#MeToo: ईरान में यौन शोषण के अनुभव साझा कर रहे लोग

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ईरान में यौन शोषण के बारे में लोग खुलकर बात नहीं करते हैं. ये एक ऐसा विषय है जो लोगों को असहज करता है.

लेकिन तेहरान के एक हाई स्कूल में दस से ज़्यादा स्कूली विद्यार्थियों की यौन शोषण की शिक़ायतें सामने आने के बाद इस पर काफ़ी चर्चा हो रही है.

इनका आरोप है कि एक संदिग्ध वयस्क छात्र ने उन्हें ज़बरन शराब पिलाई, उन्हें अश्लील वीडियो दिखाए और उन्हें यौन गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया.

इस मामले के चलते ईरान के लोग पूरी दुनिया में प्रचलित हुए #MeToo के साथ अपने अनुभवों और कहानियों को शेयर कर रहे हैं.

कुछ महीने पहले दुनिया भर में यौन शोषण के ख़िलाफ़ #MeToo नाम से एक ग्लोबल कैंपेन चलाया गया था.

लेकिन इस बार अंतर ये है कि ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली ख़मेनेई ने भी व्यक्तिगत रूप से अपराधी को दंडित किए जाने की अपील की है.

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लोगों में गुस्सा

कुछ लोगों का मानना है कि ख़मेनेई की यह प्रतिक्रिया एक पुराने मामले पर आई है जो ईरानी समाज के एक बड़े हिस्से में गुस्से का कारण बना था.

ये मामला पिछले साल का है. जब क़ुरान याद करके छात्रों को सुनाने वाले एक प्रमुख शिक्षक पर आरोप लगाया गया था कि वे बच्चों का यौन शोषण करते हैं.

हालांकि ख़मेनेई के क़रीबी बताये जाने वाले इस शिक्षक ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया था. फिर इसी साल जनवरी में उनके केस को बंद भी कर दिया गया.

इसे लेकर ईरान के लोगों ने अपना गुस्सा ज़ाहिर किया और कहा कि ये केस सिर्फ़ इसलिए बंद कर दिया गया क्योंकि आरोपी शिक्षक सर्वोच्च धार्मिक नेता के क़रीबी हैं.

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Image caption अयातुल्लाह अली ख़मेनेई

बहरहाल, ऐसा पहली बार नहीं है कि ईरान के लोगों ने #MeToo का इस्तेमाल किया हो. इससे पहले भी ईरान के लोगों ने इस्लामी पवित्र स्थलों और हज यात्राओं के दौरान होने वाले यौन उत्पीड़न पर जागरूकता बढ़ाने के लिए #MosqueMeToo का प्रयोग किया था.

एक पुरुष ने #MeToo लिखकर ट्वीट किया, 'मैं मिडिल स्कूल में था जब मेरे हेडमास्टर मुझे अपने घर ले गए और वहाँ ले जाकर मेरे साथ दुर्व्यवहार किया. मैं ये बात अपने पिता को बताने से डरता था. मेरे एक पड़ोसी ने भी अपनी कार में मेरा यौन शोषण किया. अब मुझे उस दर्द का अहसास होता है जो मैंने सहा.'

ट्विटर पर Sotvan_d हैंडल यूज़ करने वाले एक शख़्स ने माफ़ी मांगी और लिखा कि उन्हें दुख है कि उन्होंने किशोरावस्था में एक लड़की को ग़लत तरीके से छुआ था.

सामाजिक रूढ़ियाँ

एली ने ट्विटर पर लिखा है कि सात से सोलह साल की उम्र तक उनका लगातार यौन शोषण होता रहा. और ऐसा करने वाला उनके पेरेंट्स का एक क़रीबी ही था. एली को हमेशा लगता रहा कि वो उनकी ग़लती से हुआ इसलिए उन्होंने कभी इस बारे में किसी को बताया नहीं.

एली ने बताया कि ख़ुद से जुड़े उस डर के कारण वो अब अपनी बेटी से लगातार यौन शोषण के विषय पर बात करती हैं. वो चाहती हैं कि उनकी बेटी को ये विश्वास रहे कि उसके पेरेंट्स हमेशा उसके साथ हैं.

यौन शोषण के मामलों पर छिड़ी इस बहस में लोगों की एक राय ये भी है कि ईरान में सामाजिक रूढ़िवाद और यौन व्यवहार के बारे में कम जागरूकता की वजह से ऐसे हालात पैदा हुए हैं.

ईरान में सेक्स एजुकेशन स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है. यूनिवर्सिटी के स्तर से पहले इस विषय से छात्रों को दूर रखा जाता है और यूनिवर्सिटी में भी ये एक वैकल्पिक विषय है.

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ख़मेनेई की आलोचना

लगभग एक साल पहले ही ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली ख़मेनेई ने संयुक्त राष्ट्र के उन दिशानिर्देशों को ख़ारिज कर दिया था जिनमें सेक्स एजुकेशन को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही गई थी.

साथ ही ख़मेनेई ने ईरान की शिक्षा प्रणाली में शामिल अधिकारियों से कहा था कि ये दिशानिर्देश ईरान को पश्चिमी देशों की तरह बनाने का एक प्रयास हैं. इससे समाज में अत्याचार बढ़ेगा और इस्लाम से संबंधित मूल्यों पर ख़तरा मंडराने लगेगा.

सोशल मीडिया पर ख़मेनेई के इन फ़ैसलों की भी आलोचना हो रही है. लोगों का कहना है कि ख़मेनेई के इन फ़ैसलों से बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण के और भी अधिक मामले सामने आयेंगे.

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