जहां कहीं भी हमें व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा गया हम वहां हाज़िर भी हुए, फिर चाहे वह दिल्ली हो या मुंबई. वे हमसे जितनी जानकारी चाहते थे हमने दी. कुछ सवालों के लिए हमने वक्त मांगा क्योंकि वे 25 साल से भी ज़्यादा पुराने मामलों से जुड़े सवाल थे, इतनी पुरानी बातें और उनसे जुड़े सही जवाब निकालने में वक्त तो लगता है.

मीडिया पर उठाए सवाल

अमिताभ ने अपने ब्लॉग के ज़रिए मीडिया की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं. वे लिखते हैं कि मीडिया के पास हमेशा सबसे पहले सूचना होने का विशेषाधिकार रहता है. ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि मीडिया ही इस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है.

''मीडिया के भी कुछ सिद्धांत हैं, वे किसी भी ख़बर को प्रकाशित करने से पहले उसे जांचते परखते हैं, और इसी सिलसिले में वे अलग-अलग श्रोतों के ज़रिए मुझ तक अपने सवाल भेजते हैं. कई बार उन्हें जवाब नहीं मिलते...कई बार जवाब देना बहुत जरूरी हो जाता है क्योंकि झूठे आरोपों पर चुप रहने से वे सच मान लिए जाते हैं.''

अमिताभ लिखते हैं, ''आज का मीडिया पहले जैसा नहीं रह गया है, सुबह तक जो समाचार पत्र हम तक पहुंचता है उसकी तमाम ख़बरें रात में ही इंटरनेट के ज़रिए पढ़ी जा चुकी होती हैं. सोशल मीडिया इनपुट के आधार पर ख़बरों की सुर्खियां बनती हैं.''

''इलैक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट से ज्यादा तेज़ है, यहां तुरंत ख़बरें आती हैं. अगले दिन वे ख़बरें अख़बारों में होंगी या नहीं ये तो उनके विवेक पर निर्भर करता है.''

अमिताभ आगे लिखते हैं, ''कुछ मीडिया हाउस मेरे तुरंत जवाब देने के तरीके की तारीफ़ करते हैं तो कुछ नहीं करते, मैं किसी के भी प्रति कोई पूर्वाग्रह नहीं बनाता...अगर मेरे ख़िलाफ़ आरोप हैं तो मैं उन्हें ठीक तरीके से सभी के सामने लाने की कोशिश करता हूं, कई बार मैं चुप भी रहता हूं...लेकिन क्या मीडिया के सवालों के जवाब देने से मामला सुलझ जाएगा, मुझे अंत में तो तमाम एजेंसियों के सामने भी जवाब देने ही होते हैं.''

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'मैं अब शांति चाहता हूं'

ब्लॉग के अंत में अमिताभ ने लिखा है कि उम्र के इस पड़ाव में आकर मैं शांति की तलाश कर रहा हूं.

वे लिखते हैं, ''अपने जीवन के बचे हुए कुछ अंतिम सालों को मैं अपने हिसाब से जीना चाहता हूं, मुझे किसी तरह के विशेषणों की ज़रूरत नहीं है, मुझे इनसे घृणा होने लगी है, मुझे सुर्खियों में रहने की लालसा नहीं, मैं इसके लायक नहीं हूं, ना ही मैं कहीं कोई पहचान बनाना चाहता हूं, मैं इसके योग्य भी नहीं हूं.

अमिताभ ने अपना ब्लॉग ट्विटर पर भी साझा किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है- ' I write because I write .. जी हां हुज़ूर मैं लिखता हूं !!'

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