नस्लभेद की घटना पर ट्वीट करने वाले बॉलीवुड सितारों पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

जॉर्ज फ़्लॉयड

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एक काले नागरिक जॉर्ज फ़्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद अमरीका के मिनेपॉलिस शहर समेत कई शहरों में हिंसा भड़की हुई है. वहां लोग नस्लभेद के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं और अंसतोष को देखते हुए अमरीका के कई शहरों में कर्फ़्यू लगा हुआ है.

ज़्यादातर विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण ही रहे हैं लेकिन कई विरोध-प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारी पुलिस के साथ संघर्ष करते नज़र आए हैं. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार जला दी, संपत्तियों में आग लगाई और दुकानों को लूटा.

अमरीका के साथ ही दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी इस घटना के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं.

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भी शुक्रवार को राजधानी ओटावा में पार्लियामेंट के सामने नस्लभेद के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में शामिल हुए.

भारत में भी लोग इस घटना के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं साथ ही दुनियाभर में रंग के आधार पर होने वाले भेदभाव को ख़त्म करने की अपील कर रहे हैं. इसे लेकर सोशल मीडिया पर #BLACK_LIVES_MATTER हैशटैग भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

हालांकि बॉलीवुड के कुछ अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने जब अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस घटना और रंगभेद को लेकर टिप्पणी की तो लोगों ने उन्हें आड़े हाथों लिया.

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अभिनेत्री तमन्ना भाटिया

कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब भारत में ऐसी घटनाएं होती हैं तो बॉलीवुड सेलिब्रिटी चुप्पी साधे रहते हैं लेकिन अमरीका में हुई घटना से उन्हें दुख हो रहा है. सोशल मीडिया पर ऐसी कई टिप्पणी दिखीं जिसमें लोगों ने गोरेपन की क्रीम से जुड़े विज्ञापन करने वाले अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की तस्वीरें लगाकर उन पर सवाल उठाए कि आखिर वो अपनी बात पर कहां तक जायज़ हैं.

टीम कंगना रनौत के ट्विटर हैंडल से बीबीसी न्यूज़ को दिए अभिनेत्री कंगना रनौत का एक इंटरव्यू शेयर किया गया है जिसमें उन्होंने स्थानीय मुद्दों को छोड़कर हज़ारों मील दूर अमरीका में चल रहे मामले को लेकर भारतीय सेलेब्रिटीज़ की चिंता पर उन्हें आड़े हाथ लिया है.

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भी अमरीका में हुई घटना पर भारतीय सेलिब्रिटीज़ के ट्वीट पर तंज कसा. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ''उन सभी सेलिब्रिटीज़ के लिए काफ़ी सम्मान जो #BLACK_LIVES_MATTER हैशटैग का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे आपकी कायरता सामने आती है जब आप अमरीकियों की ज़िंदगी के लिए ट्वीट करते हैं लेकिन भारतीयों के लिए नहीं ट्वीट कर सकते.''

पत्रकार राणा अयूब ने भी ट्विटर पर लिखा, ''हमारे स्टार जो दिल्ली में मुसलमान विरोधी घटनाओं, लिंचिंग, नागरिकता कानून, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों की गिरफ़्तारी पर चुप्पी साधे रहे वो हैशटैग ब्लैक लाइव्स मैटर इस्तेमाल कर रहे हैं.''

सीपीआई(एमएल) नेता कविता कृष्णन ने अपने एक ट्वीट में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने लिखा था कि वैश्विक स्तर पर नस्लभेद के ख़िलाफ़ बहुत कुछ करने की ज़रूरत है.

कविता कृष्णन ने ट्वीट में लिखा, '' प्रियंका चोपड़ा, जॉर्ज फ़्लॉयड की हत्या और हैशटैग ब्लैक लाइव्स मैटर पर आपकी एकजुटता देखकर अच्छा लगा. लेकिन आप अपने ही देश में मुसलमानों के ख़िलाफ़ भारत की पुलिस की संस्थागत इस्लामोफोबिक हिंसा पर चुप क्यों हैं? कृपया बताएं भारत में #MuslimLivesMatter कहें?

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बॉलीवुड अभिनेता अभय देओल ने भी इंस्टाग्राम पर एक लंबी पोस्ट लिखी और उसके जरिए देश के सेलिब्रिटीज़ पर सवाल उठाए कि अगर वो अमरीका में हुई घटना देख सकते हैं तो क्या अब उन्हें अपने आसपास होने वाली घटनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए?

