#MeToo: सामने आने लगीं भारतीय मीडिया में यौन दुर्व्यवहार की कहानियां

  • 6 अक्तूबर 2018
हाथ जिस पर #MeToo हैशटैग लिखा है

महिलाओं के लिए किसी भी कार्यक्षेत्र में ख़ुद को साबित करना अक्सर बेहद मुश्किल हो जाता है. काम की चुनौतियों के अलावा उन्हें कई बार कार्य स्थल पर यौन दुर्व्यवहार का भी सामना करना पड़ता है.

इस मामले में मीडिया की दुनिया भी अछूती नहीं है. मीडिया की दुनिया बाहर से जितनी चकाचौंध भरी हुई नज़र आती है इसके भीतर गहराई तक उतरने में उतने ही अंधियारे गलियारे भी नज़र आते हैं.

आए दिन छोटे-बड़े मीडिया हाउस में किसी न किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार की बातें गुपचुप चर्चाओं में शामिल पाई जाती हैं. लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि गुपचुप चर्चाओं में शामिल होने वाली ये बातें अब खुलकर सामने रखी जा रही हैं और खुद महिलाएं ही इन मामलों को उजागर कर रही हैं.

पत्रकारिता से जुड़ी बहुत सी महिलाओं ने अपने साथ कार्यक्षेत्र में हुए यौन दुर्व्यवहार के बारे में सोशल मीडिया पर खुलकर लिखना शुरू कर दिया है. इनमें बहुत सी महिलाएं देश के जाने-माने मीडिया संस्थानों का हिस्सा रह चुकी हैं या अभी भी हैं.

जिन पुरुषों पर आरोप लगाए जा रहे हैं वे भी मीडिया और पत्रकारिता जगत के जाने-माने चेहरे हैं. इसे भारत में #MeToo मोमेंट की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है.

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चैट के स्क्रीनशॉट

कुछ दिन पहले बॉलीवुड अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर पर फिल्म की शूटिंग के दौरान छेड़छाड़ करने के आरोप लगाए थे. इसके बाद कई अन्य महिलाओं ने भी सिलसिलेवार तरीके से अपने साथ हुई यौन शोषण की घटनाओं का ज़िक्र करना शुरू कर दिया.

महिलाएं अपने साथ कार्यस्थल में हुए यौन दुर्व्यवहार पर मुखर होकर सामने आ रही हैं. वे सोशल मीडिया के ज़रिए उन घटनाओं का ज़िक्र कर रही हैं और दुर्व्यवहार में शामिल रहे पुरुषों के नाम ज़ाहिर कर रही हैं.

मीडिया से जुड़ी बहुत सी महिलाओं ने इस मामले पर ट्वीट किए हैं और अपने साथ यौन दुर्व्यवहार करने वाले पुरुषों की चैट के स्क्रीनशॉट्स सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं.

इस पूरे सिलसिले की शुरुआत दरअसल कॉमेडियन उत्सव चक्रवर्ती पर एक महिला के द्वारा लगाए गए आरोपों से हुई.

इस महिला ने गुरुवार को ट्वीट कर उत्सव पर आरोप लगाए कि उत्सव ने उन्हें अपनी न्यूड तस्वीरें भेजने की बात कही थी साथ ही अपने जननांग की तस्वीर भी उन्हें भेजी थी.

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Image caption उत्सव चक्रवर्ती

इसके बाद और भी कई महिलाएं अपनी-अपनी आपबीती सोशल मीडिया पर ज़ाहिर करने लगी.

महिला पत्रकार संध्या मेनन ने ट्वीट कर के.आर श्नीनिवासन पर आरोप लगाए हैं, ''मौजूदा वक़्त में टाइम्स ऑफ़ इंडिया के हैदराबाद में रेज़िडेंट एडिटर ने एक बार मुझे घर छोड़ने की पेशकश की थी, यह साल 2008 की घटना है जब बेंगलुरु में अख़बार के एक संस्करण के लॉन्च के लिए पहुंचे थे और मेरे लिए वह शहर तब नया था.''

इसके जवाब में के.आर श्रीनिवास ने लिखा है, "टाइम्स ऑफ़ इंडिया की सेक्सुअल हरासमेंट कमिटी ने इसकी जांच शुरू कर दी है और एक वरिष्ठ महिला के नेतृत्व वाली मज़बूत कमिटी इसकी जांच कर रही है. मैं इस जांच में पूरा सहयोग कर रहा हूं."

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Image caption के आर श्रीनिवास का जवाबी ट्वीट

कई बड़े लोगों पर आरोप

सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह ने महिलाओं के यूं मुखर होने की तारीफ़ की है और ट्वीट किया है, "मैं मीडिया की उन महिलाओं को सलाम करती हूं जो अपने साथ हुए यौन शोषण के अनुभवों को लेकर मुखर हुई हैं. न्यायपालिका में भी ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो इस तरह के मामलों से लड़ रही हैं. आप सभी को मेरा समर्थन है."

