कोका-कोला का वो इतिहास, जिसे राहुल गांधी नहीं जानते

  • 11 जून 2018
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कोका-कोला कपंनी का 'नया इतिहास' बताया है.

दिल्ली के एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने सोमवार को कहा, "आप मुझे बताओ कि कोका-कोला कंपनी को किसने शुरू किया? कौन था ये? कोई जानता है? मैं आपको बताता हूं कि कौन थे? कोका-कोला कंपनी को शुरू करने वाला एक शिकंजी बेचने वाला व्यक्ति था. वो अमरीका में शिकंजी बेचता था. पानी में चीनी मिलाता था. उसके अनुभव, हुनर का आदर हुआ. पैसा मिला और कोका-कोला कंपनी बनी. मैकडॉनल्ड कंपनी को किसने शुरू किया? कोई बता सकता है. वो ढाबा चलाता था. आप मुझे हिंदुस्तान में वो ढाबावाला दिखा दो, जिसने कोका-कोला कंपनी बना दी हो. कहां है वो?"

राहुल गांधी के इस बयान की सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है. वजह है राहुल गांधी का कोका-कोला कंपनी का बताया ग़लत इतिहास और अपने बयान में कोका-कोला और मैकडॉनल्ड को मिक्स करना.

दरअसल, कोका-कोला कंपनी को किसी शिकंजी बेचने वाले शख़्स ने नहीं, बल्कि अटलांटा के एक फार्मिस्ट जॉन पेम्बर्टन ने शुरू किया था.

आइए पहले आपको बताते हैं कि कैसे शुरू हुई थी कोका-कोला कंपनी.

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कब और कैसे शुरू हुई कोका-कोला?

कोका-कोला कंपनी में उत्पादन 1886 में शुरू हुआ था. कोका-कोला की वेबसाइट के मुताबिक़, एक दोपहर फार्मिस्ट जॉन पेम्बर्टन ने अपनी लैब में एक तरल पदार्थ तैयार किया. इस पदार्थ को वो जैकब फार्मेसी के बाहर लेकर आए.

इस पदार्थ में सोडे वाला पानी मिला हुआ था. जॉन पेम्बर्टन ने वहां खड़े कुछ लोगों को इसे चखवाया. सबने इस नई ड्रिंक को पसंद किया. इस ड्रिंक के एक गिलास को पांच सेंट की दर से बेचना तय हुआ.

पेम्बर्टन के बही-खाते का हिसाब रखने वाले फ्रैंक रॉबिनसन ने इस मिक्सचर को कोका-कोला नाम दिया. तब से लेकर आज तक ये 132 साल पुराना मिक्सचर कोका-कोला के नाम से ही जाना जाता है. रॉबिनसन का मानना था कि नाम में दो 'C' होने से कंपनी को फायदा होगा.

कोका-कोला बनने के पहले साल में रोज़़ इसके सिर्फ़ नौ गिलास ही बिक पाते थे. लेकिन आज दुनिया भर में कोका-कोला की क़रीब दो अरब बोतलें रोज़ बिकती हैं.

दुनिया में सिर्फ़ दो देशों में कोका-कोला नहीं ख़रीदी जा सकती हैं. ये दो देश हैं- क्यूबा और उत्तर कोरिया. ऐसा अमरीकी प्रतिबंध की वजह से हुआ है. हालांकि ऐसी भी मीडिया रिपोर्ट्स हैं, जिसमें ये दावा किया गया कि उत्तर कोरिया में चोरी छिपे ये ड्रिंक बेची गई है.

जब विश्वयुद्ध में काम आई कोका-कोला

1900 के दशक से कंपनी ने एशिया और यूरोप में बॉटलिंग का काम शुरू किया था.

2012 में बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, कोका-कोला कंपनी को दूसरे विश्व युद्ध की वजह से काफी फ़ायदा मिला, जब विदेशों में मौजूद अमरीकी सैनिकों को कोका-कोला मुहैया कराई गई.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान दुनिया भर में कोका-कोला के 60 मिलिट्री बॉटलिंग प्लांट थे. इसका फायदा स्थानीय लोगों को भी मिला.

माना जाता था कि यूरोप में सहयोगी सेना के सुप्रीम कमांडर ड्विट आइज़नहॉवर कोका-कोला के बड़े फैन थे और उन्होंने ये पक्का किया कि उत्तरी अफ़्रीका में ये उपलब्ध रहे.