अभय देओल ने लिखा, ''''शायद अब इसका समय भी आ गया है? अब क्योंकि ''जागरूक'' भारतीय सेलिब्रिट और मध्य वर्ग अमरीका में नस्लभेद के ख़िलाफ़ एकजुटता दिखा रहा है, वे शायद देखना चाहेंगे कि उनके अपने देश में क्या हो रहा है? अमरीका ने दुनिया में हिंसा फैलाई है, उन्होंने इसे और अधिक ख़तरनाक जगह बना दिया है, लेकिन ऐसा अपरिहार्य था कि यह वापस आ जाएगा. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि वे इसके लायक हैं, मैं कह रहा हूं कि इस तस्वीर को एक साथ देखो. मैं कह रहा हूं कि अपने देश में सिस्टमैटिक समस्याओं को सामने लाकर उनका समर्थन करें, क्योंकि वे एक ही चीज हैं. मैं कह रहा हूं कि उनके नेतृत्व का पालन करें, लेकिन उनके कामों का नहीं. अपने देश के लिए ज़रूरी एक्शन, अपने खुद के आंदोलन खड़े करें. ''ब्लैक लाइव्स मैटर मूवमेंट'' यही है. बड़े स्तर पर देखें तो "हम" और "वो" जैसा कुछ नहीं नहीं है. ऐसा कोई देश नहीं है जो वास्तविक हो. लेकिन एक ग्रह संकट में है.''

#migrantlivesmatter #minoritylivesmatter #poorlivesmatter

उन्होंने अंत में लिखा, ''ब्लैक लाइव्स मैटर'' और आगे यह भी जोड़ा, ''पता लगा लीजिए कि मैंने उस हैशटैग का इस्तेमाल क्यों नहीं किया और फिर भी इस आंदोलन का समर्थन कर रहा हूं.''

उन्होंने एक तस्वीर भी पोस्ट की जिस पर हैशटैग के साथ लिखा था- प्रवासियों की ज़िंदगी मायने रखती है. अल्पसंख्यकों की ज़िंदगी मायने रखती है. गरीबों की ज़िंदगी मायने रखती है.

एक अन्य पोस्ट पर उन्होंने लिखा, ''बीते कुछ सालों में भारत में गोरेपन वाली क्रीमें बढ़ी हैं. गोरेपन के अलावा अब त्वचा में चमक और सफेदी लाने वाली क्रीम भी बिक रही हैं. अधिकतर ब्रांड सीधेतौर पर गोरेपन का टैग नहीं रखना चाहते.''

अभय देओल के इन सोशल मीडिया पोस्ट में हज़ारों लोगों ने अपनी राय दी है. जिसमें अलग-अलग सेलिब्रिटी पर सवाल भी उठाए गए हैं.

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने अभय देओल की इंस्टाग्राम पोस्ट को ट्वीट किया और लिखा, ''अभय देओल, आपसे पूरी तरह सहमत हूं. हां, हर प्रवासी की ज़िंदगी मायने रखती है. हां अल्पसंख्यकों की ज़िंदगी मायने रखती है. हां गरीबों की ज़िंदगी मायने रखती है.''

अभिनेत्री दिशा पटानी ने 30 मई को एक तस्वीर पोस्ट की जिस पर लिखा था- ''सभी रंग खूबसूरत हैं.''

कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने उनके इस ट्वीट को लेकर उन पर निशाना साधा. @ChoubeyShivangi नाम के हैंडल ने ट्वीट किया, ''आप उस फेयरनेस क्रीम विज्ञापन के लिए काम करती हैं जो कहता है ''ज़्यादा गोरापन...''

अभिनेत्री तमन्ना भाटिया ने अपनी एक तस्वीर पोस्ट की जिसके साथ उन्होंने लिखा, ''आपकी चुप्पी आपको नहीं बचा पाएगी. क्या इंसान या जानवर, हर ज़िंदगी मायने नहीं रखती? किसी को भी चुप करा देना यूनिवर्सल लॉ के ख़िलाफ़ है. हमें फिर से इंसान होने के लिए, दया व्यक्त करने और प्रेम अपनाने के लिए, चीज़ें भुलानी होंगी और सीखनी होंगी''

इस पोस्ट पर कई लोगों ने उन पर सवाल उठाए और गोरेपन का दावा करने वाली क्रीम के उनके विज्ञापन की तस्वीरें भी पोस्ट कीं. वहीं कुछ लोगों ने उन पर अपने देश की समस्याओं के बारे में भी सवाल उठाए.

@TheOceanVibes नाम के हैंडल ने लिखा, ''वो लोग जो गोरापन दिलाने वाली क्रीमों का इस्तेमाल कर रहे हैं और दूसरों को भी इसकी सलाह दे रहे हैं लेकिन नस्लभेद का विरोध भी कर रहे हैं, वो एक दर्ज़े के पाखंडी हैं.''

@Surya_BornToWin नाम के हैंडल ने लिखा, ''क्या आपने प्रवासी मज़दूरों के बारे में बात की है?''

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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