अयोध्या मामला: असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर क्यों डाला ये बुक कवर?

  • 9 नवंबर 2019
अयोध्या, राम जन्मभूमि, सुप्रीम कोर्ट, बाबरी मस्जिद, राम, विश्व हिंदू परिषद इमेज कॉपीरइट Getty Images

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर फ़ैसला दे दिया है.

जहां बाबरी मस्जिद के गुंबद थे, वो जगह अब हिंदू पक्ष को मिलेगी. साथ ही सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए पाँच एकड़ ज़मीन उपयुक्त जगह पर दी जाएगी.

दशकों पुराने इस विवाद में हिंसक संघर्ष, विरोध प्रदर्शन और कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रम शामिल रहे हैं. लंबे कानूनी सफ़र के बाद सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला सोशल मीडिया पर छाया हुआ है.

अभी भारत में गूगल पर अयोध्या, राम जन्मभूमि, सुप्रीम कोर्ट, बाबरी मस्जिद, राम और विश्व हिंदू परिषद जैसे शब्द सबसे ज़्यादा सर्च किए जा रहे हैं.

फ़ैसला आने के डेढ़ घंटे बाद तक ट्विटर पर टॉप 10 ट्रेंड्स अयोध्या विवाद से जुड़े थे.

Image caption जस्टिस रंजन गोगोई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा है कि इससे पता चलता है कि क़ानूनी तरीके से कोई भी विवाद सुलझाया जा सकता है और क़ानून की नज़र में सब बराबर होते हैं.

एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस फ़ैसले पर कुछ लिखा नहीं है लेकिन एक किताब का कवर पेज शेयर किया है.

ऑक्सफ़ोर्ड इंडिया से छपी इस किताब का नाम है, "सुप्रीम बट नॉट इनफ़ैलिबल."

यानी "शीर्ष किंतु अचूक नहीं."

इस किताब में सुप्रीम कोर्ट से जुड़े निबंध हैं. किताब के संपादकों में राजीव धवन भी शामिल हैं जो इस मुक़दमे में सुन्नी पक्ष की पैरवी कर रहे थे.

बाद में प्रेस कॉन्फ्ऱेंस करते हुए ओवैसी ने बताया कि "सुप्रीम बट नॉट इनफ़ैलिबल" उन्होंने नहीं, जस्टिस जेएस वर्मा ने कहा था जिनका संघ परिवार भी सम्मान करता है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने जो फ़ैसला दिया है वो ऐतिहासिक है और इसे सहज रूप से सभी को स्वीकारना चाहिए. मैं ये भी मानता हूं कि इससे सर्वधर्म समभाव की भावना मज़बूत होगी. मैं सभी से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील करता हूं."

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी फ़ैसले का स्वागत करते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है.

बीजेपी के 'राम मंदिर आंदोलन' का अहम चेहरा रहीं पार्टी नेता और पूर्व मंत्री उमा भारती ने इस मौक़े पर विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत अध्यक्ष अशोक सिंघल को याद किया है और लाल कृष्ण आडवाणी का 'अभिनंदन' किया है.

कांग्रेस नेता राज बब्बर ने इस फ़ैसले को स्वीकार करने और शांति और एकता बनाए रखने की अपील की है.

उन्होंने लिखा, "सभी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च हमें मानवता सिखाते हैं. हमारी अदालतें मानवता के आदर्शों में हमारा भरोसा बनाए रखती हैं. आइए देश में शांति, सुरक्षा और एकता बनाए रखने की भावना के साथ अयोध्या के फ़ैसले को स्वीकार करें."

बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस फ़ैसले का सम्मान करते हुए इस पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में आगे काम होने की अपील की है.

शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने आठ शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दी है, "समापन. शांति. एकता. सहिष्णुता. प्यार. सम्मान. आस्था. जय हिंद."

बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने लिखा है, "जब भगवान राम मंदिर निर्माण को हरी झंडी देना चाहते थे, तभी वह दी गई है. जय श्री राम."

उन्होंने अशोक सिंघल को भारत रत्न दिए जाने की मांग भी की है.

कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने लिखा है कि 9 नवंबर 2019 को सार्वभौमिक मानवता, धार्मिक विविधता, सहिष्णुता, सांप्रदायिक सौहार्द, प्यार, शांति और भाईचारे की ओर भारत की प्रतिबद्धता के तौर पर याद रखा जाएगा.

कवि कुमार विश्वास ने मुस्लिम पक्ष के पैरोकार इक़बाल अंसारी की ओर से फ़ैसला मंज़ूर किए जाने की ख़बर को रिट्वीट करते हुए अल्लामा इक़बाल का शेर लिखा है.

लेखक चेतन भगत ने इस मौक़े पर सुप्रीम कोर्ट और हिंदू-मुस्लिम समुदायों को शुक्रिया कहा है.

उन्होंने लिखा, "शुक्रिया सुप्रीम कोर्ट. पूरे मुस्लिम समुदाय को उनकी उदारता के लिए शुक्रिया. हिंदू समुदाय को उनके धैर्य के लिए धन्यवाद. भारत अखंड है और राम का जन्मस्थान भी. जय श्री राम."

पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने लिखा है कि मंदिर और मस्जिद का शिलान्यास एक दिन शुरू होना चाहिए.

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