जाह्नवी कपूर के आंटी कहने पर स्मृति इरानी ने क्या कहा?- सोशल

  • 27 दिसंबर 2018
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Image caption स्मृति इरानी

रोहित वेमुला केस में स्मृति इरानी के बयान पर ढाई बरस पहले अंग्रेज़ी अखबार 'द टेलीग्राफ' ने एक चर्चित हेडिंग लगाई थी- आंटी नेशनल.

इस हेडिंग पर असहज हुईं स्मृति इरानी ने अपने अंदाज़ में तंज किया था. लेकिन इस बार स्मृति को आंटी किसी अख़बार ने नहीं कहा है और न ही वो खुद को आंटी कहे जाने से असहज हुई हैं.

केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ने इंस्टाग्राम पर श्रीदेवी की बिटिया जाह्नवी कपूर के साथ एक बूमरैंग वीडियो शेयर किया है.

इस पोस्ट में स्मृति लिखती हैं, ''इससे अच्छा तो कोई मेरी जान ही ले ले वाला पल. जब जाह्नवी कपूर ने लगातार मुझे आंटी कहने के लिए बहुत प्यार से माफी मांगी.''

स्मृति ने लिखा, ''और इसके जवाब में आप बस यही कह सकें कि कोई बात नहीं बेटा #टोटल_सियापा ये आजकल के बच्चे. #आंटी_किसको_बोला.''

स्मृति की इस मज़ाकिया पोस्ट पर सैकड़ों लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

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स्मृति इरानी की पोस्ट पर क्या बोले लोग?

कुनाल वघेरा ने लिखा, ''स्मृति इरानी सबसे कूल मंत्री हैं.''

संजम नाम की यूज़र ने लिखा, ''जाह्नवी इतनी बड़ी तो हो ही गई हैं कि आपको आंटी नहीं, मैम कह सकें. ये बड़े सितारों के बच्चे भी न...''

शिल्पी लिखती हैं, ''मैम आपके सेंस ऑफ ह्यूमर की कायल हूं. भारत को ऐसे और लोगों की ज़रूरत है.''

शुचि श्रीवास्तव ने लिखा, ''मैम आपको एक बात बता दूं कि आप कमाल का कैप्शन लिखती हैं.''

सोना शर्मा लिखती हैं, ''हाहा. इन दिनों आंटी कहने का मतलब है कि आप किसी को गाली दे रहे हैं.''

स्मृति इरानी की फिलहाल उम्र 42 साल है और जाह्नवी कपूर की 21 साल. हाल ही में जाह्नवी की पहली फ़िल्म 'धड़क' रिलीज़ हुई थी.

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संबोधनों पर इरानी की स्मृतियां

बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने साल 2016 में ट्विटर पर स्मृति को डियर कहकर संबोधित किया था.

इसके जवाब में स्मृति ने ट्विटर पर उन्हें जवाब दिया, "महिलाओं को डियर कबसे लिखने लगे."

ये पूरा मामला ट्विटर पर काफी चर्चा में रहा था.

इसके कुछ वक़्त बाद स्मृति ने अपने मंत्री के तौर पर अनुभव, कई विवादों और भारत में एक महिला होने के अनुभवों को साझा किया था.

स्मृति ने लिखा, "मेरी परवरिश एक आम मध्यम वर्ग के परिवार में हुई जहां लड़कियों को सिखाया जाता है कि अगर राह चलते लड़के तुम्हें छेड़ें तो उन्हें नज़रअंदाज़ करके आगे बढ़ जाओ. कितनी भी बेइज़्ज़ती महसूस हो, मुंह से आवाज़ मत निकालो. लेकिन उनमें कुछ होती हैं मेरे जैसी बग़ावती लड़कियां जो आवाज़ उठाती हैं, सवाल करती हैं. क्यों सवाल न उठाएँ? क्यों चुप रहें? तो हमें जवाब मिलता है- क्योंकि इसमें नुकसान तुम्हारा है. लड़के का कुछ नहीं बिगड़ेगा."

ख़त में स्मृति ने मंत्री के तौर पर अपनी उपलब्धियों का ब्यौरा दिया था और ख़त के अंत में अपना मज़ाक उड़ाने वालों पर तंज कसते हुए इस चिट्ठी के नीचे है- सादर, आंटी नेशनल.

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