दादी-पोती की वायरल तस्वीर का पूरा सच

  • 22 अगस्त 2018
दादी-पोती इमेज कॉपीरइट Kalpit/Pavan Jaishwal, BBC

कहते हैं एक तस्वीर, हज़ार शब्दों से ज़्यादा कहानी बयान कर जाती है. एक ऐसी ही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई. इस तस्वीर को शेयर कर रहे लोगों ने इसके साथ लिखी बात को भी वायरल कर दिया है.

पोस्ट की गई तस्वीर के साथ लिखा जा रहा है, ''एक स्कूल ने अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए वृद्धाश्रम का टूर आयोजित किया. और इस लड़की ने अपनी दादी को वहां देखा.''

''दरअसल, जब इस बच्ची ने अपने माता-पिता से दादी के बारे में पूछा था तो उसे बताया गया था कि वो अपने रिश्तेदार के यहां रहने गई हैं. ये किस तरह का समाज बना रहे हैं हम?''

बीबीसी गुजराती ने वर्ल्ड फ़ोटोग्राफ़ी डे पर ये तस्वीर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर डाली थी और ये भी लिखा था कि कल्पित भचेच की खींची ये तस्वीर अब की नहीं, बल्कि 11 साल पुरानी है.

देखते-देखते ये तस्वीर और संदेश वायरल हो गई. आम लोगों के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और क्रिकेटर हरभजन सिंह जैसे जाने-माने लोग भी अपने फ़ेसबुक और टि्वटर पर इसे साझा करने लगे.

लेकिन क्या ये तस्वीर और साथ लिखी बात सच है? क्या ये तस्वीर हाल की है? इन सभी सवालों के जवाब बीबीसी ने खोज लिए हैं.

इमेज कॉपीरइट KALPIT S BHACHECH

क्या है सच

दरअसल, ये तस्वीर हाल की नहीं बल्कि 11 साल पुरानी साल 2007 की है. जगह का नाम है अहमदाबाद के घोड़ासर में स्थित वृद्धाश्रम.

बीबीसी ने इस तस्वीर में नज़र आ रही दादी दमयंती और पोती भक्ति से अहमदाबाद के उसी वृद्धाश्रम में जाकर बातचीत की.

भक्ति ने बीबीसी संवाददाता तेजस से ख़ास बातचीत में कहा, ''मैं यह कहना चाहूंगी कि मेरी दादी अपनी मर्ज़ी से वृद्धाश्रम में रह रही हैं और उन्हें किसी ने यहां भेजा नहीं था. मुझे पता नहीं था कि वो कहां होंगी, ये पता था कि वो जा रही हैं, लेकिन किस वृद्धाश्रम में होंगी, ये नहीं पता था.''

भक्ति ने 11 साल पुराने वाकये को याद करते हुए बताया, ''मैं भावुक थी और रोने लगी. दादी से मेरी बॉन्डिंग बहुत थी और अब भी है, माता-पिता से ज़्यादा मैं उन्हें प्यार करती हूं.''

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं कि दादी को अब घर क्यों नहीं ले जा सकते, इस पर उन्होंने कहा, ''अब घर ले जाने का मतलब नहीं है क्योंकि उन्हें यहां रहना अच्छा लगता है. यहां उनकी एक फ़ैमिली-सी बन गई है.''

''वो यहां खुश हैं और हम हर रोज़ बात करते हैं. मेरे माता-पिता के घर भी जाती हैं दादी. लोग मेरे पापा के बारे में ग़लत अनुमान लगा रहे हैं, ऐसा नहीं है. ऐसा होता तो मैं उनसे रिश्ता नहीं रखतीं.''

इमेज कॉपीरइट Pavan Jaishwal, BBC
Image caption दादी-पोती की पुरानी तस्वीर खींचने वाले फ़ोटोग्राफ़र कल्पित

''मुझे नहीं पता था कि वो अचानक मिल जाएंगी''

12 सितंबर, साल 2007 को याद करते हुए उन्होंने कहा, ''मैं स्कूल से आई थी. ग्रैंडपैरेंट्स डे था उस दिन. मुझे नहीं पता था कि वो अचानक मिल जाएंगी. वो जाने वाली थीं ये पता था, लेकिन ये नहीं पता था कि कहां मिलेंगी. वो नहीं चाहती थीं कि हमें पता लगे कि वो कहां हैं. हम दोनों इमोशनल थे, इसलिए रोने लगे.''

11 साल बाद फ़ोटो वायरल होने के बारे में भक्ति ने कहा, ''संवेदनाएं बहुत अच्छी हैं. लेकिन मेरे पैरेंटस के लिए जो लिखा जा रहा है, वो अच्छा नहीं है. कई ऐसे लोग हैं जो अपनी मर्ज़ी से वृद्धाश्रम में रहते हैं. उन्हें कोई छोड़कर नहीं जाता. मेरी दादी भी ऐसी ही हैं.''

