अंतरिक्ष में पाकिस्तानी पर मंत्री फ़वाद हुसैन का उड़ा मज़ाक- सोशल

  • 26 जुलाई 2019
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Image caption आम तौर पर अंतरिक्ष यात्री एयरफ़ोर्स के बेहतरीन पायलट होते हैं (सांकेतिक तस्वीर)

इसी हफ़्ते, 22 जुलाई को क़रीब दो बजकर 43 मिनट पर भारत ने चांद पर अपना दूसरा मिशन भेजा है.

भारत ने चाँद पर तब अपना यह मिशन भेजा है जब अपोलो 11 के चाँद मिशन की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है.

अब भारत के पड़ोसी मुल्क़ पाकिस्तान ने भी अंतरिक्ष में मिशन भेजने की घोषणा कर दी है. हलांकि इस घोषणा का सोशल मीडिया पर मज़ाक उड़ाया जा रहा है.

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पाकिस्तान के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री चौधरी फ़वाद हुसैन ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की इस अति महत्वाकांक्षी योजना के बारे में बताया.

उन्होंने लिखा है, ''मुझे ये घोषणा करते हुए बेहद गर्व का अनुभव हो रहा है कि किसी पाकिस्तानी को पहली बार अंतरिक्ष में भेजे जाने की प्रक्रिया की शुरुआत फ़रवरी 2020 में शुरू हो जाएगी. 50 लोगों को इसके लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा- फिर इस लिस्ट में से 25 लोगों को चुना जाएगा और साल 2022 में हम पहली बार किसी मानव को अंतरिक्ष में भेजेंगे. यह हमारे देश का अभी तक का सबसे बड़ा अंतरिक्ष मिशन होगा.''

फ़वाद चौधरी की इस घोषणा ने भले ही दुनिया का ध्यान अपनी ओर नहीं खींचा लेकिन उनके इस ट्वीट पर पाकिस्तान की सोशल मीडिया एक्टिविस्ट और टीवी पत्रकार गुल बुख़ारी की टिप्पणी ज़रूर चर्चा में है.

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अगर बात ट्विटर ट्रेंड की करें तो यह पाकिस्तान में ट्रेंड कर रहा है.

चौधरी फ़वाद हुसैन के ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए बुखारी ने सवाल किया है, ''क्या आप उलब्धियां बता सकते हैं? अंतरिक्ष में एक पाकिस्तानी को भेजने के लिए पैसे खर्च करेंगे? अब तक तो कोई वैज्ञानिक उपलब्धियां नहीं दिखी हैं.''

बुख़ारी के इस ट्वीट पर भारत और पाकिस्तान समेत कई कोनों से लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

सलमान हैदर ने ट्वीट किया है, हमारे पास स्वीमिंग पूल नहीं है इसलिए हम जंगल में डूबेंगे लेकिन हम डूबेंगे.

सनवली नाम के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया है कि पहले धरती पर दीपक जलाएं और उसके बाद कहीं चांद-सितारों की बात करें.

वहीद लिखते हैं "हमें इस तरह की चीज़ों की ज़रूरत नहीं है. लोग यहां भूख से मर रहे हैं और आप लोग पाकिस्तानी आवाम के पैसे को अपने ऐश ओ आराम के लिए उड़ा रहे हैं. सबसे पहले यहां से ग़रीबी को दूर कीजिए उसके बाद अंतरिक्ष पर भेजने की बात कीजिए."

वहीं दूसरी ओर फ़वाद के ट्वीट पर भी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

मुरलीकृष्णा ने ट्वीट किया है कि साल 2022 का इंतज़ार करने की क्या ज़रूरत है. अपने देश का नाम चीन के सैटेलाइट पर लिखिए और भेज दीजिए.

सिदरा कंवल लिखती हैं हमारे अनुरोध पर, नवाज़ शरीफ और ज़रदारी को भी अंतरिक्ष में भेज देना चाहिए. जितना कम, उतनी स्वच्छता.

प्रशांत भारती कहते हैं कि मैं अपनी तरफ़ से हाफ़िज सईद का नाम देता हूं और इसके लिए आपको इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है. वो इसके लिए सबसे बेहतर इंसान हैं.

हादिया नूर लिखती हैं कि आप चीन समेत कई देशों से क़र्ज़ लेकर बैठे हैं और लोगों को ख़ुश करने के लिए ऐसा जोक.

हालांकि कुछ लोग ऐसे भी जिन्होंने इच्छा ज़ाहिर की है कि वो अंतरिक्ष में जाना चाहते हैं और प्रक्रिया के बारे में जानना चाहते हैं.

मारवी के ट्विटर हैंडल से लिखा गया है

बधाई देने वाले लोगों की संख्या भी है.

डॉ. आयशा लिखती है कि अगर आप ऐसा करने में कामयाब रहे तो करोड़ों दिल जीत लेगें. अब इस पर यू-टर्न मत लीजिएगा.

भारत के मुक़ाबले में पाकिस्तान का अंतरिक्ष कार्यक्रम बहुत सीमित पैमाने पर है. मार्च 2019 में जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि भारत अंतरिक्ष में एंटी सैटेलाइट मिसाइल लॉन्च करने वाले देशों में शामिल हो गया है तब इस्लामाबाद में विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में भी इन हथियारों को लेकर चिंता देखी जा सकती थी.

पाकिस्तान का कहना था कि वह अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ के सख़्त ख़िलाफ़ है लेकिन पाकिस्तान इस दौड़ में शामिल होने की स्थिति में है या नहीं यह मुश्किल सवाल है.

पाकिस्तान ने अपना अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम 1961 में शुरू किया था.

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यही संगठन चीन की मदद से अब तक कई सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज चुका है. सूपरको के मुताबिक़, पाकिस्तान की 2011 और 2040 के बीच पांच जिओ सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुंचाने की योजना है.

इस योजना को तत्कालीन प्रधानमंत्री सैयद यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने मंज़ूरी दी थी.

वहीं अब जुलाई 2019 में भारत अपने दूसरे चांद मिशन को अंजाम दे चुका है. भारत पहली बार चाँद की सतह पर अंतरिक्षयान भेजने जा रहा है. अगर चंद्रयान-2 सफल रहता है तो अंतरिक्ष कार्यक्रम में भारत की यह बहुत बड़ी कामयाबी होगी.

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भारत ने इससे पहले चंद्रयान-1 2008 में लॉन्च किया था. यह भी चाँद पर पानी की खोज में निकला था. भारत ने 1960 के दशक में अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया था और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे में यह काफ़ी ऊपर है.

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