सोशल: शादी से पहले लड़की प्रेग्नेंट तो चरित्रहीन, फिर मर्द क्या?

  • 30 अगस्त 2018
नेहा धूपिया और अंगद बेदी इमेज कॉपीरइट nehadhupia/ Instagram

सात मई को हुई सोनम कपूर की 'बिग फ़ैट' पंजाबी वेडिंग का ख़ुमार अभी उतरा भी नहीं था कि उसके दो दिन बाद ही जब नेहा धूपिया ने इंस्टाग्राम पर अंगद बेदी के साथ शादी की फ़ोटो शेयर की तो ज़्यादातर लोगों को पहली बार में यक़ीन ही नहीं हुआ.

सेलिब्रेटी की शादी और वो भी इतने शांत और सरल तरीक़े से.

सोनम कपूर की धूम-धड़ाके वाली शादी से इतर 10 मई 2018 को हुई नेहा और अंगद की शादी बेहद शांत माहौल में हुई.

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Image caption सोनम कपूर और आनंद आहूजा ने सिख रीति-रिवाज़ से 7 मई को शादी की थी

अब 25 अगस्त को नेहा ने इंस्टाग्राम पर अपनी प्रेग्नेंसी की फ़ोटो डालकर सबको एक बार फिर चौंका दिया है.

नेहा ने इंस्टाग्राम पर प्रेग्नेंसी की फोटो शेयर करते हुए लिखा "एक नई शुरुआत... #हमतीन"

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एक ओर जहां नेहा और उनके पति को नई ज़िंदगी के लिए बधाइयां देने वालों की कमी नहीं है, वहीं कई लोगों का कहना है कि वो शादी से पहले ही प्रेग्नेंट थीं और इतनी जल्दबाज़ी में शादी भी इसीलिए की.

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लोगों की राय

the_uniquian नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से उनकी तस्वीर पर कमेंट किया गया है कि 'ये कैसे संभव हो सकता है...अभी कुछ दिन पहले ही तो आपकी शादी हुई थी.'

bikashpattnaikk अकाउंट से लिखा गया है कि शादी से पहले प्रेग्नेंसी, सभ्यता के लिहाज़ से न तो सही है और न ही स्वीकार्य है. ये सिर्फ़ नेहा की बात नहीं है, ये सभी के लिए है.

jesyma.n लिखते हैं कि वो पहले से ही प्रेग्नेंट थीं...शायद यही वजह थी कि उन्होंने शादी करने का फ़ैसला लिया.

बीबीसी ने अपने पाठकों से जानना चाहा कि वे शादी से पहले प्रेग्नेंसी के बारे में क्या सोचते हैं?

जिसके जवाब में काफी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं.

पारुल गुप्ता के मुताबिक़ कोई लड़की शादी से पहले मां बन रही है या फिर शादी के बाद, इससे ज़्यादा ये मायने रखता है कि उसे ज़िम्मेदारी उठानी आनी चाहिए.

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हालांकि पारुल को इस बात से आपत्ति भी है कि ये सवाल सिर्फ़ महिलाओं से ही क्यों पूछा जाता है जबकि भागीदारी तो पुरुष की भी होती है. और पुरुषों से भी वो सारे सवाल पूछे जाने चाहिए जो एक औरत से पूछे जाते हैं.

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ज़्यादातर लोगों ने शादी से पहले प्रेग्नेंसी को समाज, संस्कार और संस्कृति के विरुद्ध बताया है पर बहुत से लोग ये भी मानते हैं कि ये निजी पसंद-नापसंद का मामला है.

आफ़ताब आलम लिखते हैं कि ज़िम्मेदारी तो दोनों की होनी चाहिए लेकिन अगर ये चलन बढ़ता है तो समाज के लिए अच्छा नहीं होगा. शादी बेईमानी हो जाएगी.