दादी दमंयती बेन का भी कुछ यही कहना है. उन्होंने कहा, ''मैं अपनी मर्ज़ी से यहां रह रही हूं. हमारे बीच कोई नफ़रत नहीं थी. ऐसा नहीं था कि मुझे घर से निकाल दिया गया था. मैं शांति से रहना चाहती थी, इसलिए यहां आईं.''

''मैं घर जाती हूं, घरवाले यहां आते हैं. भगवान का नाम लेती हूं. शांति से यहां रहती हूं. कोई दूसरी बात नहीं है. मेरा लड़का रोज़ मुझसे बात करता है. तबीयत पूछता है. बहू भी अच्छी है. नाश्ता लेकर आती है. जब साथ रहती थी और जो लगाव तब था, वही आज भी है.''

लेकिन ये तस्वीर खींचने वाले कल्पित भचेच का कहना है कि 11 साल पुरानी तस्वीर फिर वायरल होने की वजह सोशल मीडिया है. लेकिन उस दिन क्या हुआ था जब ये तस्वीर खींची गई थी. ये ख़ुद गुजरात के वरिष्ठ फ़ोटो पत्रकार कल्पित भचेच ने बताया. आप भी पढ़िए:

''पत्रकारिता में किस-किस तरह के संयोग बन जाते हैं, ये कहानी इसी के बारे में है.

वो दिन 12 सितंबर, 2007 था. मेरे जन्मदिन से एक दिन पहले. मैं सवेरे नौ बजे घर से निकला. उस दिन पत्नी ने बोला था कि रात को समय से घर आ जाना क्योंकि कल आपका जन्मदिन है और रात 12 बजे केक काटेंगे.

मैं काफ़ी खुश होकर घर से निकला. कुछ ही देर में मेरे मोबाइल पर अहमदाबाद के मणिनगर के जीएनसी स्कूल से कॉल आया

कॉल स्कूल की प्रिंसिपल रीटा बहन पंड्या का था. उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों के साथ वो लोग वृद्धाश्रम जा रहे हैं, और क्या मैं इस दौरे को कवर करने के लिए आ सकता हूं.

मैं तैयार हो गया और वहां से घोड़ासर के मणिलाल गांधी वृद्धाश्रम पहुंचा.

वहां एक तरफ़ बच्चे बैठे थे और दूसरी तरफ़ वृद्ध लोग थे. मैंने आग्रह किया कि बच्चों और वृद्धों को साथ-साथ बैठा दिया जाए ताकि मैं अच्छी तस्वीरें ले सकूं.

इमेज कॉपीरइट KALPIT S BHACHECH

'मर्ज़ी से रह रही हूं'

जैसे ही बच्चे खड़े हुए, एक स्कूली बच्ची वहां मौजूद एक वृद्ध महिला की तरफ़ देख़कर फूट-फूट कर रोने लगी.

हैरानी की बात ये थी कि सामने बैठी वृद्धा भी उस बच्ची को देखकर रोने लगी और तभी बच्ची दौड़कर वृद्ध महिला के गले लग गई और ये देखकर वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए.

मैंने उसी वक़्त ये तस्वीर अपने कैमरे में कैद कर ली और फिर जाकर महिला से पूछा तो रोते हुए उन्होंने जवाब दिया कि वो दोनों दादी-पोती हैं.

बच्ची ने भी रोते हुए बताया कि ये महिला उसकी बा हैं. गुजराती में दादी को बा बोला जाता है. बच्ची ने ये भी बताया कि दादी के बिना उसकी ज़िंदगी काफ़ी सूनी हो गई थी.

ये भी बताया कि बच्ची के पिता ने उसे बताया था कि उसकी दादी रिश्तेदारों से मिलने गई है, लेकिन जब वो वृद्धाश्रम पहुंची तो पता चला कि असल में दादी कहां गई थीं.

दादी और पोती का वो मिलन देखकर मेरे साथ खड़े और लोगों की आंखें भी नम हो गईं. उस माहौल को हल्का बनाने के लिए कुछ बच्चों ने भजन गाना शुरू किया.

इमेज कॉपीरइट KALPIT S BHACHECH

ये फ़ोटो अगले दिन दिव्य भास्कर अख़बार के पहले पन्ने पर छपी थी और उस वक़्त पूरे गुजरात में इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई थी. इस तस्वीर ने कई लोगों को हिलाकर रख दिया.

मेरे तीस साल के करियर में पहली बार ऐसा हुआ कि मेरी कोई तस्वीर अख़बार में छपने के दिन मुझे एक हज़ार से ज़्यादा लोगों ने फ़ोन किए. उस समय पूरे राज्य में इसी तस्वीर पर चर्चा हो रही थी.

लेकिन जब दूसरे दिन मैं दूसरे मीडियाकर्मियों के साथ इस वृद्ध महिला का इंटरव्यू लेने पहुंचा तो उन्होंने कहा कि वो अपनी मर्ज़ी से वृद्धाश्रम आई हैं और मर्ज़ी से वहां रह रही हैं.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे

संबंधित समाचार