इसी तरह कुछ समय पहले तक हफ़िंगटन पोस्ट में काम करने वाले अनुराग वर्मा पर भी बहुत सी महिलाओं ने आपत्तिजनक मेसेज भेजने के आरोप लगाए. महिलाओं ने लिखा कि अनुराग उन्हें स्नैपचैट पर ऐसे मेसेज भेजते थे.

इसकी सफाई में अनुराग ने माफ़ी मांगते हुए ट्वीट किया है कि उन्होंने वो तमाम मेसेज मज़ाकिया लहज़े में भेजे थे.

अनुराग ने लिखा है कि उन्हें इस बात का अंदेशा नहीं था कि इससे किसी की भावनाएं आहत हो जाएंगी. उन्होंने यह भी माना है कि उन्होंने कुछ महिलाओं को उनकी न्यूड तस्वीरें भेजने के मेसेज भेजे थे.

इस संबंध में हफ़िंगटन पोस्ट ने भी अपनी तरफ़ से एक बयान जारी किया है. इस बयान में लिखा गया है कि उनके दो पूर्व कर्मचारी अनुराग वर्मा और उत्सव चक्रवर्ती पर बहुत सी महिलाओं ने यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं.

वेबसाइट लिखती है, ''हम इस तरह के कृत्य को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराते. चक्रवर्ती ने तीन साल पहले हफ़िंगटन पोस्ट छोड़ दिया था जबकि अनुराग वर्मा ने अक्टूबर 2017 में हफ़िंगटन पोस्ट छोड़ा. जब तक ये दोनों हमारे साथ काम कर रहे थे तब तक हमें इन पर लगाए गए आरोपों के बारे में कुछ पता नहीं था. हम इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या यहां काम करते हुए भी इन पर इस तरह के कोई आरोप लगे थे."

क्या है #MeToo

#MeToo या 'मैं भी' दरअसल यौन उत्पीड़न और यौन हमलों के ख़िलाफ़ चल रहा एक बड़ा अभियान है. सोशल मीडिया पर इस हैशटैग के साथ यौन हमलों (ख़ासकर कार्यस्थल पर) के शिकार हुए लोग आपबीती बयान करते हैं.

यह अभियान लोगों को हिम्मत जुटाकर अपने साथ हुए यौन दुर्व्यवहार के बारे में बोलने और प्रताड़ित करने वालों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित करता है.

पिछले साल जब हॉलीवुड निर्देशक हार्वी वाइन्स्टीन पर यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगे, पूरी दुनिया में इस अभियान ने ज़ोर पकड़ लिया और अब तक आम लोगों से लेकर कई बड़ी हस्तियां इसमें शामिल हो चुकी हैं.

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Image caption हार्वी वाइन्स्टाइन पर आरोप लगने के बाद इस मुहिम ने ज़ोर पकड़ा था

कहां से हुई शुरुआत

अक्टूबर 2017 में सोशल मीडिया पर #MeToo हैशटैग के साथ लोगों ने अपने साथ कार्यस्थल पर हुए यौन उत्पीड़न या यौन हमलों की कहानियां सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू किया.

'द गार्डियन' के मुताबिक़ टैराना बर्क नाम की एक अमरीकी सामाजिक कार्यकर्ता ने कई साल पहले ही साल 2006 में "मी टू" शब्दावली को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था.

मगर यह शब्दावली 2017 में उस समय लोकप्रिय हुई जब अमरीकी अभिनेत्री अलिसा मिलानो ने ट्विटर पर इसे इस्तेमाल किया.

मिलानो ने यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों को अपने साथ हुए घटनाक्रम के बारे में ट्वीट करने के लिए कहा ताकि लोग समझ सकें कि यह कितनी बड़ी समस्या है.

उनकी यह कोशिश क़ामयाब भी हुई और #MeToo हैशटैग इस्तेमाल करते हुए कई लोगों ने आपबीती सोशल मीडिया पर साझा की.

हैशटैग के रूप में #MeToo तभी से पूरी दुनिया में बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाने लगा. हालांकि कुछ जगहों पर लोगों ने इस तरह के अनुभवों को बयां करने के लिए कुछ और हैशटैग भी इस्तेमाल किए मगर वे स्थानीय स्तर पर ही सिमटे रहे.

उदाहरण के लिए फ़्रांस में लोगों ने #balancetonporc नाम का अभियान शुरू किया ताकि महिलाएं अपने ऊपर यौन हमला करने वालों को शर्मिंदा कर सकें. इसी तरह से कुछ लोगों ने #Womenwhoroar नाम का हैशटैग भी इस्तेमाल किया था मगर ये पॉप्युलर नहीं हो पाए.

लेकिन #MeToo न सिर्फ़ सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हुआ बल्कि अब यह वर्चुअल दुनिया से बाहर निकलकर यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ एक लोकप्रिय अभियान बन चुका है.

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