'अ हिस्ट्री ऑफ़ द वर्ल्ड इन सिक्स ग्लासेज' के लेखक टॉम स्टैंडेज का कहना है कि कोका-कोला अमरीकी देशभक्ति से प्रभावशाली तरीक़े से जुड़ गया. युद्ध के दौरान इसे इतना अहम माना गया कि इसे चीनी की राशनिंग तक से छूट दे दी गई.

कब, कहां हुआ कोका-कोला का विरोध?

कोका-कोला को कई देशों में विरोध का भी सामना करना पड़ा. इसमें वो अफ़वाहें भी शामिल रहीं, जिसमें कोका-कोला को सेहत के लिए हानिकारक बताया गया.

सबसे पहले फ्रांस ने 1950 के दशक में इसे 'कोका कोलोनाइज़ेशन' का नाम दिया गया. कोका-कोला के ट्रक पलट दिए गए और बोतलें तो़ड़ दी गईं.

2012 में बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक़, स्टैंडेज ने बताया- "प्रदर्शनकारी कोका-कोला को फ्रांसीसी समाज के लिए ख़तरा मानने लगे थे."

स्टैंडेज ने कहा, "सोवियत संघ में इसकी मार्केटिंग इसलिए नहीं की गई, क्योंकि ऐसी आशंका थी कि कहीं इसका लाभ कम्युनिस्ट सरकार की तिजोरी में न चला जाए."

इस कमी को पेप्सी ने पूरा किया और यहाँ इसकी ख़ूब बिक्री हुई.

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साल 1989 में जब बर्लिन की दीवार गिरी, तो पूर्वी जर्मनी में रहने वाले कई लोग भर-भर कर कोका-कोला लेकर आए. स्टैंडेज कहते हैं, "कोका-कोला पीना आज़ादी का प्रतीक बन गया."

सोवियत संघ के अलावा जिन क्षेत्रों में कोका-कोला को संघर्ष करना पड़ा, वो था मध्य-पूर्व. यहाँ अरब लीग ने इसका बहिष्कार कर रखा था, क्योंकि इसराइल में इसकी बिक्री होती थी.

इस वजह से मध्य-पूर्व में पेप्सी की ख़ूब बिक्री हुई. मध्य-पूर्व में इस ड्रिंक के कई स्थानीय रूप भी सामने आए.

साल 2003 में इराक़ पर अमरीकी कार्रवाई के विरोध में थाईलैंड में लोगों ने सड़कों पर कोका-कोला बहाया और वहाँ कुछ वक़्त के लिए उसकी बिक्री भी रोक दी गई.

ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने भी कोका-कोला पर पाबंदी लगाने की धमकी दी थी. वहीं एक वक़्त ऐसा भी रहा, जब वेनेज़ुएला के ह्यूगो चावेज़ ने लोगों से अपील की थी कि वे कोका-कोला और पेप्सी की बजाय स्थानीय तौर पर बने फलों का रस पिएँ.

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राहुल गांधी के बयान पर लोगों की चुटकी...

ऐसे में राहुल गांधी के कोका-कोला कंपनी के ज्ञान पर लोगों ने सोशल मीडिया पर चुटकियां लेना शुरू कर दिया है.

ट्विटर पर #AccordingToRahulGandhi यानी 'राहुल गांधी के मुताबिक़' टॉप ट्रेंड है. लोग तंज कसते हुए राहुल गांधी के हवाले से तस्वीरों के अजब-ग़ज़ब कैप्शन दे रहे हैं.

एथीस्ट कृष्णा नाम के यूज़र ने बीटल्स के कोका-कोला पीते हुए की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- बीटल्स शिकंजी पीते हुए.

द लाइंग लामा नाम के यूज़र ने सैफ अली ख़ान और उनके हमशक्ल की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- मशहूर एक्टर बनने से पहले सैफ़ ने अपने करियर की शुरुआत पेट्रोल पंप से की थी.

एक ट्विटर यूज़र ने जॉनी लीवर की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- राहुल गांधी के मुताबिक, ये ग्राहम बेल हैं.

'और ये रही फरारी की सवारी.'

'जब वी मेट' फ़िल्म में होटल का एक मशहूर सीन है. इस सीन में नज़र आ रहे कलाकार की तस्वीर शेयर करते हुए डीके नाम के यूज़र ने लिखा- ये ओयो रुम्स के मालिक हैं.

अंकुर ने नेहरू की मसनत पकड़े हुए तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा- राहुल के मुताबिक, नेहरू जी चांद पर पहला रॉकेट भेजते हुए.

एक पैरोडी अकाउंड ने राहुल के हवाले से कोका-कोला कंपनी के 'मालिक' की तस्वीर भी शेयर कर दी.

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