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'ये पाप है'

हालांक अविनाश चुग इससे इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते हैं. उनका मानना है कि ये पाप है और कुछ लोग इन बातों को आज़ादी से जोड़कर माहौल को बिगाड़ रहे हैं. शादी जैसे संस्कार को दकियानूसी बताकर दुष्प्रचार किया जा रहा है और समाज ग़लत रास्ते पर है.

हालांकि जिन भी लोगों ने इसे ग़लत ठहराया है, उनमें से अधिकतर लोगों का यही कहना है कि ये समाज के बनाए नियमों से बिल्कुल विपरीत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.

लेकिन ऐसा कहने वालों में सिर्फ़ पुरुष हों ऐसा नहीं है. बहुत सी महिलाएं भी मानती हैं कि लड़की का शादी से पहले प्रेग्नेंट होना ग़लत है.

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जूही मिश्रा मानती हैं कि ये पूरी तरह ग़लत है. किसी भी लड़की को सबसे पहले अपने करियर पर ध्यान देना चाहिए और उसके बाद कहीं शादी, बच्चे के बारे में सोचना चाहिए. शादी से पहले मां बनना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के बराबर है.

कमेंट करने वालों में कुछ ऐसे भी हैं जो ये मानते हैं कि ये पाश्चात्य सोच है और इस पर अमल करना भारतीय सभ्यता को झुठलाने जैसा है.

बहस का मुद्दा

हालांकि एक बड़ा वर्ग ये भी मानता है कि ये एक बहस का मुद्दा है और इस पर एक या दो लाइन में फ़ैसला नहीं सुनाया जा सकता है.

पर औरत को चरित्रहीन कहने वालों की भी कमी नहीं है.

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मुकेश इंस्टाग्राम पर लिखते हैं शादी एक जिम्मेदारी है और जो जिम्मेदारी नहीं उठा सकता उसे बच्चे पैदा करने का कोई हक नहीं है.

लोगों के विचारों में काफी अंतर है लेकिन एक बड़ा वर्ग है जो ये मानता है कि शादी के पहले प्रेग्नेंट होना ग़लत है.

महिला मुद्दों पर काम करने वालों की राय

हालांकि बेवसाइट फ़ेमिनिज़्म इन इंडिया की एडिटर जपलीन पसरीचा का मानना है कि लोगों की ऐसी सोच कहीं न कहीं ये दिखाती है कि आज भी लोग लड़कियों की सेक्शुएलिटी को कंट्रोल करने में लगे हुए हैं.

जपलीन कहती हैं कि उन्होंने नेहा धूपिया की तस्वीर तो नहीं देखी है और न ही कमेंट पढ़े हैं. लेकिन आज भी एक लड़की अगर शादी से पहले प्रेग्नेंट हो जाती है तो लोगों को ये सही नहीं लगता. आज भी समाज सोचता है कि एक औरत की सेक्शुएलिटी तय करना उनकी ज़िम्मेदारी है और वो ही ये तय करेंगे.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में वूमन स्टडीज़ की असोसिएट प्रोफ़ेसर फिरदौस अज़मत सिद्दिक़ी मानती हैं कि हमारे समाज में शादी के पहले अगर कोई महिला प्रेग्नेंट हो जाए तो समाज उसे स्वीकार नहीं करता है.

"वो कहती हैं कि शादी नाम की संस्था ही वंश वृद्धि के लिए बनाई गई है. ऐसे में जब कोई महिला शादी से पहले प्रेग्नेंट हो जाती है तो समाज उसे स्वीकार नहीं कर पाता है. "

हालांकि फिरदौस मानती हैं कि ये पूरी तरह महिला पर निर्भर होना चाहिए कि वो कब मां बनना चाहती है लेकिन वो इस बात से भी इनकार नहीं करती हैं कि अगर कोई औरत शादी के पहले प्रेग्नेंट हो जाए तो लोग पुरुष को कुछ नहीं कहते जबकि सारे इल्ज़ाम महिला पर ही थोप दिए जाते हैं. जो ग़लत है.

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