ISRO का बैलगाड़ी पर सैटेलाइट ले जाना क्या गांधी परिवार का दोष था?

  • 28 मार्च 2019
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सोशल मीडिया पर दो तस्वीरें इस दावे के साथ शेयर की जा रही हैं कि "जब भारत की स्पेस एजेंसी इसरो आर्थिक तंगी में थी, तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का परिवार देश का धन लुटा रहा था."

इनमें एक तस्वीर है इंदिरा गांधी की, जो अपने परिवार के साथ किसी विमान में बैठी हुई हैं.

वहीं दूसरी तस्वीर इसरो के वैज्ञानिकों की बताई जा रही है जो कथित तौर पर बैलगाड़ी पर किसी सैटेलाइट को रखकर ले जा रहे हैं.

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सोशल मीडिया पर ये दावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुधवार को की गई घोषणा के बाद से ही किया जा रहा है.

मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में दुनिया की चौथी महाशक्ति बन गया है और भारतीय वैज्ञानिकों को एक लाइव सैटेलाइट को नष्ट करने में सफ़लता मिली है.

एक ओर जहाँ दक्षिणपंथी रुझान वाले लोग फ़ेसबुक ग्रुप्स में, ट्विटर और शेयर चैट पर इसे "मोदी राज में देश को मिली बड़ी सफ़लता" बता रहे हैं. वहीं विपक्ष का समर्थन करने वालों की राय है कि जिस उपलब्धि का बखान कर पीएम मोदी तारीफ़ें बटोरना चाह रहे हैं, वो दरअसरल कांग्रेस की सरकार में भारत हासिल कर चुका था.

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Image caption वायरल तस्वीर में इंदिरा गांधी के साथ सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका दिखाई दे रहे हैं

गांधी परिवार पर निशाना

लेकिन बुधवार शाम के बाद यह देखने को मिला कि दक्षिणपंथी विचारधारा वाले ग्रुप्स में देश के वैज्ञानिकों की कथित अवहेलना के लिए कांग्रेस पार्टी समेत इंदिरा गांधी और उनके परिवार को निशाना बनाया जाने लगा.

जिन दो तस्वीरों का ज़िक्र हमने किया वो फ़ेसबुक के कई बड़े ग्रुप्स में शेयर किया गया है और इसे हज़ारों लोग शेयर कर चुके हैं.

इन तस्वीरों के साथ अधिकांश लोगों ने लिखा है, "कभी मत भूलिएगा कि जब इसरो को एक रॉकेट ले जाने के लिए बैलगाड़ी दे दी गई थी, तब गांधी परिवार एक चार्टर विमान में जन्मदिन का जश्न मना रहा था."

अपनी पड़ताल में हमने पाया कि दोनों तस्वीरें सही हैं, इनके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है, लेकिन इन तस्वीरों के संदर्भ को पूरी तरह बदल दिया गया है.

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इसरो वाली तस्वीर

इसरो के वैज्ञानिकों और बैलगाड़ी पर रखे सैटेलाइट की तस्वीर जून 1981 की है.

ये एप्पल नाम की एक प्रायोगिक कम्युनिकेशन सेटेलाइट थी जिसका प्रक्षेपण 19 जून 1981 को किया गया था. भारतीय स्पेस प्रोग्राम की ये एक बड़ी उपलब्धि थी.

सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा है कि इसरो आर्थिक तंगी में था इसलिए इस सैटेलाइट को बैलगाड़ी पर ले जाया गया था.

लेकिन ये दावा पूरी तरह ग़लत है.

विज्ञान मामलों के जानकार पल्लव बागला ने इस तस्वीर के पीछे की पूरी कहानी बीबीसी को बताई.

उन्होंने कहा, "एप्पल सेटेलाइट को बैलगाड़ी पर रखकर ले जाने का फ़ैसला इसरो के वैज्ञानिकों का सोचा-समझा फ़ैसला था. ये उनकी मजबूरी नहीं थी."

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Image caption प्रायोगिक कम्युनिकेशन सेटेलाइट एप्पल की फ़ाइल फ़ोटो

बागला ने बताया, "उस समय भारतीय वैज्ञानिकों के पास 'इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफ़ेयरेंस रिफ़्लेक्शन' तकनीक की सीमित जानकारी थी. वैज्ञानिक सैटेलाइट को किसी इलेक्ट्रिक मशीन पर रखकर नहीं ले जाना चाहते थे. इसीलिए बैलगाड़ी को चुना गया था."

पल्लव बागला कहते हैं कि इसरो के एक पूर्व चेयरमैन ने ही उन्हें यह पूरी कहानी बताई थी.

इसरो की आधिकारिक वेबसाइट पर यह तस्वीर और इससे जुड़ी अधिक जानकारी, दोनों उपलब्ध हैं.

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पर क्या कभी इसरो को ऐसी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा जब भारतीय वैज्ञानिकों के लिए संसाधनों की कमी हुई हो?

इसके जवाब में पल्लव बागला बताते हैं, "इसरो के लोगों ने ही हमें हमेशा बताया है कि इस संस्थान को किसी की भी सरकार में संसाधनों की तंगी नहीं महसूस हुई. ख़ासतौर पर नए प्रोजेक्ट्स को शुरू करने की जब भी बात आई, तब कभी ऐसा नहीं हुआ कि इसरो के पास उसके लिए संसाधन न हों."

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गांधी परिवार की तस्वीर

इस तस्वीर के बारे में सोशल मीडिया पर लिखा जा रहा है कि "इंदिरा गांधी ने पद पर रहते हुए अपने परिवार पर देश का धन लुटाया."

लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गांधी परिवार की यह तस्वीर साल 1977 की है. यानी इसरो के प्रक्षेपण से क़रीब चार साल पहले की.

इन रिपोर्ट्स में लिखा है कि ये राहुल गांधी के सातवें जन्मदिन (19 जून) की तस्वीर है. इन रिपोर्ट्स को सही माना जाए तो उस समय इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री नहीं थीं.

जून 1977 में भारत के प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई थे और देश में जनता पार्टी की सरकार थी.

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