सोशल: अब 'जाति का ज़हर' उड़न परी हिमा दास पर

  • 17 जुलाई 2018
हिमा दास, HIMA DAS इमेज कॉपीरइट AFP

धान के खेतों से चलकर अंतरराष्ट्रीय मैदान पर फ़र्राटे सी दौड़ने वाली एथलीट हिमा दास का नाम आज ज़्यादातर लोग जानते हैं.

51.46 सेकेंड में आईएएएफ़ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ पूरी कर गोल्ड मेडल जीतना. ये वो कारनामा था, जिसके बाद पूरी दुनिया ने भारत की 'उड़न परी' हिमा दास के बारे में जाना. लेकिन कुछ लोगों के मन में एक सवाल रह गया. सवाल कि हिमा दास की जाति क्या है?

हिमा के जीतने के बाद से गूगल पर ऐसे लोगों की तादाद में इजाफ़ा हुआ, जो हिमा दास की जाति जानना चाहते हैं. ऐसा 2016 ओलंपिक्स के दौरान भी हुआ था, जब पीवी सिंधु मैदान पर बैडमिंटन खेल रही थीं, तब लोग सिंधु की जाति जानना चाह रहे थे.

गूगल पर 12 जुलाई के बाद से अगर गूगल ट्रेंड्स पर नज़र दौड़ाएं तो भारत में लोग हिमा की जाति जानना चाह रहे हैं. अगर आप गूगल पर हिमा लिखते हैं तो पहला सुझाव 'जाति' मिलता है.

12 से 17 जुलाई के गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक, हिमा की जाति जानने में सबसे ज़्यादा दिलचस्पी केरल, कर्नाटक के लोगों की है. हालांकि इस ख़बर को लिखे जाने से कुछ घंटे पहले तक असम और अरुणाचल प्रदेश के लोग हिमा की जाति के बारे में जानना चाह रहे थे.

हमने बीबीसी हिंदी के पाठकों से कहासुनी में यही सवाल पूछा, ''गूगल पर हिमा दास की जाति क्यों खोज रहे हैं लोग?'' इस सवाल पर हमें कई दिलचस्प प्रतिक्रियाएं मिलीं. हम आपको कुछ चुनिंदा कमेंट्स पढ़वा रहे हैं.

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सोशल मीडिया पर हिमा दास की जाति

बीबीसी के इंस्टाग्राम अकाउंट की पोस्ट पर अमित कुमार लिखते हैं, ''ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि एक दूसरे को ताना मार सकें. या फिर जाति के हिसाब से प्रतिक्रिया दे सकें''

इंस्टाग्राम पर ही चमन भल्ला लिखते हैं, ''हिमा भारतीय हैं. उनका धर्म हिंदुस्तानी है. अगर हम अपने आपको हिंदुस्तानी कहें तो ये जाति का पूरा सिस्टम ही ख़त्म हो जाएगा.''

फ़ेसबुक पर सुभाष चंद्रा लिखते हैं, ''क्योंकि इन लोगों को अब भी जातिवाद की भयंकर बीमारी है.''

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सुधा कुमारी लिखती हैं, ''सुपरस्टार की न कोई जाति होती है न कोई धर्म होता है. ऐसे लोगों के पास बस काबिलियत होती है.''

सन्नी लिखते हैं, ''सब लोगों को जाति दिख रही है. कोई काबिलियत देखना ही नहीं चाहता.''

ट्विटर पर पुष्पक ने लिखा, ''सच कभी नहीं छिप सकता. जातिवाद इस देश के रग-रह में ज़हर की तरह फैला हुआ है.''

सुनील दुबे लिखते हैं, ''जो लोग हिमा दास की जाति की पहचान के लिए बेचैन हैं. उनकी सार्वजनिक रूप से निंदा करनी बेहद ज़रूरी है.''

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इतिहास रचने वाली हिमा के लिए कितना मुश्किल रहा ये सफ़र?

भारत की नई 'उड़न परी' हिमा दास की ख़ास बातें

हिमा दास 18 साल की हैं. अप्रैल में गोल्ड कोस्ट में खेले गए कॉमनवेल्थ खेलों की 400 मीटर की स्पर्धा में हिमा दास छठे स्थान पर रही थीं. इस टूर्नामेंट में उन्होंने 51.32 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी.

इसी कॉमनवेल्थ खेलों की 4X400 मीटर स्पर्धा में उन्होंने 7वां स्थान हासिल किया था.

गुवाहाटी में हुई अंतरराज्यीय चैंपियनशिप में भी हिमा ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था.

हिमा दास की जीत के बाद उनके कोच निपुण दास ने बीबीसी संवाददाता नवीन नेगी से ख़ास बातचीत में कहा था, ''मुझे यक़ीन था कि हिमा फ़िनलैंड में कुछ बड़ा करके आएगी, लेकिन वह गोल्ड जीत लेगी इसका अंदाज़ा रेस शुरू होने से पहले तक नहीं था.''

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